कॉलोनी की महिला का दिल खुश कर दिया

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मेरा नाम सोनू है मैं पटना का रहने वाला हूं, मैं नौकरी की तलाश में मुंबई चला गया था और तब से मैं मुंबई में रह रहा हूं। मैं जब मुंबई गया तो मैंने अपने चाचा को फोन कर दिया, मेरे चाचा कहने लगे कि तुम अचानक से मुंबई कैसे आ गए, मैंने उन्हें कहा कि मैं मुंबई में काम करना चाहता हूं, मैंने मुंबई में ही काम करने की सोच ली है। मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं, मैंने अपने दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद अपना स्कूल छोड़ दिया और जब मैंने अपना स्कूल छोड़ा तबसे मैं छोटे मोटे काम कर के गुजारा चला रहा हूं। मेरे पिताजी भी एक दुकान में काम करते हैं और वह ज्यादा पैसे नहीं कमा पाते इसलिए मैंने फैसला किया की मैं मुंबई चला जाऊँ, उसके बाद मैं मुंबई आ गया। मेरे चाचा कहने लगे कि चलो कोई बात नही, तुम मुंबई आ गए हो तो मैं तुम्हारी नौकरी की कहीं बात कर लेता हूं, मैंने चाचा से कहा ठीक है आप मेरे लिए कहीं नौकरी की बात कर दीजिए। मेरे चाचा अकेले ही रहते हैं और उन्होंने एक छोटा सा 10 बाय 10 का कमरा लिया हुआ है, मेरी चाची पटना में ही रहती हैं।

मेरे चाचा ने एक मॉल में मेरे लिए गार्ड की नौकरी की बात कर ली, मैं जब मॉल के मैनेजर से मिला तो उन्होंने मुझे काम पर रख लिया और उसके बाद मैं काम करने लगा, मैं काफी अच्छे से काम कर रहा था और मुझे काम करते हुए काफी दिन भी हो गए थे। मेरे काम में किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं थी, मुझे मॉल में काम करते हुए काफी समय हो गया लेकिन एक दिन एक व्यक्ति से मेरा झगड़ा हो गया जो कि बहुत पैसे वाले थे, उन्होंने जब मैनेजर से बात की तो मैनेजर ने मुझे कहा कि कल से तुम नौकरी पर मत आना इसीलिए मुझे वहां नौकरी छोड़नी पड़ी। मैं कुछ दिन घर पर खाली बैठा था, मेरे चाचा को मैंने यह बात नहीं बताई लेकिन जब उन्हें यह बात पता चली तो वह कहने लगे कि तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया यदि तुम मुझे पहले बता देते तो मैं तुम्हारे लिए दूसरी जगह कहीं नौकरी की बात कर लेता, मैंने कहा कि आप किसी दूसरी जगह मेरे लिए नौकरी की बात कर लीजिए।

काफी दिन हो गए थे मुझे नौकरी नहीं मिली तो मैं परेशान हो गया, मेरे चाचा कहने लगे कि तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारी कहीं ना कहीं बात अवश्य करवा दूंगा। मेरे चाचा ने मेरी नौकरी एक कॉलोनी में लगवा दी, उस कॉलोनी में बहुत बड़े-बड़े फ्लैट थे और सब लोग वहां पर पैसे वाले थे। जब कॉलोनी के गेट से कोई गुजरता तो अपनी बड़ी बड़ी गाड़ियों में ही गुजरते, मैं सब को देखता रहता था और अपनी नौकरी पर ध्यान देता। मेरे साथ एक लड़का और था, वह भी बिहार का ही रहने वाला है इसलिए हम दोनों की अच्छी बातचीत है। मुझे इस कॉलोनी में काम करते हुए काफी समय हो गया और मैं सोचने लगा कि मैं काफी समय से मुंबई में ही हूं क्यों ना मैं कुछ दिनों के लिए घर पर हो आऊं। मैंने जब इस बारे में अपने चाचा से बात की तो वह कहने लगे ठीक है यदि तुम घर जा रहे हो तो मेरा कुछ सामान भी तुम घर लेकर चले जाना क्योंकि मैं तो अगले साल ही घर जा पाऊंगा। चाचा ने मुझसे बात की तो मैंने कहा कि आप भी मेरे साथ ही चलिए, हम दोनों घर हो आते हैं क्योंकि बार-बार मुझे भी वक्त नहीं मिलेगा और ना ही आपके पास समय होगा। वह कहने लगे ठीक है मैं तुम्हें इस बारे में एक दो दिन में बताता हूं, मै सुबह अपने काम पर निकल जाता और शाम को ही मैं घर पर लौटता था और कभी कबार मेरे साथ में जो लड़का रहता है हम दोनों ही शराब पी लिया करते हैं यदि हम दोनों शराब पीते तो वह मुझसे अपने घर की बात जरूर शेयर करता था। मैं उसे हमेशा समझाता कि तुम दारु पीते वक्त अपने घर की बात मत किया करो लेकिन उसके बावजूद भी वह अपने घर की बात करने लगता था वह कहता कि मेरी पत्नी और मेरे बीच में बिल्कुल भी अच्छे संबंध नहीं है, उसका किसी और के साथ रिलेशन है। मैं उसे हमेशा ही कहता कि तुम इस प्रकार की बात मुझसे मत किया करो क्योंकि घर की बात को यदि बाहर उछालोगे तो अच्छा नहीं होगा लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझसे हमेशा ही यह बात करता रहता,  वह कहता की मुझे तुमसे बात करके अपने आप को बहुत हल्का महसूस होता है। कुछ दिनों बाद चाचा कहने लगे की चलो मैं भी तुम्हारे साथ घर हो आता हूं,  हम दोनों ने घर के लिए कुछ सामान ले लिया और हम दोनों ही घर चले गए।

मेरे माता-पिता मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और कहने लगे कि तुम काफी समय बाद घर लौटे हो, हम तुमसे मिलकर बहुत खुश हुऐ, मैं भी अपने माता पिता से मिलकर बहुत खुश था, मैं काफी दिनों तक घर पर ही था, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरे चाचा भी अपने परिवार वालों से मिलकर बहुत खुश हुए क्योंकि वह काफी समय बाद घर लौटे थे इसीलिए वह चाची के लिए बहुत सारी साड़ियां लाए हुए थे और अपने बच्चों के लिए भी उन्होंने काफी खिलौने खरीदे थे, हम दोनों को ही काफी दिन हो चुके थे इसलिए मेरे चाचा कहने लगे की हमारी छुट्टियां भी खत्म होने वाली है,  एक दो दिन में हमे वापस मुंबई जाना पड़ेगा। मैंने चाचा से कहा कि मैंने भी कुछ दिनों के लिए ही छुट्टी ली थी इसलिए मुझे भी वापस मुंबई जाना पड़ेगा, हम दोनों ही साथ में ही मुम्बई लौट गए। हमेशा की तरह वही जिंदगी चलने लगी, मैं सुबह कॉलोनी में पहुंच जाता हूं और वही पर मैं ड्यूटी करता था। मेरा दोस्त मुझे कहने लगा चलो तुम कम से कम अपने घर तो हो आए, इतने वक्त से तुम मुझे कह रहे थे कि मुझे अपने घर जाना है।

मेरे पिताजी और मेरी मां मुझे हमेशा ही फोन करते रहते,  वह कहते कि तुम अपना ध्यान रखा करो, मैं हमेशा ही अपना ध्यान रखता हूं और उन्हें कहता कि आप मेरी चिंता मत किया करो मैं हमेशा की तरह ही अपने गेट पर खड़ा रहता और ड्यूटी किया करता था, ऐसे ही मेरे सामने से बड़ी-बड़ी गाड़ियां गुजरती और मैं सब को देखता रहता था,  बस यही मेरी जिंदगी में चल रहा था। मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं कब तक ऐसे ही काम करता रहूंगा क्योंकि मुझे भी कुछ अपने जीवन में बड़ा करना था इसलिए मैं मुंबई आया था हालांकि मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं लेकिन उसके बावजूद भी मुझे काफी अच्छी समझ है, मैं अंग्रेजी भी ठीक-ठाक बोल लेता हूं। मेरे चाचा एक दिन घर पर ही थे, वह कहने लगे कि आज मैं घर पर ही हूं, मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है, मैंने अपने चाचा से कहा ठीक है आप आज घर पर ही है तो आप आराम कर लीजिए, मैं सुबह अपने काम पर निकल गया। जब मैं सुबह अपने काम पर निकला तो मैं हमेशा की तरह अपनी वर्दी में बैठा हुआ था जो भी आ रहा था मैं उसे सलूट मार रहा था और जब हम लोग खाली होते तो मेरे साथ का लड़का और मैं बैठकर मूवी देख लिया करते क्योंकि दोपहर के वक्त ही हमे समय मिलता था, उस वक्त ज्यादा लोग नहीं आते थे। हम दोनों बैठे हए थे। हमारे आगे गाड़ी रुकी और उस गाड़ी के शीशे भी पूरे काले थे। जब  उसमें से एक महिला बाहर निकली तो वह मुझे कहने लगी कि तुम मेरे साथ मेरे फ्लैट पर चलो मेरे फ्लैट में कुछ काम है। मैं उस महिला के साथ उनकी कार में बैठ गया। मैंने जब उनके पैरों को देखा तो उनके पैर एकदम मुलायम थे मैं उनके पैरो को देखता रह गया। मै उनके साथ ही उनकी कार में बैठा हुआ था और मै अपनी तिरछी नजरों से उनकी तरफ देखना पर लगा हुआ था। वह बहुत ज्यादा खुश हो रही थी जब मैं उनके फ्लैट में पहुंचा तो उनके ड्राइवर ने उन्हें नीचे छोड़ दिया। हम दोनों लिफ्ट से उनके घर पर चले गए जब मैं उनके फ्लैट में गया तो उन्होंने मेरे सामने ही अपने कपड़े खोलने शुरू कर दिए और मुझे 2000 का नोट दिया।

वह कहने लगी तुम मेरी इच्छा को पूरा कर दो। मैंने भी अपने कपड़े खोल दिए और अब मैं उस महिला की योनि को चाटने लगा वह बिस्तर पर लेटी हुई थी उन्होंने दोनों पैरों को चौड़ा कर रखा था। उसके बाद मैंने भी अपने लंड को उनके मुह मे डाल दिया। वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को चूस रही थी। कुछ देर बाद जैसे ही मैंने उनकी योनि के अंदर अपना लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी और उन्हे बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने उन्हें बहुत अच्छे से चोदा जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। मैंने उन्हें घोडी बना दिया। वह मुझे कहने लगी कि मेरे बेड में एक  लिक्विड रखा हुआ है तुम उसे अपने लंड पर लगा लो। जब मैंने उसे अपने लंड पर लगाया तो मेरा लंड पूरा चिकना हो चुका था। मैंने धीरे धीरे उस  महिला की गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड में घुसा तो वह चिल्लाने लगी। मुझे बड़ा आनंद आ रहा था मैं उन्हें बड़ी तेज गति से चोदे जा रहा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है जब तुम मेरी गांड मे अपने लंड को डाल रहे हो। मैंने बड़ी तेज तेज झटक मारे जिससे कि उनका पूरा शरीर दुखने लगा और वह कहने लगे कि तुमने आज मेरी गांड की खुजली को मिटा कर रख दिया है। कुछ देर बाद मै उनकी गर्मी को झेल नही पाया और जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को उनकी गांड से बाहर निकाल लिया। उन्होंने उसके बाद मुझे कुछ और पैसे दिए। वह कहने लगी तुम अगली बार से मेरे पास आ जाना मेरा दिल खुश कर दिया करना। जब भी वह महिला मुझे अपने साथ लेकर जाती है तो मुझे बहुत पैसे देती हैं और मैं उनका दिल खुश कर दिया करता हूं। मेरी नौकरी भी आप अच्छे से चल रही है और मैं बहुत ही खुश हूं जिस प्रकार से मेरी इच्छाएं पूरी होती हैं।

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