अंकल से चुदाई का मजेदार खेल

प्रेषक : तान्या …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम तान्या गुप्ता है और में हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 21 साल है, लेकिन में कुँवारी नहीं हूँ, क्योंकि मेरी चूत की जमकर चुदाई हो चुकी है और मुझे उस खेल में बहुत मज़ा आया। दोस्तों मेरा मानना है कि आप लोग बहुत अच्छी तरह से समझते होंगे कि कुँवारी चूत और शादीशुदा चूत में क्या अंतर होता है? दोस्तों आज में कामुकता डॉट कॉम पर अपनी पहली सच्ची घटना, मेरे जीवन का वो सच आज आप सभी को लिखकर बता रही हूँ और इसमे मेरे साथ क्या और कैसे हुआ में वो सब कुछ पूरी तरह विस्तार से बताने जा रही हूँ। दोस्तों आज में आप सभी लोगों को अपनी पहली चुदाई के बारे में बताने जा रही हूँ और इस चुदाई के बाद मेरा पूरा जीवन बिल्कुल बदल चुका है, में अब वो बिल्कुल भी नहीं रही जो में उस घटना से ठीक पहले थी। दोस्तों में उम्मीद करती हूँ कि इसको पढ़कर आप सभी को जरुर अच्छा लगेगा और अब में अपनी उस कहानी को शुरू करती हूँ। दोस्तों मेरा नाम तान्या गुप्ता है और यह घटना तब की है, जब में अपनी कॉलेज की पढ़ाई को पूरी करने के बाद कोई अच्छी सी नौकरी की तलाश में थी। फिर उस एक नौकरी के लिए मैंने बहुत सारे ऑफिसों के चक्कर काटे, लेकिन मुझे कहीं भी कोई ऐसा जुगाड़ नहीं मिला जिसका फायदा उठाकर मुझे नौकरी मिल जाती, लेकिन फिर भी मैंने हार नहीं मानी और में वैसे ही लगी रही।

फिर में अपने इस समय को बिताने के लिए एक स्कूल में बस ऐसे ही अध्यापक की नौकरी करने लगी, लेकिन में उस स्कूल की नौकरी से संतुष्ट नहीं थी, क्योंकि वो काम मेरे लिए नहीं था। अब मुझे उसके आगे भी कुछ करके एक अच्छी नौकरी करनी थी, वो मेरा एक सपना था इसलिए में और मेरे घरवाले भी मेरे लिए कोई अच्छी नौकरी की तलाश में थे, क्योंकि वो भी मुझे अच्छी नौकरी करते हुए देखना चाहते थे, जैसे किसी बेंक की नौकरी किसी बड़ी कंपनी में नौकरी जिसको करने के बाद मेरा भविष्य अच्छा हो। दोस्तों मेरे एक बहुत अच्छे अंकल है, जो मेरे पापा के बहुत अच्छे दोस्त है और वो पंजाब में रहते है उनका नाम करमचंद है और वो बहुत पैसे वाले है। दोस्तों उनकी बहुत से लोगो से बहुत अच्छी जान पहचान है और इसलिए मेरी मम्मी ने उनसे एक दिन मेरी नौकरी के बारे में बात करके उनसे मेरे लिए कोई अच्छी जगह पर काम के लिए कहा। फिर अंकल ने माँ को कहा कि हाँ ठीक है, में तन्नू (मेरा प्यार का नाम) को कोई भी अच्छी जगह पर नौकरी जरुर लगा दूँगा, क्योंकि एक प्राइवेट बैंक में मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है, इसलिए में अपने दोस्त से तान्या की नौकरी के बारे में बात करता हूँ और मुझे उम्मीद है कि यह काम बहुत जल्दी हो जाएगा।

फिर करीब चार पांच दिनों के बाद अंकल का मेरे घर पर फोन आया और तब वो कहने लगे कि उन्होंने अपने उस दोस्त से मेरी नौकरी के बारे में बात की है और उनके उस दोस्त ने मुझे दिल्ली इंटरव्यू के लिए गुरुवार के दिन बुलाया है। अब मम्मी ने उनको कहा कि हाँ ठीक है, तान्या गुरुवार के दिन दिल्ली अपने उस इंटरव्यू के लिए जरुर पहुंच जाएगी, लेकिन फिर मम्मी ने कुछ सोचकर उनको कहा कि एक जवान लड़की का अकेले इतना दूर परदेस में जाना ठीक नहीं होगा, इसलिए अगर आपको समय हो तो आप ही इसके साथ चले जाए। अब अंकल ने कहा कि मुझे तो इन दिनों बहुत काम है इसलिए में इसके साथ नहीं जा सकता, लेकिन हाँ में यहाँ से अपने उस दोस्त को फोन कर दूँगा और कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि में इसका वहां का सभी काम फोन पर बात करके करवा दूंगा और अगर इस बीच मुझे थोड़ा सा भी समय मिल तो में कोशिश करके इसके साथ चला जाऊंगा। अब मम्मी ने उनको कहा कि हाँ ठीक है, जैसा आपको अच्छा लगे, लेकिन आप बस इसका काम जरुर करवा दो। फिर मंगलवार के दिन मेरे अंकल का फोन आ गया और उन्होंने मम्मी को कहा कि उनकी बात अपने दोस्त से हो चुकी है, मेरा इंटरव्यू बुधवार के दिन हो जाएगा और अब वो भी मेरे साथ दिल्ली चले जाएँगे उन्होंने मेरे काम के लिए समय निकाल लिया है।

दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मम्मी ने खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है और यह भी बहुत अच्छा है कि आप भी तन्नू के साथ चले जाएँगे जिसकी वजह से हमे बिल्कुल भी चिंता नहीं होगी और फिर आपके साथ में जाने से बहुत फर्क पड़ेगा। अब अंकल ने कहा कि वो आज शाम तक हमारे घर आ जाएँगे और दिल्ली के लिए वो मेरे साथ कल सुबह जल्दी ही निकल जाएँगे। फिर वो रात को करीब आठ बजे हमारे घर पहुँच गये, उनके आने के बाद माँ ने उनको खाने के लिए पूछा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया, वो कहने लगे कि में खाना खाकर आया हूँ और कुछ देर बाद माँ ने उनको चाय बनाकर दी। फिर हम सभी लोग साथ में बैठकर कुछ देर बातें करते रहे और उसी समय अंकल के लिए मेरी माँ ने बिस्तर लगा दिया और फिर हम सभी जाकर अपनी अपनी जगह जाकर सो गए। फिर अगले दिन सुबह पांच बजे उठकर में और अंकल दिल्ली के लिए रवाना हो गये और कुछ घंटो के सफर के बाद हम दोनों दिल्ली पहुँच गए, वहां पर पहुंचकर अंकल ने मुझे नाश्ता करने के लिए पूछा। फिर मैंने उनको मुस्कुराते हुए कहा कि हाँ मुझे इस समय भूख तो लगी है, इसलिए कुछ खाना तो पड़ेगा और फिर हम दोनों एक रेस्टोरेंट में नाश्ता करने के लिए जाकर बैठ गये। तभी मैंने देखा कि वो तो एक बियर बार (शराब पीने की जगह) था और मैंने अंकल से कहा कि यह तो बार है।

अब अंकल ने मुझसे कहा कि माफ करना यह गलती से हो गया, मैंने उस तरफ इतना ध्यान नहीं दिया था चलो हम किसी और रेस्टोरेंट में चलकर बैठते है। फिर हम दोनों पास ही के एक दूसरे रेस्टोरेंट में चले गये और फिर हम दोनों ने वहां पर बैठकर नाश्ता किया और वहीं से उन्होंने मेरे सामने अपने दोस्त को फोन किया और उसको बताया कि हम लोग अब दिल्ली पहुंच गए है। अब उनके दोस्त ने फोन पर अंकल को कहा कि आज अचानक मुम्बई से उनके बॉस लोग आने वाले है, उनके आने के बाद मेरा इंटरव्यू का काम हो जाएगा और यह बात मुझे बताकर अंकल ने मुझसे कहा कि जब तक उनके उस दोस्त के बॉस लोग आए, तब तक हम दिल्ली ही घूम फिर लेते है। फिर इस तरह से हम दोनों करीब तीन बजे तक दिल्ली में घूमते ही रहे और फिर मेरे कहने पर उन्होंने दोबारा अपने उस दोस्त को फोन किया। अब अंकल के दोस्त ने मेरे अंकल से कहा कि उनके बॉस की फ्लाइट देरी से है इसलिए वो शाम तक आएँगे और अंकल ने वो बात सुनकर कहा कि हाँ ठीक है, हम लोग शाम को सात बजे तक ऑफिस पहुँच जाएँगे और उनके दोस्त ने कहा कि हाँ ठीक है आप आ जाइए। फिर जब शाम को एकदम ठीक समय सात बजे अंकल और में उनके दोस्त के ऑफिस पहुँचे, तब हमें पता चला कि वो उस समय वहाँ पर नहीं था।

अब मेरे अंकल ने फोन करके उनसे पूछा और तब उनके दोस्त ने कहा कि उनके बॉस आज रात को यहीं पर रुकेंगे इसलिए हम लोग भी अब एक कमरा लेकर कहीं किसी होटल में रुक जाए। फिर मेरे अंकल ने एक होटल में पहुँचकर हमारे लिए एक कमरा किराए से ले लिया और फिर हम दोनों उस कमरे में चले गये, तभी वो मुझसे बोले कि अगर मुझे फ्रेश होना है तो हो जाऊँ। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है, में अभी फ्रेश होकर आती हूँ और फिर में तुरंत फ्रेश होने बाथरूम में चली गयी और जब में बाथरूम से बाहर आई, तब मैंने देखा कि उस समय अंकल ठंडा पी रहे थे। अब उन्होंने मुझे देखकर मुझसे भी ठंडा पीने के बारे में पूछा और तब मैंने उनको कहा कि हाँ मुझे भी पीना है और फिर उन्होंने मेरे लिए भी एक गिलास में ठंडा भरकर मुझे दे दिया। फिर उसको पीने के कुछ देर बाद मुझे अब हल्का हल्का सा नशा होने लगा था, यह बात मैंने अंकल को बताई और तब अंकल ने मुझसे कहा कि तुम कुछ देर लेट जाओ तुम्हे आराम आ जाएगा और वो मुझे पकड़कर बेड के पास ले गये। फिर उसके बाद उन्होंने मुझे बेड पर लेटा दिया और अब वो बड़े ही प्यार से मेरे सर पर अपना एक हाथ घुमाने लगे थे।

फिर मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब धीरे धीरे उनका वो हाथ मेरे गालों पर आ चुका था और अचानक ही उन्होंने अब मुझे एक बार चूम लिया। अब में उनकी इस हरकत की वजह से एकदम हैरान रह गयी, मैंने उनको कहा कि आप यह क्या कर रहे है अंकल? उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ? और वैसे भी आज कल यह तो आम बात है और फिर किसी को भी इसके बारे में कुछ भी पता नहीं चलेगा। अब मैंने उसको कहा कि नहीं यह सब मुझे करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है और आप वैसे भी मेरे अंकल हो और उसी उन्होंने मुझसे कहा कि इस बात से क्या फर्क पड़ता है? और मुझसे यह कहकर वो मेरे पास लेट गये और अब उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। दोस्तों उस समय मैंने उन्हे रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने और मुझ पर उस समय बहुत नशा कमज़ोरी आ गयी थी और उस बात का फायदा उठाकर उन्होंने अब मेरी शर्ट के पूरे बटन खोलकर उसको उतार दिया। अब वो मुझसे कहने लगे कि यह इंटरव्यू तो बस एक बहाना था, में तुम्हे दिल्ली इसलिए लाया था क्योंकि बहुत दिनों से मेरी नज़र तुम पर थी, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और में एक बार तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता था, लेकिन मुझे ऐसा कोई अच्छा मौका हाथ ही नहीं लगा, जिसका में पूरा फायदा उठाकर तुम्हारे साथ ऐसा कुछ कर सकता, में उसके लिए विचार करने लगा था।

फिर जब उस दिन तुम्हारी मम्मी ने मुझे फोन करके तुम्हारी नौकरी के लिए कहा तब मुझे लगा कि यह मेरे लिए एक बहुत अच्छा मौका है, जिसका में आज बड़े अच्छे से फायदा उठा रहा हूँ। दोस्तों मुझे उनके मुहं से यह बात सुनकर अपने कानों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था और फिर मैंने यह सभी क्या और कैसे करना है? इसका विचार बनाया। दोस्तों मेरे वो अंकल मुझसे जब यह सभी बातें कह रहे थे उन्होंने जब मुझे यह सच्चाई बताई तब मेरा सारा नशा एक ही झटके में उतर चुका था, में अब अपने पूरे होश में आ चुकी थी, लेकिन मेरे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि में अब उस समय क्या करूं? वो मुझसे यह बात कहते हुए अब मेरे बूब्स को बहुत आराम से दबाने के साथ साथ सहलाने भी लगे थे, जिसकी वजह से अब मुझे उनके ऐसा करने से थोड़ा सा मज़ा आ रहा था और इसलिए में वैसे ही चुपचाप बिना किसी विरोध के पड़ी रही। अब वो मुझसे कहने लगे कि तन्नू देखो, इन्हे बूब्स कहते है यह बहुत मुलायम मजेदार होते है और इनको दबाने चूसने में बड़ा आनंद मिलता है और मुझसे उन्होंने यह बात कहकर उसी समय तुरंत ही मेरे दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों में बहुत ज़ोर से भींच दिया, लेकिन मेरे वो दोनों बड़े आकार के बूब्स उनकी हथेलियों में भी ठीक तरह से नहीं आ रहे थे।

फिर उन्होंने बिना देर किए उसी समय मेरी ब्रा को भी उतार दिया, जिसकी वजह से मेरे गोरे गोलमटोल बड़े आकार के बूब्स अब उनके सामने पूरे नंगे होकर आ चुके थे और अब वो अपने होश को पूरी तरह से खोकर पागलों की तरह मेरे एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगे और दूसरे बूब्स को वो लगातार मसलते रहे। दोस्तों उनका मेरे साथ कुछ देर तक यह सब करना, अब मेरे शरीर में एक अजीब सा जोश भर रहा था और जिसकी वजह से में बड़ी उत्साहित होकर पगला गई थी और इस वजह से मुझे उनको मना करने की बात अपने मुहं से वो शब्द बाहर नहीं निकाले जा रहे थे। दोस्तों उस समय वो सब मुझे क्या हो रहा था? यह में नहीं बता सकती, क्योंकि मुझे भी उसके बारे में पता नहीं था। अब उन्होंने मुझे खड़ा करके मेरे बचे हुए भी वो सारे कपड़े उतार दिए और साथ ही साथ अपने भी कपड़े उतार लिए। अब हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरे नंगे हो चुके थे और तब मैंने पहली बार किसी का लंड देखा और में बहुत चकित हुई, क्योंकि उनका वो लंड आकार में बहुत बड़ा मोटा भी वो बहुत था।

अब में उनके उस जानवर जैसे लंड को अपनी चकित आँखों से देखकर डर की वजह से चीख पड़ी और मैंने उनको कहा कि नहीं यह नहीं हो सकता, आप मुझे जाने दो में इसकी वजह से मर ही जाउंगी नहीं यह तो बहुत मोटा लंबा है यह तो आज मेरी जान ही निकाल देगा। अब आप प्लीज रहने दीजिए हम दोनों वापस अपने घर चलते है। फिर उन्होंने मुझे बहुत प्यार से समझाते हुए कहा कि तू बिल्कुल भी चिंता मत कर तन्नू इस चुदाई में तुझे इतना ज्यादा दर्द नहीं होगा, क्योंकि में बहुत आराम आराम से तुम्हारा यह काम करूँगा, जिसकी वजह से उस होने वाले दर्द का अहसास तुम्हे नहीं होगा और वैसे भी हल्के से दर्द के बाद तो तुम्हे भी मेरे साथ मज़ा आने लगेगा और तुम सारा दुखदर्द भूल जाओगी। फिर मुझसे यह सभी बातें कहकर उन्होंने उसी समय मुझे बेड पर लेटा दिया और वो अब मेरे पूरे गोरे बदन को चूमने के साथ साथ सहलाने भी लगे थे। उस समय उन्होंने मेरे पूरे शरीर को ऊपर से लेकर नीचे तक कुछ देर तक लगातार चूमा और उन्होंने मेरे बूब्स को एक बार अपने दांत से काटा भी, लेकिन में फिर भी वैसे ही एकदम सीधी पड़ी रही। दोस्तों अब हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरे नंगे थे और में कभी उनको और कभी अपने नंगे जिस्म को देखकर शरमा रही थी, लेकिन अंकल को उन बातों से कोई भी मतलब नहीं था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब वो अपने कामों को कर रहे थे, अंकल देर ना करते हुए मेरे बूब्स को ज़ोर से दबाने लगे थे जिसकी वजह से अब मेरी वो भूरे रंग की मोटी निप्पल एकदम टाइट हो चुकी थी। अब अपने मुहं में लेकर कुछ देर तक लगातार चूसते रहे, जिसकी वजह से थोड़ी देर के बाद अब मुझे भी धीरे धीरे जोश के साथ साथ मज़ा भी आने लगा था। फिर मैंने भी जोश में आकर अपने मुहं से आह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह की आवाज करनी शुरू कर दी और मैंने अपने दोनों पैरों को पूरा फैला दिया। फिर वो मेरे बूब्स का पीछा छोड़कर उसी समय मेरी चूत के पास पहुंचकर पहले उसको सहलाने और उसके बाद उसको अपनी जीभ से चाटने भी लगे थे। फिर अंकल ने बहुत ही जल्दी अपनी पूरी जीभ को मेरी कुंवारी चूत के अपने एक हाथ से पंखुड़ियों को पूरा फैलाकर चूसना शुरू किया, जिसकी वजह मेरा जोश पहले से ज्यादा बढ़ गया और मेरे मुँह से अब वो आवाज़ तेज होकर बाहर निकल गई। अब मेरे मुहं से सस्शह आअहह आईईईई अंकल हाँ ऐसा ही थोड़ी देर और करो ना वाह मज़ा आ गया और वो मेरी आवाजे सुनकर तुरंत समझ गए कि में अब पूरी तरह से गरम हो चुकी हूँ। अब मुझे अंकल का मेरी चूत को चूसना चाटना बहुत अच्छा लगा रहा है और इसलिए उसने थोड़ी देर और वैसा ही किया और कुछ देर बाद अंकल ने पहले मेरी चूत में अपनी एक ऊँगली को अंदर बाहर करना शुरू किया।

फिर उसके बाद अब अपनी पूरी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक डाल दिया और वो अब पूरे मज़े लेकर चाटने लगे थे और अब में हल्का सा दर्द और जोश मज़े की वजह से अपने पास में रखे एक तकिये को दबा रही थी। फिर उन्होंने अपने लंड पर तेल लगाकर उसको एकदम चिकना कर दिया और वो लंड को मेरी गांड के पास लाकर उसके ऊपर घिसते हुए मुझे मेरे होंठो को चूमने लगे थे, जिसकी वजह से मेरी ज्यादा ज़ोर से चिल्लाने आवाज मेरे मुहं से बाहर ना निकले। फिर उन्होंने सही मौका देखकर अपने लंड को मेरी चूत के मुहं पर रखकर ज़ोर ज़ोर से दो चार धक्के मारकर मेरी चूत में डाल दिया। दोस्तों में वर्जिन थी इसलिए मेरी चूत बहुत कसी हुई थी, में पहली बार के धक्को से मर गई, क्योंकि उसका लंड तो पूरा पांच इंच लंबा और तीन इंच मोटा भी था। फिर जब मेरी कामुक गुलाबी चूत में अपना पहला धक्का मारा, जिसकी वजह से लंड का टोपा अंदर चला गया, लेकिन उसने मेरी चूत को अंदर ही अंदर ऐसा दर्द दिया जैसे किसी ने मेरी चूत को चीरकर फाड़ दिया हो। अब में उस दर्द की वजह से चिल्ला पड़ी आईईई माँ में मर गई उफ्फफ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह प्लीज धीरे डालो मुझे बहुत दर्द हो रहा है, उस समय मेरे मुहं से यह शब्द बाहर निकले, लेकिन अंकल ने मेरी एक भी बात ना सुनी और अपना दूसरा धक्का भी मार दिया।

दोस्तों तब मुझे ऐसा लगा जैसे कि अब मेरी जान ही निकल गई, में उस दर्द की वजह से बड़ी ज़ोर से चीख पड़ी ऊऊईईईई आह्ह्हह् अंकल तुम क्या पागल हो? ऊह्ह्ह क्या तुम्हे मेरा दर्द नहीं दिखता आह्ह्ह् में दर्द से मरी जा रही हूँ और तुम धक्के पे धक्के दिए जा रहे हो और उतने में अंकल ने अपनी तरफ से एक और झटका लगा दिया, जिसकी वजह से वो पूरा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया और मेरी तो आहह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ में क्या बताऊँ क्या हालत उस समय थी? में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकती। दोस्तों उस समय मुझे अंकल ने मार ही डाला था और में उस दर्द को अब और नहीं सह सकती थी, में ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेकर वैसे ही चिल्लाकर धक्के देने के लिए मना करती रही। अब उसने अपनी तरफ से धक्के देना बंद करके मुझे समझाते हुए कहा कि तुम्हारे साथ यह सब आज पहली बार हो रहा है इसलिए यह दर्द तुम्हे कुछ देर तक जरुर होगा, लेकिन उसके बाद में तुम्हे भी मेरे इन धक्को से मज़ा आने लगेगा। फिर मुझसे यह बात कहकर अब अंकल ने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और में उस दर्द की वजह से मरी जा रही थी और हर एक धक्के से मेरे मुहं से आह्ह्ह्ह शईईईई नहीं उफफ्फ्फ्फ़ अब बस करो शब्द निकल रहे थे में दर्द की वजह से ज़ोर ज़ोर से चिल्ला, चीख रही थी।

फिर उस दिन उस दमदार धक्को के साथ मेरी उस पहली चुदाई ने मेरी चूत की सील को तोड़ दिया था और इसलिए मुझे अब दर्द के साथ साथ मेरी चूत से खून भी बाहर निकला नजर आया और जिसकी वजह से मेरे जोश अब बिल्कुल ठंडे हो चुके थे। फिर उसने करीब दस मिनट तक और मेरे ऊपर चढ़कर ताबड़तोड़ धक्के देकर चुदाई की और उसके बाद अंकल ने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकालकर मुझसे कहा कि तन्नू मुझे अब तेरी यह गांड मारनी है। फिर में उनको पूछने लगी क्यों? तब वो कहने लगे कि गांड मारने में बहुत मज़ा आता है, मुझे उसके भी आज पूरे मज़े लेने है और अब में भी अपना दर्द भुलाकर अंकल का साथ दे रही थी। अब मैंने उनको कहा कि यहाँ मुझे बहुत दर्द होगा, क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव है। फिर अंकल ने कहा कि नहीं बस थोड़ा सा दर्द होगा और उसके बाद बस मज़ा ही मज़ा और इतना कहकर अब अंकल के मेरी गांड और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा दिया, जिसकी वजह से अंकल का लंड, मेरी गांड दोनों बिल्कुल चिकने होकर चमक गए और अब वो धीरे धीरे धक्के देकर मेरी गांड में अपने लंड को अंदर डालने लगे थे। दोस्तों अब वो लंड बहुत मुश्किल से मेरी गांड में जा रहा था, लेकिन वो थोड़ा सा अंदर जाने के बाद फिसलता हुआ अब अंदर जाने लगा था।

फिर अंकल ने एक ज़ोर का झटका देकर एक ही बार में अपना पूरा का पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया और में दर्द की वजह से इतनी ज़ोर से चिल्लाई और में सिसकियाँ लेने लगी, आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ अंकल प्लीज अब आप यहाँ पर मत करो स्सीईईईई मुझे पहले से ज्यादा दर्द हो रहा है ऊईईई माँ में मर जाउंगी, प्लीज अब बंद करो, लेकिन वो नहीं माना और वैसे ही वो मुझे झटके मारने लगा। अब में बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी थी कि अंकल मुझे आज मेरी चुदाई किए बिना ऐसे नहीं छोड़ने वाले और मुझे अब इतना ज़ोर का दर्द हो रहा था कि उसकी वजह से मेरी आँखो से आँसू भी अब बाहर निकल गये थे। अब मेरी गांड से खून भी निकल रहा था और इतना सब हो जाने के बाद भी उसने मुझे नहीं छोड़ा और वो लगातार मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदते रहे। फिर कुछ देर बाद मुझे बिल्कुल सीधा लेटाकर अंकल ने मेरी कमर के नीचे एक तकिया रख दिया, जिसकी वजह से मेरी चूत ऊपर उठकर खुल गई और अब मेरी चूत में दोबारा अपना लंड डालकर तेज तेज धक्के मारने शुरू किए। अब में दर्द से मरी जा रही थी और में चिल्लाना चाह रही थी, लेकिन उन्होंने उस समय मेरा मुहं अपने एक हाथ से बंद कर दिया था और वो धक्के देने के साथ मेरे बूब्स को भी सहलाते रहे।

फिर वो धीरे धीरे अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगे, धीरे धीरे मुझे भी अब मज़ा आने लगा था और में भी उछल उछलकर अपनी चूत में उनका लंड लेने लगी थी। फिर उसी समय अंकल ने मुझसे पूछा क्यों तुम्हे मज़ा आ रहा है ना तन्नू? मैंने कहा कि हाँ अंकल अब सब कुछ ठीक है, मेरा दर्द पहले से बहुत कम हो चुका है और फिर उन्होंने मुझे लगातार करीब आधे घंटे तक चोदा, वो कभी अपने लंड को मेरी गांड में तो कभी चूत में डालकर जगह बदल बदलकर धक्के दिए जा रहे थे। फिर मुझे उन्ही धक्कों के बीच अचानक से महसूस हुआ कि उनके लंड ने मेरी गांड में अपना वो गरम वीर्य निकाल दिया है, जिसको महसूस करना मेरे लिए बड़ा ही अच्छा अनुभव था और उसके कुछ देर बाद जब वो धक्के देकर थक गये। अब वो मुझसे बोले कि अब तुम थोड़ा सा आराम कर लो और इतना कहकर वो अपना लंड बाहर निकालकर मुझसे दूर हट गए। अब में वैसे ही बिना कपड़ो के पलंग पर पड़ी हुई आराम करने लगी, तुरंत ही मेरी आंख लग गई और फिर मैंने देखा कि करीब दस मिनट के बाद अंकल ने मेरे पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और वो मुझे गरम करके दोबारा चोदने के लिए तैयार कर रहे थे।अब वो अपने लंड को वैसे ही लेटे हुए मेरी चूत में कुछ देर धक्के देते रहे और उस रात को उन्होंने मुझे चार बार चोदा और हर बार मुझे दर्द के साथ मज़ा ज्यादा आया, जिसकी वजह में अब उनका पूरा पूरा साथ देने लगी थी और वो खुशी खुशी मेरी चुदाई करते रहे, क्योंकि दोस्तों पहली बार लंड लेने के समय जो मुझे दर्द था, वैसा अब नहीं था। दोस्तों वो मोटा लंबा लंड मेरी चूत और गांड को अपने अंदर जाने जितना फैला चुका था, मेरी चूत अब चूत नहीं भोसड़ा बन चुकी थी। फिर सुबह उठकर मैंने अपने पूरे जिस्म को बाथरूम में जाकर पानी से साफ किया और उसी समय मैंने अपनी चूत गांड को छूकर महसूस किया, वो दोनों रात को चली उस चुदाई से सूज चुकी थी। फिर कुछ देर बाद में बाथरूम से वापस बाहर आकर पलंग पर लेट गयी। अब अंकल उसी समय मेरे पास आकर मुझे चूमते हुए मेरे सर को सहलाते हुए मुझसे पूछने लगे कि तन्नू अब हमारा दोबारा ऐसा मिलन कब होगा? और कब मुझे दोबारा तुम अपनी ऐसी सेवा का मौका दोगी? जिसकी वजह से मेरा मन खुशी से ऐसे ही नाचने लगे। फिर मैंने हंसते हुए उनको कहा कि जब घर पर कोई भी नहीं होगा, तब में आपको बता दूंगी और मुझे कोई मौका मिलेगा, हम कहीं भी यह मज़े दोबारा जरुर करेंगे और फिर मेरे मुहं से यह बातें सुनकर वो बहुत खुश हो चुके थे, उन्होंने मुझे अपने गले से लगाकर मुझे चूमना शुरू किया और मैंने उनका साथ दिया।

दोस्तों इसके अलावा भी मेरी एक और सच्ची चुदाई की कहानी है, वो में आप सभी को अपनी दूसरी कहानी में जरुर बताउंगी। दोस्तों क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था और में अपनी उस पहली चुदाई को कभी नहीं भुला सकती हूँ, लेकिन हाँ उसके बाद तो जैसे मेरी चुदाई का सिलसिला शुरू ही हो गया था, क्योंकि पहली बार चुदाई करने के बाद अब तो अंकल चार पांच दिनों में एक बार मेरे पास ज़रूर आते और वो जमकर मेरी चुदाई किया करते है, जिसकी वजह से हम दोनों खुश रहते है और अब तो मुझे भी उनके साथ चुदाई करने में बड़ा मज़ा आने लगा था, क्योंकि मुझे उनका लंड लेने की एक आदत सी हो चुकी है ।।

धन्यवाद …

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