गन्ने के खेत में गांड मरवाने मे आनंद आ गया

 

antarvasna, gaand chudai ki kahani

मेरा नाम आकृति है मैं पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हूं, मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं। मैं अपनी शादीशुदा जीवन से बहुत खुश हूं, मेरे पति भी एक मल्टीनेशन कंपनी में जॉब करते है, वह अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। एक बार हमारे गांव के रिश्तेदार हमारे घर आ गए, वह मेरे पति के चाचा लगते हैं, सब लोग उन्हें सुधांशु कहते हैं। उनकी शादी नहीं हुई है वह अकेले ही रहते हैं,  वह जब हमारे घर पर आए तो मेरे पति ने उनकी बहुत देखभाल की और वह मेरे पति को बहुत मानते भी हैं, इसी वजह से वह हर वर्ष हमारे घर आते है। मेरे पति ने जब मुझे इस बात की जानकारी दी कि सुधांशु चाचा आ रहे हैं तो मुझे बहुत ही गुस्सा आया, मैंने उन्हें कहा कि जब भी वह हमारे घर पर आते हैं तो कुछ ना कुछ गलत करते हैं और सारे मोहल्ले को अपने सर पर उठा लेते हैं। मेरी एक लड़की है उसकी उम्र 7 वर्ष है। जब उसने सुना कि सुधांशु चाचा आ रहे हैं तो वह कहने लगी कि वह तो बहुत ही ज्यादा परेशान कर देंगे हालांकि मेरी बच्ची छोटी है लेकिन वह बहुत समझदार है और उसे भी पता है कि क्या सही है और क्या गलत।

मैंने अपने पति से पूछा कि सुधांशु चाचा कब आ रहे हैं तो वह कहने लगे कि वह दो दिन बाद हमारे घर पर आ जाएंगे। दो दिन बाद जब चाचा घर पर आए तो मैं उनके साथ ज्यादा बात नहीं कर रही थी, वह मेरे पति से पूछने लगे कि क्या वह मुझसे नाराज है जो मुझसे बात नहीं कर रही, मेरे पति ने उन्हें कहा की ऐसी कोई भी बात नहीं है, आप गलत सोच रहे हैं। थोड़ी देर बाद वह मुझसे पूछने लगे कि क्या तुम वाकई में उसे गुस्सा हो, मैंने उन्हें कहा नहीं ऐसी तो कोई भी बात नहीं है मैं आपसे बिल्कुल भी गुस्सा नहीं हूं, मैं किस बात पर आप से गुस्सा होंगी लेकिन उनकी आदत बहुत खराब है, वह हर बात को बहुत लंबा खींच लेते हैं जिसकी वजह से मुझे वाकई में गुस्सा आने लगा। मैं चुपचाप उनकी बात सुन रही थी और मैंने कुछ भी नहीं कहा, मैंने चाचा को खाना खाने के लिए कहा तो वह खाना खाने के लिए आ गए और कहने लगे कि क्या तुमने खाना बना दिया है, मैंने उन्हें कहा कि हां आप दोपहर का भोजन कर लीजिए, उसके बाद आप आराम कर लीजिएगा।

वह कहने लगे ठीक है मैं भोजन कर लेता हूं, वह अब खाना खाने लगे, उसके कुछ देर बाद वह उठकर गेस्ट रूम में चले गए और वहीं पर वह लेट गए। उन्होंने जब मेरी बच्ची को देखा तो वह उसके साथ ही खेलने पर लग गए। वह मेरी बच्ची को बहुत परेशान कर रहे थे लेकिन मैं कुछ भी नहीं कह सकती थी, उसके बाद शाम को जब वह बाहर टहलने गए तो उनका झगड़ा हमारे पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति के साथ हो गया, उस दिन मेरे पति की छुट्टी थी। वह जब बहार गए तो उन्होंने देखा कि चाचा किसी व्यक्ति के साथ झगड़ा कर रहे हैं, जब मेरे पति चाचा को समझा रहे थे तो वह कुछ भी नहीं समझ रहे थे और मेरे पति को ही उन्होंने उल्टा डांट दिया लेकिन मेरे पास उनका आदर और सम्मान करते हैं इसलिए उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। जब यह बात मुझे पता चली तो मैंने चाचा से कहा कि आप दूसरे लोगों के साथ क्यों झगड़ा करते हैं, आपको झगड़ा ही करना था तो आप यहां पर क्यों आए। मैंने उस दिन उन्हें बहुत बुरा भला कह दिया जिससे कि वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे ठीक है मैं आज ही वापस चले जाता हूं। मेरे पति ने उन्हें किसी प्रकार मनाया और उस दिन उन्हें रोक लिया लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे और कहने लगे कि मैं अब एक पल भी तुम्हारे घर पर नहीं रुकने वाला, मेरे पति ने समझाया कि आप आज रुक जाइए, आप कल सुबह की बस से चले जाना, वह कहने लगी ठीक है मैं कल सुबह की बस से निकल जाऊंगा। उन्होंने अगले दिन सुबह सुबह हमारे बेडरूम के दरवाजे को लॉक करना शुरू कर दिया और जब हम लोग उठे तो वह कहने लगे कि मैं निकल रहा हूं, मेरे पति कहने लगे कि आप कुछ देर बाद निकल जाना, मैं आपको स्टेशन तक ही छोड़ दूंगा। चाचा कहने लगे कि नहीं मैं खुद ही निकल जाऊंगा, मेरे पति ने उन्हें रोकने की भी बहुत कोशिश की लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं रुके और फिर वह घर से चले गए। उन्होंने ऑटो ले लिया और जब वह घर से गए तो मैंने अपने पति से कहा कि चलो कम से कम एक मुसीबत तो सर से गई।

जब वह स्टेशन पहुंच गए तो उन्होंने मुझे फोन किया और कहने लगे कि बहू मुझे तुम्हारे साथ में ज्यादा गुस्सा नही होना चाहिए था, उसके बाद उन्होंने फाहों रखा और वह चले गए। उन्होंने अपने गांव पहुंचकर मेरे पति को फोन कर किया, मेरे पति कहने लगे चाचा गांव पहुंच चुके हैं। मैंने उनसे कहा मुझे भी चाचा ने फोन किया था जब वह गांव जा रहे थे। हम लोगों की लाइफ आराम से चलने लगी थी और कुछ दिनों बाद ही सुधांशु चाचा का देहांत हो गया, जब मैंने यह बात सुनी तो मुझे बहुत बुरा लगा और मुझे यह भी एहसास हुआ कि मैंने उन्हें बहुत ही खरी खोटी सुनाई। उनका कोई भी नहीं था इसलिए हम लोगों को ही गांव जाना पड़ा और जब हम लोग गांव गए तो गांव में जितनी भी जमीन उनके नाम पर थी, उन्होंने वह सब मेरे पति के नाम पर कर दी थी। मुझे तब एहसास हुआ कि मुझे उस दिन चाचा के साथ बदतमीजी नहीं करनी चाहिए थी, वह दिल के बहुत ही अच्छे थे लेकिन अब उनकी मृत्यु हो चुकी है इसलिए यह सब सोचकर कोई भी फायदा नहीं था। मैं इस बात से बहुत दुखी थी और कुछ दिनों तक हम लोग गांव में ही रुके, मेरे पति कहने लगे कि हम कुछ दिनों तक गांव में ही रुकेंगे और उसके बाद ही हम लोग वापस जाएंगे। मैंने उनसे कहा ठीक है, हम लोग कुछ दिन गांव में ही रुक जाते हैं।

मैं और मेरे पति गांव में ही रुक गए थे लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ सुधांशु चाचा की बातें याद आ रही थी, जब उन्होंने मुझे जाते वक्त सॉरी कहा था। मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो जाएगी लेकिन अब उनकी मृत्यु हो चुकी थी तो मैं भी बहुत ज्यादा दुखी थी। मुझे सिर्फ यही लग रहा था कि मैंने उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया और न ही मैंने उनसे बिल्कुल भी अच्छे से बात नहीं की। मैंने यह बात अपने पति से कहीं तो वह कहने लगे कोई बात नहीं चाचा दिल के बहुत ही अच्छे थे इसलिए तो हमेशा ही मेरे पास आते थे और वह मुझे बहुत ही मानते थे। हम लोग कुछ दिन तक तो गांव में ही थे इसलिए हम लोग गांव में घूमने के लिए चले जाते थे। गांव में शौच की व्यवस्था नहीं थी इसीलिए हमें खेतों में शौच के लिए जाना पड़ रहा था, हम सुबह सुबह ही शौच के लिए खेतों में चले जाते थे। एक दिन में सुबह सुबह खेतों में शौच के ले गई हुई थी उस दिन एक जवान लड़का आ गया और उसने मेरी गांड को देख लिया। जब वह मेरे पास आया तो उसने मुझे वहीं खेतों में दबोच लिया और कहने लगा कि आज मैं आपकी चूत मारूगा। मैंने उसे गांव में कभी भी नहीं देखा था लेकिन जब उसने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उससे कहा कि हम लोग झाड़ियों में चलते हैं यहां कोई देख लेगा। वह कहने लगा सामने ही गन्ने का खेत है हम लोग वहां पर चलते हैं। जब हम उस खेत में गए तो उसने जैसे ही अपने लंड को मेरे मुंह में डाला तो मैं उसके लंड को चूसने लगी। मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा मैं जिस प्रकार से उसके लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी मुझे बड़ा आनंद आ रह था। उसके लंड को चूसने के बाद उसने मेरे कपड़े खोले। वह कहने लगा तुम्हारी गांड बड़ी मस्त और मुलायम है। उसने मेरी योनि के अंदर उंगली डाल दी और मेरी योनि से पानी निकलने लगा।

उसने मुझे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही जब उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मै चिल्लाने लगी और मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मैं अपनी चूतड़ों को उससे मिला रही थी और उसका पूरा साथ दे रही थी। उसने काफी देर तक ऐसा किया हम दोनों एक दूसरे के साथ 10 मिनट तक संभोग कर पाए। जब उस जवान लड़के का वीर्य मेरी योनि में गिर गया तो उसने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकालते हुए कहा कि आप अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लीजिए। मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लिया और सकिंग करना शुरू किया तो उसका लंड दोबारा से खड़ा हो चुका था। उसने मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी गांड में गया तो मुझे बड़ा दर्द होने लगा और मैं चिल्लाने लगी। लेकिन जैसे ही उसका लंड मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा था तो उसका लंड मेरे गांड के साथ सेट हो चुका था। अब उसे भी अच्छा लगने लगा था वह जिस प्रकार से मुझे झटके दे रहा था मैं उसका पूरा साथ देती और उसे कहने लगी कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से तुम मेरी गांड मार रहे हो। मैंने उसे कहा कि तुम मेरी गांड फाड़ कर रख दो और मेरे बडी चूतडो को तुम मसल कर रख दो। उसने भी मेरी गांड पर नाखून मार दिए और मुझे इतनी तेजी से वह झटके मारने लगा कि मेरी गांड के पूरे घोडे खुलने लगे और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जब वह मुझे धक्के दे रहा था मैं उसका पूरा साथ दे रही थी और अपने मुंह से मादक आवाज मैं उसे अपनी तरफ आकर्षित करती जाती जिससे कि वह मेरी तरफ आकर्षित हो रहा था। मुझे उसके साथ संभोग करते हुए बड़ा ही आनंद आ रहा था जैसे ही उसने अपने माल को मेरी गांड के ऊपर गिराया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने अपने कपड़े साफ किए और उसके बाद में घर चली गई लेकिन गन्ने के खेतों में चुदने का अलग ही मजा आया।

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