गाँव की गोरी की मस्त जवानी

प्रेषक : अरुण …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अरुण है और में गुजरात का रहने वाला हूँ। मुझे भी आप लोगों की तरह कामुकता डॉट कॉम पर सेक्स कहानियों को पढ़ने का बहुत ही गंदा शौक है और इन कहानियों को पढ़कर में भी उत्तेजित हो जाता हूँ। एक दिन मैंने अपनी भी एक सच्ची घटना मेरे एक सच्चे अनुभव को लिखकर आप सभी तक पहुँचाने के बारे में विचार बनाया और फिर में भी आज यह किस्सा लिखने बैठ गया। अब में अपना परिचय देते हुए अपनी आज की कहानी को शुरू करता हूँ। दोस्तों मेरी उम्र 30 साल है और यह घटना आज से तीन साल पहले की है, जब में एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में प्रॉजेक्ट इंजीनियर के पड़ पर काम कर रहा था। दोस्तों उस समय में एक फ्लाइओवर को बनाने का काम देख रहा था और उस प्रॉजेक्ट का कच्चा सामान जैसे की रेत, इटे, और सीमेंट को खरीदने का काम और कोटेशन को देखने की सारी जिम्मेदारी मेरी ही थी। फिर सभी ठेकेदार जब भी मुझसे मिलने आते, तब वो लोग मेरे लिए कुछ ना कुछ तोहफा या उपहार लेकर आते और मुझे उनका ऑर्डर पास करने के लिए रिझाने की कोशिश किया करते थे। दोस्तों उन सभी में से एक ठेकेदार था, जिसका नाम रघुभाई था। जो एक बड़ा रेत और सीमेंट का सप्लायर था।

एक दिन वो मेरे लिए एक महंगा वाला मोबाइल और मिठाई ले आया और फिर मेरे केबिन में आने के बाद उसने मुझसे कहा कि लीजिए सर, यह आपके लिए मिठाई और मोबाईल, यह मोबाईल अभी एक सप्ताह पहले ही बाजार में नया आया है। फिर उसी समय मैंने उसको कहा कि रघुभाई आप यह सब मेरे लिए मत लाया कीजिए, अगर आपका सेंपल पास हो गया और कोटेशन सही हुआ तो आपका काम अपने आप ही हो जाएगा। अब वो बोले कि सर शुद्धता के बारे में मुझे कोई तकलीफ़ नहीं है, वो तो पास हो ही जाएगे, लेकिन भाव अगर किसी का मुझसे कम हुआ तो क्या होगा? वो मेरे लिए सबसे बड़ा सवाल है और थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो मुझसे बोले कि सर आप अगर मेरा बताया हुआ पैसा, फिक्स कर दो तो में आपको आपका जो भी आप बोलो में वो हिस्सा दे दूंगा। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, में आपका दिया हुआ पैसा कोटेशन में देख लेता हूँ और में आपको बता दूँगा। अब वो मेरी बात को सुनकर उठे और बाहर जाने लगे और जाते जाते वो मुझसे बोला सर आपकी नौकरी कितने बजे पूरी होती है? अगर आप आज शाम को फ्री हो तो खाना खाने मेरे घर पर आ जाइए। दोस्तों पहले तो मैंने उसको मना कर दिया, लेकिन उसके बहुत बार कहने पर में मान गया और उसी रात को करीब आठ बजे में रघु भाई के घर पहुंच गया।

दोस्तों उस गाँव में उनका अपना घर था, वो घर बहुत बड़ा था और एकदम गाँव के घर जैसा होता है वैसा था। रघुभाई गाँव में एक धनवान आदमी थे, मैंने दरवाजे पर जाकर उन्हे आवाज़ लगाई, जिसको सुनकर वो तुरंत बाहर आ गए और फिर उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा में अंदर जाकर झूले पर बैठ गया। अब वो मेरे पास एक आराम कुर्सी पर बैठे थे और फिर उन्होंने लीला के नाम से एक आवाज़ लगाकर कहा कि पानी लाना, थोड़ी देर बाद एक सुंदर औरत बाहर आई जिसके हाथों में पानी था। अब रघु भाई ने मेरा परिचय उनसे करवाया और कहा कि सर यह मेरी पत्नी है और मैंने उनको नमस्ते करते हुए पानी ले लिया, पानी को पीते पीते मेरी नज़र लीला को ही देख रही थी। दोस्तों उसकी कमर में जो एक गहरा बल पड़ रहा था, उसकी वजह से वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और लीला करीब 5.5 लंबी अच्छे आकार की बदन की सुंदर औरत थी और उसके फिगर का आकार 36 -28 -32 होगा। दोस्तों वो एकदम दूध जैसी गोरी उसको में गुलाबी गोरी कहूँगा। अब मेरी नज़र लीला पर थी और रघुभाई की मेरे ऊपर वो मेरा लगातार लीला के गोरे अंगो को घूरना देख रहे थे और लीला भी मेरी नज़र को देखकर थोड़ी सी शरमा रही थी। फिर पानी पीकर मैंने वो गिलास लीला को दे दिया और वो वहां से चली गयी।

अब रघुभाई मेरी तरफ देखकर मुस्कुराए और उन्होंने मुझसे पूछा क्यों सर क्या आपकी शादी हो चुकी है? तब मैंने कहा कि नहीं अभी तो तक नहीं हुई है। अब वो मुझसे बोले कि फिर इस जवानी का क्या फायदा जो काम जवानी में करना होता है, वो आप क्या बुढ़ापे में करोगे? और वो मुझसे इतना कहकर हंसने लगे। अब मैंने उनको कहा कि रघु भाई मुझे मेरे काम से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती में शादी के बारे में कैसे सोचूं? फिर उन्होंने मुझसे पूछा क्या आपको मचलती जवानी देखकर कुछ नहीं होता? मैंने कहा कि में आपकी इस बात का मतलब नहीं समझा? तब उन्होंने कहा कि अरे साहब यह दुनिया सुंदर जवान औरतो और लड़कियों से भरी पड़ी है, क्या उन्हे देखकर आपको कुछ नहीं होता? में उनके मुहं से यह बात सुनकर थोड़ा सा शरमाकर नीचे देखने लगा, क्योंकि मुझे भी उनकी वो कहीं हुई बात एकदम सही लगी और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद लीला ने हमे खाने के लिए आवाज़ लगाई और हम दोनों उठकर चले गए। अब लीला ने हमे खाना लगा दिया और में खाना खाते समय लीला को ही देख रहा था, खाना परोसने के समय वो जब नीचे झुकती तब उसके ब्लाउज से जो उसके गोरे चिकने उभार निकलकर बाहर आते उनको देखकर में एकदम उत्तेजित हो उठता।

दोस्तों लीला ने जो ब्लाउज पहना हुआ था, वो गहरे गले का था और पीछे से उसकी पीठ पर सिर्फ़ तीन इंच ब्लाउज था और बाकी उसकी पीठ एकदम खुली हुई थी। अब उस द्रश्य को देखकर मेरा मन बड़ा ललचा रहा था मेरा मन हो रहा था कि में अभी उसको वहीं पर पकड़कर जबरदस्ती उसकी चुदाई के मज़े ले लूँ, लेकिन में मजबूर था। दोस्तों उस रात को वहां से खाना खाने के बाद जब में अपने कमरे पर आया, मैंने अपने कपड़े बदले और ए.सी. को चालू करके में एक ब्लूफिल्म लगाकर उसको देखने लगा। फिर कुछ देर बाद में उस फिल्म में जो अदाकारा थी, में उसमे भी लीला को देख रहा था और उसके नाम की मुठ मार रहा था और पूरी रात बस मुझे लीला के गोरे बूब्स चिकनी पीठ पतली कमर और उसका सुंदर चेहरा देखते हुए वो सब याद करके नींद नहीं आई। अब में तीन चार बार मुठ मार चुका था, लेकिन फिर भी लीला मेरे दिमाग़ से नहीं जा रही थी। फिर दूसरे दिन सुबह तैयार होकर में अपने ऑफिस चला गया और थोड़ी ही देर के बाद रघुभाई के सेम्पल की रिपोर्ट आ गई, वो रिपोर्ट एकदम सही थी और अब मैंने कोटेशन भी देखा उनका भाव थोड़ा सा ज़्यादा था और इसलिए मैंने तुरंत ही रघुभाई को फोन किया और ऑफिस आने को कहा।

फिर वो कुछ देर बाद आ गए और अब मैंने उनके साथ बैठकर रिपोर्ट और भाव के बारे में बातें की और उनको कहा कि अगर आप इसमे 1.50 रुपया कम करे तो में कुछ कर सकता हूँ। अब वो बोले कि सर अगर आप कहे तो में 75 पैसा कम कर देता हूँ, मैंने उनका काम वहीं पर अटकाए रखा और उनको दो दिन बाद आने के लिए कहा और वो चले गये, लेकिन मेरे दिमाग में तो अब भी रघुभाई की हॉट सेक्सी पत्नी, लीला की वो तस्वीर घूम रही थी और मेरे मन से उसका विचार दूर नहीं हो रहा था। फिर दो दिन के बाद में अपने ऑफिस में बैठा हुआ था और में उस समय अपने लेपटॉप पर काम कर रहा था, लेकिन तभी मेरे कानो में एक जननी आवाज़ पड़ी “क्या में अंदर आ सकती हूँ? मैंने तुरंत दरवाजे की तरफ देखा और पाया कि सामने दरवाजे पर लीला खड़ी हुई थी। दोस्तों उस समय लीला ने गुजराती स्टाइल में प्लेन नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे से उसका गहरे गले का ब्लाउज और उसके दूध जैसे गोरे बूब्स का उभार और उसकी गहरी नाभि मुझे साफ नज़र आ रही थी। अब मैंने उसको देखते ही अपनी कुर्सी से उठकर कहा कि अरे लीला भाभी आप, और वो भी यहाँ? आप अंदर आईए ना कहिए आपका यहाँ पर कैसे आना हुआ?

अब वो अंदर आकर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और उन्होंने कहा कि वो आपने दो दिन के बाद बुलाया था, इसलिए में आज आई हूँ क्योंकि उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है इसलिए मुझे यहाँ पर आना पड़ा। अब में उसको अपनी चकित नजरों से घूरकर देखता रहा और साथ साथ अपने लंड को जो पेंट के अंदर उठ गया था, में उसको भी सेट करता रहा और उस समय मेरी हालत थोड़ी खराब हो गयी थी। दोस्तों इस बात को वो अब अच्छी तरह से समझ चुकी थी, इसलिए मेरी हालत को और भी ज्यादा खराब करने के लिए अब जानबूझ कर अपने दोनों हाथ को सामने वाली टेबल पर रखते हुए थोड़ा आगे की तरफ वो और भी झुककर बैठ गई। अब उस वजह वजह से उसकी जालीदार साड़ी से उसके बूब्स का उभार मुझे अब पहले से ज्यादा साफ नज़र आ रहा था। फिर मैंने कहा कि भाभी रघुभाई ने जो रेट दिया है वो थोड़ा ज़्यादा है, इसलिए में उनके उस काम को अनुमति नहीं दे सकता और मैंने वैसे उन्हे पहले ही कहा था कि वो 1.50 रूपये कम कर दे, लेकिन वो नहीं मानते। फिर उनसे इतना कहने के बाद मैंने घंटी को बजाकर बाहर से एक चपड़ासी को बुलाया और उसको चाय और नाश्ता लाने को कहा वो मेरी बात को सुनकर वहां से चला गया।

फिर उसके चले जाने के बाद लीला बोली कि सर आप थोड़ा आगे बढ़ो, हम भी थोड़े बढ़े तो दोनों कहीं तो मिलेंगे, लेकिन आप तो अभी भी उसी जगह पर अटके हुए है और वो यह बात कहकर थोड़ा मुस्कुराई। अब मैंने उस बात का मतलब पूछा, तब वो बोली 2.00 रूपये का भाव ज़्यादा लगता है तो आप अपनी कीमत को 50 पैसा से बढ़ाकर 1.00 रुपया कर दीजिए और हम हमारी तरफ से 1.50 रूपये कम करके 1.00 रुपया कर देते है क्या हम ऐसा कर सकते है? फिर इतने में चाय आ गयी, उसके बाद हम दोनों सामने के सोफे पर आ गये। उस समय में कुर्सी पर बैठा हुआ था और वो सोफे पर मेरे पास बैठी हुई थी, तभी चाय को पीते पीते उसके हाथ से कप फिसल गया और चाय के गिरने की वजह से उसकी साड़ी खराब हो गयी। अब मैंने उसको बाथरूम में जाकर साफ करने को कहा और वो बाथरूम में चली गयी। फिर थोड़ी देर के बाद वो बाहर आ गई मैंने देखा कि उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरका हुआ था, जिसकी वजह से अब उसके उभार साफ नज़र आ रहे थे और में अपनी आंखे फाड़ फाड़कर उसके उभार और उसकी नाभि को देख रहा था। दोस्तों जो दिखने में बड़े ही आकर्षक नजर आ रहे थे और वो द्रश्य मुझे बहुत चकित कर रहा था, इसलिए में घूर घूरकर उसको देखता ही रहा।

तभी उसने मुझे अपने आप को देखते हुए मुझसे कहा क्यों क्या देख रहे हो सर जी? क्या कभी आपने किसी औरत के स्तन नहीं देखे जो इतना आंखे फाड़कर देख रहे हो? अब मैंने उनको कहा कि आप मुझे माफ़ करना भाभी, लेकिन आप इतनी सुंदर है कि में चाहकर भी आपके ऊपर से अपनी नज़र को नहीं हटा पाता और उस पर आपके यह गोरे अंग उभार दिखे तो में इनको देखकर बिल्कुल ही पागल हो जाता हूँ, भाभी में आपसे एक बार फिर से माफ़ी चाहता हूँ। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर हंसकर मुझसे बोली उसमे माफ़ करने की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि यह आपका दोष नहीं आपकी जवानी अब तक खाली है और मेरी सुंदरता का दोष है। अब वो मुझसे कहने लगी कि आप शादी ना कर सके तो क्या हुआ आप किसी को अपनी गर्लफ्रेंड तो बना ही सकते हो? मैंने उनको कहा कि यहाँ पर मुझे इन मजदूर औरतो के अलावा और कौन मिलेगा, जिसको में अपनी गर्लफ्रेंड बना सकता हूँ? फिर वो कहने लगी कि अगर आप चाहे तो में आपकी मदद कर सकती हूँ, उसके बदले बस आपको हमारा यह काम थोड़ा ध्यान देकर पास करना होगा। फिर उस काम के बाद में आपकी गर्लफ्रेंड बनने के लिए तैयार हूँ और फिर उसके बाद मेरी यह जवानी आपकी है मेरा हर एक अंग आपका आप जैसे चाहो इसके साथ खेलो आप मुझे थोड़ा सोचकर बताना।

दोस्तों वो मुझसे इतना कहकर उठकर बाहर चली गयी और अब में अपने आप को कोसता ही रह गया, क्योंकि मैंने अपने हाथ से वो इतना अच्छा मौका जाने दिया। अब में बस सोचता ही रह गया और वो मेरे सामने से तुरंत उठकर बाहर चली गई, भाभी ने मुझे कुछ कहने समझने का मौका भी नहीं दिया था, लेकिन उसके चले जाने के बाद मैंने बहुत बार सोचकर देखा विचार बनाया जिसकी वजह से में मन ही मन बड़ा खुश हुआ। फिर दूसरे दिन मैंने रघुभाई को फोन करके अपने ऑफिस बुला लिया और उनको अपने साथ उनकी पत्नी को भी लेकर आने को कहा, करीब एक घंटे के बाद वो दोनों मेरे ऑफिस में आ गए मैंने रघुभाई से कहा कि रघु भाई आप आखरी कितनी दर दे सकते हो? अगर आप 1 रूपये के लिए मानते हो तो में तैयार हूँ। अब वो बोले कि हाँ ठीक है, लेकिन में आपको केवल दस पैसा कमिशन ही दूँगा। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, उसके बाद हमारा सोदा तय हो गया और फिर मैंने लीला की तरफ देखकर इशारा किया, उसने मुझे अपने हाथ कान के पास ले जाकर उसमे एक कागज दिखाया, उस समय रघुभाई कोटेशन बना रहे थे, इसलिए उनका उस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। फिर लीला ने वो कागज टेबल के दूसरी तरफ से नीचे डाल दिया।

फिर तब तक रघुभाई ने अपना एक नया कोटेशन बनाकर मुझे दे दिया और वो मुझसे हाथ मिलाकर चले गये, में अब भी लीला को जाते हुए देख रहा था और उसने फिर से कागज की तरफ इशारा करते हुए कहा देख लेना। फिर उन दोनों के चले जाने के बाद मैंने वो कागज उठाकर देखा, उसमे लिखा हुआ था कि मुझे पहले से ही पता था कि तुम मुझे पाने के लिए इस काम को जरुर स्वीकार करोगे, तुमने मेरा मन जीत लिया है और आज शाम को 6.00 बजे तुम्हारी साइट के पास जो नदी है, उसके पास जो एक टूटा हुए मकान है तुम आज मुझे वहां पर मिलना। दोस्तों अब में उस खत को पढ़कर मन ही मन बड़ा खुश होकर शाम होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा और घड़ी में जैसे ही 5.45 हुए, में तुरंत अपने ऑफिस से निकलकर लीला से मिलने की जगह पर जाने के लिए तैयार हो गया। फिर ठीक 6.00 बजे वहां पर पहुंचने के बाद मैंने कुछ देर बाद लीला को सामने से आते हुए देख लिया था, लीला मेरे पास आ गई और उसने मुझसे कहा कि लगता है कि तुम समय से पहले ही आ गये हो? अब मैंने हंसकर शरमाकर अपनी नजरे नीचे झुका ली, वो मुझसे उम्र में 3-4 साल बड़ी थी और इसलिए में शरमा गया था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उसको कहा कि लीला आज में तुमसे अपने सच्चे प्यार का इज़हार करना चाहता हूँ, लेकिन पता नहीं में कैसे यह सब तुमसे कहूँ? वो बोली कि तुम मुझसे नहीं मेरे इस सेक्सी बदन को प्यार करना चाहते हो और उसके मुहं से यह बात सुनते ही मैंने उसको उसी समय तुरंत अपनी बाहों में जकड़ लिया और में उसको चूमने लगा था। अब उस काम में वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी, में पागलों की तरह लगातार उसके नरम गुलाबी रसभरे होंठो को चूमता, चूसता रहा और वो भी मेरे होंठो को चूस रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक दूसरे की जीभ को चूस रहे थे और में अपने एक हाथ को उसकी गदराई हुई कमर के ऊपर घुमा रहा था और फिर कुछ देर बाद ऊपर आकर में उसके बूब्स को दबाने लगा था। दोस्तों कुछ देर बाद मैंने उसके होंठो को छोड़ दिया और अब में तुरंत ही उसकी साड़ी का पल्लू हटाकर उसके ब्लाउज को खोलना चाहता था, लेकिन उसने मुझसे ऐसा करने से साफ मना कर दिया वो मुझसे कहने लगी कि यहाँ इस जगह खुले में नहीं हमे यहाँ पर कोई यह सब करते हुए इस हालत में देख लेगा, जिसकी वजह से हम दोनों की पूरे गाँव में बदनाम हो जाउंगी, वैसे में भी बहुत सालों से प्यासी हूँ और इसलिए आज में भी अपनी प्यास को बुझाना चाहती हूँ।

अब मेरे पति में वो ताकत जोश नहीं है, इसलिए वो मुझे कभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर सकते है और इसलिए मैंने यह रास्ता अपनाया है। फिर उस दिन मैंने तुम्हे देखा कि तुम पहली बार ही मेरे गोरे बदन को देखकर इतना ज्यादा उत्तेजित हो गये कि तुम कुछ देर बाद मेरे पति के पास से उठकर हमारे घर के बाथरूम में फ्रेश होने के बहाने से जाकर अपने लंड को मुठ मारकर शांत करने लगे। फिर उसी दिन मैंने तुम्हारा खड़ा लंड बाथरूम की खिड़की से चोरीछिपे देख लिया था और तब से ही तुम्हारे लंड को पाने की वो इच्छा मेरे मन घर कर गयी थी और अब में भी तुम्हे अपना बनाना चाहती हूँ। अब मैंने उसको कहा कि में ऐसे कैसे तुम्हे पा सकता हूँ? में तुम्हारे घर पर आ नहीं सकता और यहाँ पर तुम मुझे कुछ भी करने से मना कर रही हो। अब तुम ही मुझे बताओ कि में कहाँ यह सब करूंगा और में अब क्या करूं? तभी उसने मुझसे कहा कि जैसी आग तुम्हारे इस बदन में लगी हुई है ठीक वैसी ही मेरी भी हालत है, लेकिन में अभी मजबूर हूँ और इसलिए तुम अभी यहाँ पर सिर्फ़ ऊपर से ही मेरे इस जिस्म का आनंद ले सकते हो और कल शनिवार का दिन है, मेरे पति हर शनिवार को दर्शन के लिए हमारे गाँव से बाहर जाते है और उनको आने जाने में करीब शाम हो जाती है।

फिर वो समय हम दोनों के मिलन का एकदम ठीक समय होगा, कल सुबह में अपने पति के जाने के बाद तुम्हारे घर पर आ जाउंगी और तब तुम मुझसे जैसे भी तुम्हे मेरे साथ खेलना हो खेल सकते हो, उस हम दोनों को देखने मना करने वाला हमारे अलावा और कोई भी नहीं होगा। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, अगर तुम कहती हो तो में भी अपनी तैयारियां पूरी कर लेता हूँ और उसके बाद हम दोनों अपने जीवन का असली मज़ा बिना किसी डर रुकावट के ले सकते है और अब में उसको यह बात कहते हुए उसके अंगो का कपड़ो के ऊपर से ही दबाकर छूकर पूरा मज़ा लेने लगा था। फिर उस समय वो मेरे लंड को अपने एक हाथ में पकड़कर उसको मसलने लगी थी, जो अब तनकर पूरी तरह से जोश में आकर खड़ा होकर उसकी चूत को सलामी दे रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने लीला से कहा कि तुम आज एक बार कम से भी कम इसका पानी तो निकाल दो, जिसकी वजह से इसको शांति मिले और यह चुपचाप बैठ जाए। फिर उसने मेरे कहने पर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए मेरी पेंट की चेन को खोलकर उसी समय मेरे लंड को बाहर निकाल लिया, पहले उसको कुछ देर मसला और उसके बाद उसने लंड को अपने मुहं में लेकर वो अब अंदर बाहर करने लगी थी।

दोस्तों उसके ऐसा करने की वजह से मुझे पहली बार बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था, मुझे वो सब एक सपने जैसा लगने लगा था और करीब दस मिनट के बाद में झड़ने वाला था। अब मैंने उसको कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ इसलिए तुम अब लंड को बाहर निकाल दो, लेकिन वो नहीं मानी और फिर अचानक से मेरे वीर्य की पिचकारी उसके मुहं में ही निकल गयी और उसने वो सारा वीर्य पी लिया। फिर उसके बाद उसने मेरा लंड चूसकर चाटकर पूरा साफ कर दिया और कहा कि बस अब मिल गई ना तुम्हे शांति? में तुम्हारी हूँ चाहो बीवी की तरह रखो चाहे अपनी गर्लफ्रेंड या रखेल जैसे चाहो तुम मुझे अपना बना लो। अब मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उसको कहा कि तुम्हे देर हो रही है, अब तुम घर जाओ कल सुबह 9.00 बजे मेरे कमरे पर आ जाना और फिर हम दोनों वहां से अपने अपने घर चल दिए। दोस्तों उस पूरी रात मुझे नींद नहीं आई, में रात भर उसके बारे में सोचता रहा और दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर में तैयार हो गया। फिर करीब 9.15 बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी, मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो उस समय मेरे सामने लीला खड़ी हुई थी। अब मैंने उसको तुरंत अंदर ले लिया और दरवाजा बंद किया और उसी समय उसको अपनी बाहों में भर लिया।

फिर उसने मुझे रोक दिया और कहा कि मुझे तैयार होना है, इसलिए तुम थोड़ा सा इंतजार करो यह बात कहकर वो पास वाले कमरे में चली गयी और थोड़ी देर के बाद जब वो वापस बाहर आई, तब मैंने उसको देखा वो एकदम सेक्सी जालीदार साड़ी पहने हुई थी। दोस्तों उसका वो ब्लाउज कमर से पूरा खुला हुआ हुआ था और उस ब्लाउज से उसके करीब 1/3 बूब्स ब्लाउज के बाहर आ रहे थे, वो एकदम गोरे उभरे हुए थे। अब मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर पहले कुछ देर चूमा और उसके बाद चाटा मेरे ऐसा करने से वो गरम होकर जोश में आकर सिसकियाँ भरने लगी थी। अब वो मुझसे बोल रही थी कि आज तुम मुझे जी भरकर पूरा दिन चोदो, आज तुम मुझे अपने लंड के दम का असली मज़ा दे दो, तुम आज मेरी बरसों की इस सेक्स की भूख प्यास को मिटा दो, प्लीज आज तुम मुझे जमकर चोदो। फिर मैंने उसको अब तुंरत ही पूरा नंगा कर दिया था और उसने भी मुझे नंगा किया, उसके बाद हम दोनों ही बेडरूम में चले गये और वहां पर हम दोनों पूरे नंगे होकर कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे। फिर मैंने उसको बिल्कुल सीधा लेटाकर में उसके हर एक अंग को चूमने लगा था, ऊपर से नीचे आते हुए मैंने अब उसकी चूत को पहले कुछ देर चूमने के बाद उसकी चूत की पंखुड़ियों को अपने एक हाथ से फैलाकर कुछ देर ध्यान से देखा।

फिर उसके बाद मैंने अपने लंड को चूत के मुहं पर रखकर एक जोरदार बड़ी तेजी के साथ अपना पूरा दम लगाकर एक धक्का मार दिया। जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर चला गया और उसके मुहं बस एक हल्की सी आईईईईइ स्सीईईईइ की आवाज निकल गई। अब में अपनी तरफ से उसको तेज गति के साथ धक्के देकर चोदने लगा था, मैंने उसको तेज धक्के देकर बहुत जोश में आकर चोदा जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड, अब उसकी चूत में अंदर बाहर बड़े आराम से होने लगा था, क्योंकि अब तक उसकी चूत एक बार झड़ चुकी। दोस्तों उस गीली चिकनी चूत में मेरा लंड बड़ी आसानी से फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और उस वजह से उसको बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। अब वो मुझसे बोली आह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फ़ हाँ तुम ऐसे ही तेज धक्के देकर मुझे चोदो वाह मस्त मज़ा आ गया, आज तुमने मेरे इतने दिनों से देखे सपने को पूरा कर दिया ऊईईईइ आज में तुमसे बहुत खुश हूँ, हाँ ऐसे ही धक्के तुम मुझे लगाते रहो आह्ह्ह मेरी यह चूत इस तरह की चुदाई के लिए बहुत सालों से तरस रही थी, लेकिन आज इसको पूरी तरह से शांति मिली है, हाँ और ज़ोर से चोदो तुम मुझे अरुण प्लीज और ज़ोर से चोदो और हर दिन तुम मुझे बस ऐसे ही चोदते रहना।

अब में बस तुम्हारी ही हूँ और मेरी यह चूत भी तुम्हारी ही है और मेरी यह गांड भी आज से बस तुम्हारी है तुम जैसे चाहो मेरी चूत को फाड़ दो प्लीज अरुण तुम मुझे तेज धक्के देकर चोदो। दोस्तों में उसको अपनी तरफ से वैसे ही दमदार धक्के लगाकर चोदता रहा, ऐसा करने में हम दोनों को बहुत मस्त मज़ा आ रहा था वो भी मेरा साथ देते हुए अपनी तरफ से अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे हर एक धक्के का जवाब देती रही और में उसको चोदता चला गया। दोस्तों उस दिन मैंने उसको करीब तीन बार बहुत जमकर चोदा क्योंकि में भी चुदाई के लिए बड़ा प्यासा था और मेरी टंकी फुल भरी हुई थी, में चुदाई करके उसको लीला की चूत की गहराईयों में खाली करता रहा। फिर मेरा लंड एक बार झड़कर थोड़ी देर में ही दोबारा उसको देखकर तुंरत तनकर खड़ा हो जाता और में दोबारा उसकी चुदाई करना शुरू कर देता, पूरा कमरा हम दोनों की सिसकियों से गूँज उठा था। अब वो लगातार आह्ह्ह ऊह्ह्ह हाँ चोदो अरुण बस ऐसे ही तुम अपने लंड को मेरी चूत में डालकर अंदर बाहर करते रहो। दोस्तों मैंने सबसे आखरी में उसकी एक बार गांड भी मारी तब मुझे पता चला कि वो इतनी टाईट थी कि आप पूछो ही मत, लेकिन मुझे उसकी गांड मारने में मज़ा बड़ा आया।

दोस्तों वो मेरा पहला सेक्स अनुभव था इसलिए में पूरी तरह जोश में आकर उसकी चुदाई करता रहा। हर बार मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर उसके मुहं में डाल दिया, जिसको उसने बड़े मज़े लेकर चाटकर चूसकर साफ किया और कुछ घंटे कब उसके साथ निकल गए? मुझे इस बात का पता ही नहीं चला और फिर वो बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर अपने चली गई। दोस्तों उसके बाद जब तक मेरा वो काम चला मैंने हर दिन अच्छा मौका देखकर हर रोज़ उसकी जमकर मस्त चुदाई के मज़े लिए। उसके बाद में अपने ऑफिस चला जाता। अब जल्दी ही में अपने घर भी उसकी चुदाई करने के लिए आ जाता और वो भी हर कभी अच्छा मौका देखकर शाम को करीब चार बजे मेरे पास आ जाती और फिर में उसको चोदने लगता ऐसे ही उसके साथ मज़े करते हुए पूरा एक साल निकल गया। अब में उसको हर शनिवार को उसके पति के दूसरे गाँव में चले जाने के बाद चोदता हूँ और वो मेरा हर बार खुश होकर पूरा पूरा साथ देती है। दोस्तों यह थी मेरी सच्ची चुदाई की घटना जिसमे मैंने लीला की प्यासी चूत को चोदकर उसकी चूत के साथ साथ अपने लंड को भी शांत किया। हम दोनों का काम पूरा हो गया, जिसकी वजह से हम दोनों बड़े खुश रहने लगे थे ।।

धन्यवाद …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *