चाची के साथ पहली चुदाई का मजा

chudai ki kahaniप्रेषक : राज …

हैल्लो दोस्तों, अब में आपको मेरे बारे में बताता हूँ मेरा नाम राज है, मेरी उम्र 25 साल है, में नागपुर का रहने वाला हूँ और एक नेटवर्क कंपनी में जॉब करता हूँ। में कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ, आज में आपको मेरा पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। यह घटना तब की है, जब में 18 साल का था और 12वीं क्लास में पढ़ता था। वैसे तो मेरे 3 चाचीयाँ है, लेकिन में सबसे ज़्यादा मेरी छोटी चाची को पसंद करता हूँ, उनका नाम जया है, उनका फिगर साईज 36-32-36 का है, उनकी उम्र 38 साल की है। जब यह घटना हुई तब उनकी उम्र 29 साल की थी। उनके बड़े बूब्स मुझे बहुत पसंद है। वो जब से हमारे घर आई थी, तब से में उनको पसंद करता था और सेक्स की भावना भी मुझमें कम उम्र में ही आ गयी थी। पहले तो हमारी जॉइंट फेमिली थी, लेकिन बाद में सब अलग अलग हो गये, लेकिन फिर भी सब आस पास ही रहते थे और सबका एक दूसरे के यहाँ आना जाना भी था।

अब जब में 10वी क्लास में था तो तब मेरा ध्यान उन पर कुछ ज़्यादा ही जाने लगा था, अब में हर पल उनके पास किसी ना किसी बहाने से जाता था और उन्हें देखता था। फिर एक दिन जब में उनके घर गया और हमेशा की तरह सोफे पर बैठ गया। तो थोड़ी देर के बाद चाची बोली कि में बाहर जा रही हूँ, तुम्हें बैठना हो तो बैठो। फिर मैंने कहा कि ठीक है में जाते समय घर लॉक कर दूँगा और फिर वो अंदर वाले रूम में चली गयी। तभी मेरे दिमाग़ में विचार आया कि शायद चाची साड़ी चेंज करने गयी हो। तो में उस रूम की खिड़की जो हॉल की तरफ थी वहाँ जाकर देखने लगा, तो किस्मत से वो ख़िड़की लॉक नहीं थी। फिर मैंने हल्के से एक साईड को खोला और अंदर देखा तो चाची सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी।  अब उन्हें इस हालत में देखकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया था। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि अंदर जाकर चाची को चोद दूँ, लेकिन में कुछ नहीं कर सका।

अब उस दिन के बाद से जब भी मुझे चाची को कपड़े बदलते देखने का मौका मिलता था, तो में मिस नहीं करता था। मेरे चाचा बिजनेस मेन थे तो वो अक्सर टूर पर जाते रहते थे इसलिए चाची हम बच्चों   में से किसी को भी अपने घर में रात को सोने के लिए बुलाती थी। जब भी मुझे पता चलता तो में  सबसे पहले पहुँच जाता था। फिर एक दिन चाचा फिर कहीं बाहर गये, तो उस दिन रात को में चाची के घर में था। अब चाची और उनका बेटा नीचे सोए थे और में बेड पर सोया था। अब मुझे तो वैसे भी नींद नहीं आ रही थी और में बार-बार चाची की तरफ ही देख रहा था और सोच रहा था कि किस तरह से में  चाची के साथ सेक्स करूँ? वैसे तो में उनसे अपनी सारी बातें शेयर करता था, लेकिन में उनसे सेक्स के बारे में कैसे बात करता?

अब उन्हें सामने देखकर में खुद पर कंट्रोल भी नहीं कर पा रहा था तो तभी में बेड से उठकर नीचे चाची के बाजू में सो गया। अब चाची गहरी नींद में थी, तो मैंने हल्के से उनके पैरो को अपने पैरो से टच किया तो तभी चाची ने करवट बदली, तो में डर गया कि कहीं चाची जाग तो नहीं गयी। उस समय उन्होंने गाउन पहन रखा था और गर्मी के दिन होने के कारण उन्होंने अंदर कुछ पहना भी नहीं था।  फिर कुछ देर के बाद मैंने फिर से उनके पैरो को टच किया और फिर अपने एक हाथ को हल्के से उनके हाथ पर रख दिया, लेकिन अब में डर भी रहा था इसलिए फिर में उठकर वापस बेड पर सो गया। वैसे तो में हर दिन सुबह चाची के घर उनके नहाने के समय पर जाता था और चुपके से उन्हें साड़ी बदलते हुए देखता था। फिर एक दिन जब चाचा बाहर गये थे, तो में रात को वहीं सो गया। फिर सुबह जब मेरी नींद खुली तो तब 8 बज रहे थे तो में उठा।

फिर चाची ने मुझे चाय के लिए पूछा तो मैंने हाँ कहा तो वो चाय ले आई, तो मैंने चाय का कप हाथ में लिया और चाय पीने लगा। फिर तभी मुझे बाथरूम से पानी की आवाज़ आई तो में किचन की तरफ गया और किचन से बाथरूम की तरफ देखा तो बाथरूम का दरवाजा हल्का सा लगा हुआ था, तो में समझ गया कि चाची नहाने गयी होगी। फिर में धीरे से बाथरूम के पास गया, तो बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला था तो मैंने हल्के से अंदर देखा, तो चाची अपनी साड़ी निकाल रही थी और फिर उन्होंने बाकी के कपड़े भी निकाल लिए और अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी। अब उनके बूब्स को देखकर तो मेरे मुँह में पानी आ गया था और फिर में बाहर आकर सोफे पर बैठ गया और सोचने लगा तो तभी मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और में चाची का बाथरूम से निकलने का इंतज़ार करने लगा। फिर कुछ देर के बाद चाची बाहर आई और अपने कमरे में चली गयी।

अब मैंने सोच लिया था कि आज में चाची को इनडाइरेक्टली बोल ही दूँगा और इसलिए में डरते-डरते कमरे के दूसरे दरवाजे से अंदर इस तरह गया कि उन्हें लगे कि में गलती से अंदर आ गया हूँ। अब में सिर्फ़ यही चाहता था कि में उन्हें दिखूं और उन्हें ऐसा लगे कि मैंने उन्हें कपड़े बदलते देख लिया है। तो में कमरे में गया और उन्हें सामने से देखकर एकदम से पलट गया और वापस कमरे से बाहर आ गया और सोचने लगा कि अब क्या होगा? अब मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं चाची समझ नहीं गयी हो कि में जानबूझ कर कमरे में आया था। फिर थोड़ी देर के बाद चाची हॉल में आई और मुझसे बातें करने लगी। अब में उनसे नजर भी नहीं मिला पा रहा था, तो तभी चाची बोली कि तुम जानबूझ कर रूम में आए थे ना। फिर पहले तो में कुछ नहीं बोला, लेकिन फिर हिम्मत करके मैंने हल्की आवाज़ में हाँ कहा।  तो उस पर वो कुछ नहीं बोली और उठकर किचन में चली गयी। अब मुझमें भी थोड़ी हिम्मत आ गयी थी तो में उनके पीछे-पीछे किचन में चला गया और चाची से एक गिलास पानी माँगा। फिर उन्होंने पानी का गिलास मेरे हाथों में दे दिया।

फिर मैंने पानी पीते-पीते उनसे कहा कि क्या में आपसे एक बात कहूँ? तो वो बोली कि हाँ। तो तब मैंने कहा कि में आपको ब्रा और पेंटी में देखना चाहता हूँ। तो ये सुनते ही वो एकदम से मुझे गुस्से से देखने लगी और फिर अचानक से हंस पड़ी और ना करने लगी। फिर मेरी लाख कोशिशो के बाद आख़िरकार वो मान ही गयी, लेकिन बोली कि बस और कुछ नहीं। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर हम दोनों बेडरूम में चले गये। फिर पहले तो उन्होंने अपनी साड़ी निकाली, फिर ब्लाउज, फिर पेटीकोट निकाला। अब में उनसे 5 फुट की दूरी पर खड़ा था, में उनको सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में सपनो में ही देखता था, लेकिन रियल में देखना शायद मेरा लक मेरे साथ था। अब तो बस मन में एक ही इच्छा थी कि में उन्हें फुक करूँ।  फिर में थोड़ा उनकी तरफ बढ़ा तो वो बोली कि नहीं। तब मैंने कहा कि क्या में आपके बूब्स को हाथ लगाऊँ? तो वो हाँ बोली, तो तब में उनके पास गया। अब उनके बूब्स पर हाथ रखते ही मुझमें एक करंट सा दौड़ने लगा था, अब मेरा लंड पूरे जोश में था और में इस मौके को गँवाना नहीं चाहता था।

फिर मैंने उन्हें ज़ोर से पकड़ लिया और उनके होंठो पर किस करने लगा। फिर वो मुझे धकेलने की नाकाम कोशिश करती रही, लेकिन उनकी एक नहीं चली। फिर मैंने उन्हें पलंग पर खींचा और तुरंत अपने कपड़े उतार फेंके और उन पर चढ़ने लगा और बारी-बारी से उनके लिप्स, बूब्स और चूत को चूसने लगा। अब धीरे-धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी थी। फिर जब मुझे उनका साथ मिलने का सिग्नल मिला तो मैंने उनकी ब्रा और पेंटी निकाल फेंकी और अपने लंड को उनकी चूत पर रख दिया और फिर ज़ोर का एक धक्का दिया तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। फिर मैंने भी अपनी गति को बढ़ा दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा तो कुछ देर के बाद में झड़ गया और उनके ऊपर ही सोया रहा।

फिर कुछ देर के बाद हम दोनों उठे और फिर में अपने कपड़े पहनकर बाहर आ गया। मुझे तो इतना आनंद आ रहा था जिसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की थी। अब तो में बार-बार उनसे सेक्स करने के लिए सोच रहा था और उस दिन के बाद से हम हर दिन सेक्स किया करते थे और फिर हमारा ये सिलसिला 5 साल तक चलता रहा। फिर धीरे-धीरे उनकी इच्छा कम होती गयी और हमारा सेक्स रीलेशन सिर्फ़ चाची और भतीजे के रीलेशन पर वापस आ गया, लेकिन में आज भी उनसे उम्मीद लगाकर हूँ कि शायद वो फिर से मुझे सेक्स करने के लिए बुलाए। वैसे में सेक्स का इतना भूखा हूँ कि में आज भी कोई लेडीस को ढूंढ रहा हूँ, जो मेरे साथ सेक्स करे और मुझे वही आनंद दे जो मुझे मेरी चाची से मिला था ।।

धन्यवाद …

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