कृति ने खुद को मुझे सौंप दिया

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प्रेषक : ऋषि …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम ऋषि है। मेरी उम्र 25 साल है और में दिखने में गोरा और हैंडसम हूँ। मेरी हाईट 5 फुट 5 इंच है। अब में आपका ज्यादा समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। में झारखंड का रहने वाला हूँ और में कोल्हापुर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता था। में उस समय फाइनल ईयर कंप्यूटर साइन्स का स्टूडेंट था। अब फाइनल ईयर होने के कारण में प्रॉजेक्ट के काम में काफ़ी व्यस्त रहता था, चूँकि मेरे पास कंप्यूटर था इसलिए जब में प्रॉजेक्ट के काम से बोर हो जाता था, तो तब में इंटरनेट पर चैटिंग करता था। फिर एक दिन मुझे चैटिंग करते वक्त एक लड़की मिली, उसने अपना नाम कृति पटेल बताया था। वो गुजरात में अहमदाबाद की रहने वाली थी, लेकिन फिलहाल मुंबई में एम.बी.बी.एस कर रही थी। अब रात को चैटिंग करना हमारी रोज की आदत हो गई थी। फिर धीरे-धीरे हम लोग मोबाईल पर बातें भी करने लगे और अब देखते ही देखते हम दोनों अच्छे फ़्रेंड बन गये थे।

अब हम दोनों के बीच हर तरह की बातें होने लगी थी, लेकिन मैंने कभी भी लिमिट क्रॉस करने की कोशिश नहीं की, उसकी बातें बहुत ही प्यारी हुआ करती थी। खैर फिर जल्द ही मेरा एग्जॉम स्टार्ट हो गया और फिर हमारी बातें भी कम होने लगी थी। फिर थोड़े दिनों के बाद मेरे एग्जॉम ख़त्म हो गये और अब में घर वापस जाने वाला था। अब मुझे घर जाने के लिए ट्रेन मुंबई या पुणे से पकड़नी पड़ती थी। फिर जब में घर के लिए कॉलेज से निकला तो तब मुझे कृति का कॉल आया। तब मैंने उसे बताया कि में घर जा रहा हूँ। तब वो मुझसे ज़िद करने लगी कि में मुंबई में उससे मिलकर जाऊं, हालाँकि मेरी ट्रेन मुंबई से ही थी, लेकिन मैंने उसे झूठ बोल दिया कि मेरी ट्रेन पुणे से है और में उससे नहीं मिल सकता हूँ। तब वो नाराज हो गई और फिर उसने फोन काट दिया। उसकी ये हरकत मुझे भी पसंद नहीं आई और सोचा कि जाने दे इसको भोसड़े में और फिर मैंने भी उसे वापस कॉल नहीं किया।

अब मेरी छुट्टियाँ ख़त्म हो गई थी और अब में वापस कॉलेज आने वाला था। अब जब में ट्रेन में था, तो तब मैंने देखा कि मुझे कृति का कॉल आ रहा है। अब में भी ट्रेन में 2 दिन तब बूढ़े बुढ़ियों के बीच में पक गया था, इसलिए गुस्सा थूककर मैंने उसका कॉल अटेंड किया। अब वो बहुत ही प्यार से बात कर रही थी और फिर उसने उस दिन के अपने व्यवहार के लिए मुझसे सॉरी बोला और फिर उसने बताया कि वो मुझसे मिलना चाहती थी। फिर तब बातों ही बातों में मैंने उसे बताया कि में थोड़ी ही देर में मुंबई के दादर स्टेशन पर उतरने वाला हूँ। तो ये सुनकर वो बहुत ही हैरान हो गई और बोली कि वो मुझसे मिलने स्टेशन पर आ रही है। तब मैंने भी सोचा कि चलो इससे भी मिल लेते है वरना फिर से इसकी खटपट सुननी पड़ेगी और फिर मैंने उसे अपना ट्रेन नम्बर और कोच नम्बर बता दिया। फिर जब ट्रेन दादर पहुँची तो तब उस समय सुबह के 10 बज रहे थे। अब में अपना सामान लेकर प्लेटफॉर्म पर ही कृति का इंतज़ार करने लगा था। तभी वहीं पास में खड़ी एक लड़की पर मेरा ध्यान गया। वो हरे कलर की बिल्कुल टाईट टॉप और ब्लू कलर की जीन्स पहने हुए थी, उसका कद करीब 5 फुट 4 इंच होगा, बिल्कुल गोरी, सुनहरे बाल और उसके बूब्स का साईज़ 34 होगा और वो भी शायद किसी का इंतज़ार कर रही थी, वो सच में गजब की खूबसूरत थी।

खैर फिर मैंने सोचा कि ये चूत मेरे लंड के लिए नहीं है और फिर मैंने कृति को कॉल किया। तब उसने मुझे बताया कि वो प्लेटफॉर्म पर ही है, लेकिन मुझे पहचान नहीं पा रही है। तब मैंने उसे बताया कि में ब्लेक कलर की टी-शर्ट और ब्लू कलर की जीन्स पहने हूँ और मेरे हाथ में एक ब्लू कलर का ट्रॉली वाला बैग है। अभी मैंने फोन रखा भी नहीं था कि मैंने देखा कि जिस लड़की की खूबसूरती का में चोरी से रसपान कर रहा था, वो मेरे सामने खड़ी होकर मुस्कुरा रही है। अब मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। तब उसने मुझसे बोला कि एक्सक्यूज मी आर यू ऋषि? तो तब मैंने कहा कि या आई एम बट? फिर उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ाते हुए अपने आपका परिचय दिया कि दिस इज फूलन देवी और जोर से हंस पड़ी। अब में हैरान था। फिर जब उसकी हंसी रुकी तो तब उसने कहा कि ऑफ कोर्स आई एम कृति और मुझे हग किया। उसने बहुत ही लाइट पर्फ्यूम यूज़ किया था और उसके बाल बहुत ही प्यारे थे और फिर हग करते वक्त मैंने ये महसूस किया की उसके बूब्स बहुत ही सॉफ्ट थे।

अब वो मुझसे पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी? और में कही और उसकी खूबसूरती निहारने में मशगूल था। अब उसने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था और अब वो मुझे स्टेशन के बाहर ले जा रही थी। अब मुझे उसकी कोई भी बात सुनाई नहीं दे रही थी। अब में बस उसकी अदाओं में खोया हुआ था। अब वो बोल रही थी, हंस रही थी और बीच-बीच में अपने चेहरे से बालों को हटा रही थी और में बस उसे ये सब करते हुए देख रहा था। फिर थोड़ी ही देर में हम एक बड़े से रेस्टोरेंट के सामने खड़े थे। फिर हम अंदर गये और फिर एक कॉर्नर वाली टेबल पर बैठ गये। फिर कृति ने मुझसे पूछा कि ऋषि आर यू ऑलराइट? में तब से तुम्हें देख रही हूँ कि तुम बहुत शांत हो, कोई परेशानी है क्या? तो तब में बोला कि अरे नहीं, बस मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा है, में थोड़ा फ्रेश होकर आता हूँ और ये कहकर में वॉशरूम में चला गया। फिर जब में अपना फेस धोकर और बाल सवारकर जब वापस आया तो तब मैंने पाया कि टेबल पर मेरी पसंद की चीज़े लगी हुई है। तब में हैरान होकर कृति को देखने लगा।

फिर तब कृति हंसकर मुझसे बोली कि अब तुम हैरान मत हो, तुमने ही मुझे बताया था कि तुम्हें ये सब चीज़े बहुत पसंद है, वैसे ऋषि में एक बात बोलूँ? तो तब में बोला कि बोलो। तो तब वो बोली कि गीले बालों में तुम बहुत ही हॉट दिख रहे हो और उफफ्फ फिर से उसकी झरने जैसी खिल-खिलाती हंसी। अब मुझ ऐसा लग रहा था मानो वो मुझ पर काला जादू कर रही हो। खैर फिर हम खाना खाने लगे और अब हम आपस में काफ़ी मज़ाक कर रहे थे। फिर में बातों ही बातों मैंने बोला कि में आज रात की बस पकड़कर कोल्हापुर लौट रहा हूँ। तब उसने मुझसे कहा कि में आज उसके फ्लेट पर रुक जाऊं और अगले दिन चला जाऊं। लेकिन में नहीं माना और बहाना बनाया की मेरा जाना जरूरी है। फिर कृति ने कहा कि ऋषि ये भी मिलना कोई मिलना हुआ क्या? तुम आज ही आए और आज ही वापस जा रहे हो, ओके चले जाना, लेकिन तुम मुझसे वादा करो कि तुम आज पूरा दिन मेरे साथ रहोगे और मेरे साथ मूवी भी देखने चलोगे। तब में मान गया।

अब प्रोब्लम ये थी कि मेरे पास सामान था और वो लेकर में घूम नहीं सकता था। अब में थका हुआ भी था इसलिए मैंने डिसाइड किया कि में एक होटल में रूम ले लेता हूँ और वहीं सामान भी रख दूँगा और साथ में बाथ भी ले लूँगा। फिर जब में रूम के अंदर पहुँचा तो मैंने पाया की वो रूम बहुत साफ और बहुत ही आलीशान था, होता भी क्यों नहीं? कृति को इंप्रेस करने के लिए सबसे महँगा वाला ए.सी रूम जो लिया था। फिर में रूम के अंदर आते ही बिस्तर पर लेट गया। फिर कृति मुझे जल्दी फ्रेश होने की ज़िद करने लगी। तो तब में उठा और टावल लेकर बाथरूम में शॉवर लेने को चला गया। अब कृति वही टी.वी देखने लगी थी। फिर जब में वापस आया तो तब मैंने देखा कि कृति मुझे एक टक देखकर मुस्कुरा रही थी। में उस वक्त सिर्फ़ टावल और टी-शर्ट पहने हुआ था। तो तभी अचानक से कृति उठी और मेरे लिप्स पर अपने लिप्स लॉक कर दिए।

अब वो मुझे पागलों की तरह स्मूच कर रही थी, उसके लिप्स बहुत ही सॉफ्ट थे। अब तक में भी गर्म हो चुका था और अब मैंने ज़ोर से उसे अपनी बाहों में कस लिया था और इधर उधर चूमने लगा था। अब इस हलचल में पता ही नहीं चला था कि मेरा टावल कब खुल गया था? और अब में नीचे से बिल्कुल नंगा था। फिर उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और फिर वो एक बाघिन की फूर्ति से मेरे पास आई और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड अपने मुँह में लेकर ब्लोजॉब करने लगी थी और साथ ही साथ वो मेरी झांटो को अपनी उंगलियों से सहला रही थी। अब मुझे ऐसा लग रहा था मानो वो मेरे लंड से मेरे पूरे शरीर की एनर्जी चूसे जा रही हो, चूँकि ये सब चीजें में पहली बार महसूस कर रहा था, इसलिए मुझे ऐसा लग रहा था कि मानों में आसमान में बादल पर तैर रहा हूँ और फिर अचानक से मेरे शरीर में कंपन हुई तो तब मुझे एहसास हुआ कि में झड़ चुका हूँ। फिर मैंने कृति की तरफ देखा तो पाया कि मेरा वीर्य उसके चेहरे और टी-शर्ट पर गिर पड़ा था। अब वो मुझे कातिल निगाहों से देख रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने पास ही रखे टावल से उसके चेहरे को साफ किया और वापस उस पर टूट पड़ा। अब इस बार मेरी बारी थी। अब में उसे वापस से स्मूच करने लगा था। अब मेरे हाथ उसके टॉप के ऊपर से ही उसकी नर्म-नर्म चूचीयों को दबा रहे थे। अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्कित था। फिर मैंने एक ही झटके में उसके बदन को टॉप से आज़ाद कर दिया और फिर मैंने उसकी जीन्स को उतारने में भी कोई देर नहीं की। अब ब्लेक ब्रा और ब्लेक पेंटी में उसका चाँदी जैसा शरीर मानो कयामत ढा रहा था। फिर में 2 मिनट तक उसे ऐसे ही देखता रहा। अब ब्लेक ब्रा के अंदर जब उसकी धड़कने रफ़्तार पकड़ रही थी, तो तब मानो ऐसा लग रहा था मानो उसकी ब्रा से उसकी चूचीयाँ नहीं बल्कि कोई आइसक्रीम पिघलकर आइसक्रीम कप से बाहर टपकने को बेकरार हो। तब मुझे समझ आया कि अगर मैंने थोड़ी और देर तक उसको कपड़ो से आज़ाद नहीं किया, तो कयामत आ जाएगी।

फिर मैंने बिज़ली की तेज़ी से उसकी ब्रा और पेंटी उसके शरीर से बाहर निकाल फेंकी। अब इतनी बोल्ड लड़की कपड़े निकलने के बाद बिल्कुल शर्म से सिकुड गई थी। यकीन मानिए अपने हाथ से जब वो अपनी चूची और जांघो से जब वो अपनी चूत को छुपा रही थी तो ऐसा लग रहा था मानो कोई संगमरमर की बनी अप्सरा की मादक मूर्ति मेरे सामने रखी हो। अब कृति अपनी हथेलियों से अपने चेहरे को छुपाए बैठी थी। फिर में उसके पास गया और उसके चेहरे से हाथ हटाते हुए पहली बार उसके हुस्न की तारीफ की और बोला कि कृति सचमुच तुम बिल्कुल बला की खूबसूरत हो, मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की मेरी बाहों में बिना कपड़ो के लेटी है। तब कृति ने मेरे ललाट को चूमकर मुझे बाँहों में भरते हुए कहा कि ऋषि शायद तुम्हें मालूम नहीं कि तुम इतने हैंडसम हो कि कोई भी लड़की तुम्हारी बाहों में सोकर अपने आपको लकी समझेगी। अब में अपने बारे में किसी लड़की के मुँह से ये सब बातें सुनकर बिल्कुल हैरान था।

अब मेरे पास कुछ बोलने को था नहीं और फिर मैंने सिर्फ़ उसे ज़ोर से गले लगा लिया। अब मेरी उंगलियाँ उसके बड़े-बड़े बिल्कुल मुलायम सफ़ेद बूब्स को सहला रहे थे, उसकी चूचीयाँ एक्च्युयली मेरे अनुमान से काफ़ी बड़ी थी, ऊपर से उसके अनार के दाने जैसी निपल उसकी चूचीयों पर चार चाँद लगा रही थी। अब में उसकी चूचीयों को चूस रहा था। अब मेरे एक हाथ की उंगलियाँ कृति कि जांघो की बीच की गहराई नाप रही थी। अब उसकी चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी। अब पूरा रूम कृति की सिसकारियों से गूँज रहा था। अब अपने आपको रोक पाना हम दोनों के लिए मुनासिब नहीं था। फिर में उसके ऊपर चढ़ गया और अब वो अपनी दोनों टांगो से मेरी कमर को जकड़े हुए थी। अब में उसे चूम रहा था और साथ ही साथ अपनी कमर उठाकर अपने लंड को उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा था। तो बहुत कोशिश करने के बाद मेरे लंड का कुछ हिस्सा उसकी टाईट चूत में प्रवेश करने में कामयाब रहा, उसकी चूत भट्टी की तरह गर्म थी।

मेरा लंड पहली बार किसी की चूत में अंदर गया था और वो एहसास में शायद अपने शब्दों में बयान ना कर पाऊँ इसलिए मांफी चाहता हूँ। तभी मैंने गौर किया कि कृति की आँखों में से आसूं टपक रहे थे। तो तब मैंने कृति से पूछा कि कृति ज़्यादा दर्द हो रहा है क्या? तो तब कृति ने मुस्कुराकर अपना सिर हिलाकर इशारे से ना बोला। अब वो मेरे इतने करीब थी कि हम दोनों की सांसे एक दूसरे से टकरा रही थी और ऊपर से कृति के आसूंओं से भरी आँखे और मुस्कुराते होंठो को समेटे हुए चेहरा मुझे दीवाना बनाए जा रही थी। अब कृति मेरी कमर के इर्द- गिर्द अपने पैरों को ऐसे लपेटे थी मानो कोई नागिन चंदन के पेड़ के तने को अपने कुंडली में कसी हो। फिर धीरे-धीरे मैंने अपनी रफ़्तार तेज कर दी। अब पूरे रूम में बहुत ही मादक वातावरण था। अब पर्दे के बीच से आती हुई सूर्य की रोशनी जब कृति के दूध जैसे गोरे चेहरे पर पड़ रही थी तो ऐसा लग रहा था मानो में चाँद को अपनी बाहों में समेटा हुआ हूँ। अब हमारी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी और फिर जल्द ही वो समय आया, जब मेरा लंड किसी गुब्बारे की तरह फटने को तैयार था।

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फिर मैंने उसी वक्त पर अपना लंड कृति की चूत में से बाहर निकाल लिया। अब मेरे लंड से मानो वीर्य के झरने फूट पड़े थे, मैंने अपनी जिंदगी में आज तक इतना वीर्य नहीं निकाला था। अब में कृति की बाहों में निढ़ाल होकर लेट गया था। फिर लगभग आधे घंटे के बाद जब हम एक दूसरे से अलग हुए तो तब मैंने देखा कि कृति की जांघो पर खून था। तब मुझे समझने में देर नहीं लगी कि कृति अभी तक वर्जिन थी। अब ये देखकर कृति के लिए मेरे दिल में रेस्पेक्ट काफ़ी बढ़ गयी थी। अब मुझे विश्वास हो गया था कि वो ऐसी लड़की नहीं है जो किसी भी लड़के को अपना शरीर सौंप दे, वो इतनी मॉडर्न होते हुए और मुंबई जैसे शहर में इतने दिनों से होते हुए भी अब तक वर्जिन थी और आज मैंने उसकी कौमार्या भंग की ये सोचकर में खुद को सचमुच लकी समझ रहा था।

फिर मैंने टावल को पानी से थोड़ा गीला किया और उसकी चूत के आस पास पड़े खून को साफ करने लगा। अब वो मुझे ऐसे ही लेटकर निहार रही थी। तब मैंने कुछ गौर किया और फिर में मुस्कुराने लगा। तो तब कृति ने मुझसे पूछा कि ऋषि तुम क्या सोचकर मुस्कुरा रहे हो? तो तब मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और चूमते हुए उसके कान में बोला कि कृति तुम्हें पता है मैंने अभी तक तुम्हारी चूत नहीं देखी थी और पहली बार खून साफ करते वक्त उसे देखा। ये सुनकर वो ज़ोर से हंस पड़ी, लेकिन इस बार वो अकेली नहीं थी, अब में भी उसके साथ हंस रहा था। फिर में उठकर उसकी बिना बालों की चूत को निहारने लगा, उसकी चूत सचमुच बहुत ही प्यारी थी। फिर उस रात में कोल्हापुर वापस नहीं गया और फिर हम दोनों ने साथ ही वो रात बिताई। अब आप लोग समझ ही गये होंगे कि उस पूरी रात हमने क्या किया होगा? आज भी कभी-कभी हम दोनों के बीच में बात होती है। अब में बैंगलोर में जॉब कर रहा हूँ इसलिए हमारी दूरियाँ बढ़ गयी है, लेकिन हम दोनों साथ में बिताया हुआ, वो समय कभी नहीं भूल सकते है ।।

धन्यवाद …

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