चार सहेलियों को बजाया – 2 • Hindi Sex Stories

चार सहेलियों को बजाया – 1 थोड़ी देर की बातों के बाद ये ऑफीस से आ गये और शबाना इनसे नमस्ते करके चली गयी, मेरे पति जाती हुए शबाना की गांद को घूर रहे थे.

मैने चाइ बनाई और ये कुछ ज़रूरी काम से मुंबई जाने वाले थे रात को ही तो मैने तैयारी लगानी शुरू कर दी.

इन्होने मुझसे कहा कि शबाना आंटी को बुला लेना सोने के लिए तो मैने कहा नही मैं कंचन को बुला लूँगी उसके हज़्बेंड भी बाहर गये हुए है, तो इन्होने हाँ मे सिर हिलाया और फिर मेरे साथ एक ज़ोर दार सेक्स किया लेकिन मुझे पता नही क्या हो गया था, मैं आँखें बंद किए हुए माधव के ख़यालों मे खोई हुए थी, और जल्दी जल्दी 3 बार झाड़ गयी.

उसके बाद ये चले गये मैने कंचन को कॉल किया और आने को कहा तो वो बोली अकेले आउ या किसी और को भी साथ लाउ.

मैने कहा, “आज तो अकेले ही आ, पूरा हफ़्ता है किसी और का बाद मैं देखते है.”

कंचन ने कहा, “ठीक है मेरी जान.” और फोन काट दिया

मैं उसके आने का इंतेजर करने लगी.

कंचन थोड़ा लेट आई थी और वो अपने बच्चे को घर पर ही छ्चोड़ कर आई थी और अंदर आते ही मैने दरवाज़ा बंद कर दिया, सारे खिड़की पर्दे सब मैने पहले ही बंद कर रखा था.

मैने अपनी चूत को भी बहुत अच्छे से धोया था और सारे बाल भी सॉफ का लिए थे, लेकिन मस्ती इतनी थी कि चूत से पानी टपक रहा था और मेरी पॅंटी को गीला कर रहा था. आते ही हम दोनो सोफे पर ही गुत्थम गुत्था हो गये, कंचन ने झट से अपना कुर्ता और ब्रा निकाल दी उसके मोटे मोटे निपल मैने अपना मुँह मे भर लिए और बारी बारी से एक एक स्तन को मसल कर उसके निपल का रस पान करने लगी. कंचन ने भी मेरी मॅक्सी निकाल दी और पॅंटी भी, जो मैने नहा कर बिल्कुल अभी पहनी थी लेकिन वो चूत रस से भीग गयी थी.

फिर कंचन खड़ी हुई और सलवार निकाल दी, उसकी पॅंटी चूत के पास से उठी हुई थी जैसे ही उसने पॅंटी निकली मैं हैरान रह गयी. उस कुतिया ने वो वाइब्रटर अपनी चूत मे डाला हुआ था और वो बॅट्री मोड पर ऑन था.

मैने देखा तो वो बोली, “मेरी जान मैं हमेशा इसको चूत मे फसा का बाहर जाती हूँ ताकि मर्दो को देख कर बार बार झाड़ सकूँ.”

“तू साली बहुत चुड़क्कड़ है.” मैने कहा तो वो भी तपाक से बोली, “तुझे भी बना दूँगी.”

और उसने वो वाइब्रटर निकाल कर मेरे मुँह मे घुसा दिया, उसकी चूत रस के साथ साथ मूत का नमकीन कसैला सा स्वाद भी जेहन मे उतरता चला गया, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैने वो रस चाट लिया, अब कंचन ने मुझे सोफे पर ही घोड़ी बना दिया और वो वाइब्रटर मेरी चूत मे पीछे से घुसा दिया, और स्पीड भी एकदम फुल कर दी, मैं 2 मिनिट मे ही झाड़ गयी लेकिन उसने मुझे बुरी तरह से जाकड़ लिया था मैं उठ भी नही सकती थी और हिल भी नही सकती थी.

मेरा सारा बदन अकड़ने लगा और मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया और मैने इतना महसूस किया कि मेरी चूत से एक तेज धार कंचन के स्तनो को भिगो रही थी.

जब मुझे होश आया तो मैं सोफे पर ही पड़ी थी और कंचन बड़बड़ा रही थी, “साली मेरे मुँह पर ही मूत दिया.”

मैने नॉर्मल होने की कॉसिश की और उठा कर अपने बेडरूम मे गयी, कंचन भी पीछे से आ गयी. मुझे सेक्स हमेशा से ही स्लो और लंबा पसंद है वाइल्ड सेक्स के कारण मुझे घबराहट हो रही थी. मैं आँखें बंद करके लेट गयी.

मेरी आँख तब खुली जब कंचन ने मेरी चूत के लिप्स पर अपनी जीभ घुमाई, और मेरी चूत का दाना बहुत संवेदनशील हो गया था, जैसे ही उसने दाना अपने मुँह मे भरा मेरी सिसकी निकल गयी.

मैं, “आआआहह कंचन धीरे कर.”

कंचन समझ रही थी कि मैं रूफ सेक्स की आदि नही हूँ, मेरे हज़्बेंड भी मुझे धीरे धीरे उत्तेजित करते हुए प्यार से मेरी चुदाई करते है.कंचन ने अपने दोनो हाथो से मेरी चूत को फैलाया और अंदर के भाग पर जीभ फेरी मेरे मूत छिद्र पर उसकी जीभ कुछ ऐसा जादू कर रही थी मानो कि मेरा मूत निकल जाएगा, वो पूरी चूत को मुँह मे भर कर चूम रही थी.

फिर कंचन ने एक उंगली अंदर डाल दी और दाने पर जीभ चलाने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, अचानक उसने मेरी चूत को अपने मुँह मे दबा लिया, और काँपने लगी, मैने आँखें खोल कर देखा तो वो उसकी चूत से वाइब्रटर निकाल रही थी

फिर हम दोनो लिपट कर लेट गये. थोड़ी ही देर मे हमे कब नींद आ गयी पता ही नही चला

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