ट्यूशन में मस्ती

प्रेषक : संजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम संजय है, में दिल्ली में रहता हूँ। दोस्तों
यह किस्सा आज से दो साल पहले का है, तब में 21 साल का था और में आज आप सभी को अपने
जीवन की सबसे प्यारी घटना बताता हूँ। दोस्तों यह बिल्कुल सच्ची घटना है, फिर चाहे
कोई विश्वास करे या ना करे। अब में सबसे पहले आप सभी को अपने और अपनी पड़ोस की भाभी
के बारे में बताना चाहूँगा जिसके साथ मैंने बड़े मस्त मज़े लिए। मेरी लम्बाई 5.10
इंच, रंग गोरा, अच्छा गठीला बदन है साथ में आठ इंच लंबे और तीन इंच मोटे लंड का मालिक
हूँ। दोस्तों मेरे पड़ोस में एक भाभी रहती है जिनका नाम पूजा वर्मा है, ( वो अभी
भी मेरे पास ही रहती है, मेरी भी अब शादी हो चुकी है और में अपने परिवार के साथ ही
रहता हूँ) दोस्तों मेरी भाभी एक इंग्लिश की अध्यापक है है उनकी तरह उनका नाम भी
सेक्सी। दोस्तों यह उन दिनों की बात है जब उनके पति दुबई में रहते थे और वो एक मैंकेनिकल
इंजिनियर थे, मेरी वो भाभी दिखने में इतनी सेक्सी लगती थी कि उनके बारे में सोचकर
ही मेरा लंड अपनी ऊंचाई पर पहुँच जाता था। दोस्तों उनके वो बूब्स बड़े आकार के थे
और वो बहुत गोलमटोल बाहर की तरफ तनी हुई रहती थी और उन्हें देखकर ही लगता था कि
मानो वो मुझसे कह रही हो कि मुझे ब्रा से निकालो मसलो और चूसो मुझे मस्त मज़े लो।

अब मेरा दिल भी उन्हें देखकर ही उन्हें मसलने को तड़प जाता था, मुझे ऐसा
लगता था कि कब में इन गोरे सुंदर कबूतरों को अपने हाथ में लूँ? और उनके बूब्स को अपने
मुँह में लेकर चूम लूँ। दोस्तों में यह सब इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि में उन दिनों
तीन शादीशुदा औरतों को पहले ही चोद चुका था और उसमे एक मेरी खुद की सगी पूजा भाभी
भी थी। दोस्तों पूजा भाभी के बदन में एक दूसरी तरह का आकर्षण था जिसकी वजह से में
उनकी तरफ खीचा चला जाता था और उनकी गांड को देखकर में तो मर ही जाता था। फिर जब भी
उनकी तरबूज जैसी गांड और चौड़े नितंब उनकी चाल के साथ-साथ ऊपर नीचे होते हुए मटकते
थे और में बड़ा ही चकित होकर उनके कूल्हों को हिलते हुए देखता। दोस्तों पता नहीं उनके
पति इतनी मस्त हॉट सेक्सी पत्नी को छोड़कर कैसे अकेले रह रहे थे? क्योंकि उन्हें एक
बार देखकर जवान तो क्या 70 साल के बूढ़े आदमी का भी लंड पूरे उफान पर आ जाता था और आप
उन्हें सेक्स की देवी भी कह सकते है। अब में आप सभी को अपनी आज की कहानी की तरफ ले
चलता हूँ, वो इंग्लिश की अध्यापक है उन दिनों में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था, लेकिन
में इंग्लिश में बड़ा ही कमज़ोर था।

दोस्तों सच बात तो यह है कि में कॉलेज के पहले साल के पेपर में इंग्लिश
में फैल हो गया था और मेरी मम्मी कई बार मेरी पड़ोसन भाभी से मुझे पढ़ाने की बात कह
चुकी थी। फिर एक दिन उन्होंने मेरी माँ से कहा कि वो मुझे उनके पास पढ़ने भेज दिया
करे, वैसे तो वो सिर्फ लड़कियों को ही पढ़ाया करती थी। फिर जब मेरी माँ ने मुझे यह सब
बताया कि पूजा भाभी ने मुझे पढ़ाने के लिए अपने आप कहा है, तब में उनकी वो बात
सुनकर बिल्कुल हैरान हो गया। अब मैंने मन ही मन में सोचा कि हो सकता है कि पूजा
भाभी जी मुझे इंग्लिश पढ़ाने में मेरी मदद करना चाहती हो, लेकिन अब में बहुत खुश था
कि कम से कम में उनके साथ हर रोज बैठ तो सकूँगा। फिर में हर दिन खुश होकर उनके
यहाँ पढ़ने के लिए जाने लगा था और में पढ़ाई करते समय कई बार उनके गहरे गले के सूट
से उनके गोरे उभरे हुए बूब्स को देखा करता था, लेकिन में उन्हें मेरी गंदी नजर का पता
नहीं चलने देता था। फिर कुछ दिनों के बाद पड़ोसी होने के नाते उनकी और मेरी बहुत अच्छी
तरह से पटने लगी थी।

दोस्तों एक तो वो मुझसे चार-पांच साल बड़ी थी और दूसरी बात में उनके
घर की क्लास में सबसे बड़ा था और फिर मेरे कुछ दोस्त और में वैसे भी कसरत करने जाता
था और इसलिए मेरा बदन भी बड़ा गठीला था और में उनकी क्लास में एक अकेला लड़का था और
थोड़ा सा समझदार भी लगता था। अब वो धीरे धीरे मुझसे एक दोस्त जैसा व्यहवार करने
लगी थी और हम दोनों अब बहुत हँसी मज़ाक भी करने लगे थे। फिर एक दिन ऐसे ही मज़ाक-मज़ाक
में उन्होंने मुझसे पूछ लिया क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? तब मैंने उनको कहा कि
हाँ बहुत सारी है। अब वो बोली कि ऐसे नहीं, जो एक दोस्तों से भी ज्यादा हो। फिर मैंने
उनको कहा कि में आपका मतलब नहीं समझा? वो बोली कि मेरा मतलब था कि जिसको तुम प्यार
करते हो। अब मैंने उनको कहा कि नहीं ऐसी कोई नहीं है। तभी वो कहने लगी कि नहीं ऐसा
नहीं हो सकता, तेरे जैसे अच्छे दिखने वाले और सुंदर लड़कों को तो लड़कियाँ ढूँढती
रहती है। फिर मैंने कहा कि नहीं ऐसी कोई नहीं है, में सच बोल रहा हूँ मेरी अभी तक
कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर बड़ी चकित होकर टेबल पर
आगे की तरफ झुककर बैठ गयी और उसके बाद बहुत ही धीरे से पूछने लगी क्या कभी तुमने
किसी को चाहा है? मैंने उनको कहा कि मेरे चाहने से क्या होता है?

वो बोली कि अगर तुम किसी को चाहते हो तो उसको अपने मन की बात को बता
देना चाहिए छुपाकर रखने से कोई फायदा नहीं होता। अब मैंने उसको पूछा फिर क्या वो बता
देने से हाँ कर देती है? फिर वो बोली कि अगर उसकी हाँ होगी या वो तुम्हें चाहती होगी,
तो जरुर हाँ कर देगी। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि यह बहुत अच्छा मौका है और
फिर मैंने पूजा भाभी का एक हाथ पकड़ा और उनको कहा कि पूजा भाभी में आपसे बहुत
प्यार करता हूँ। तभी वो मेरे मुहं से इस बात को सुनकर डर गयी और वो उन्होंने एक
झटका देकर अपना हाथ छुड़ा लिया और तुरंत खड़ी हो गयी, उसी समय उन्होंने जाने को बोल
दिया। अब मैंने तुरंत ही बात को घुमाते हुए कहा कि में तो बस आपसे मज़ाक कर रहा था
और तब जाकर वो थोड़ा सा शांत हो गई और फिर से वो कुर्सी पर बैठ गयी। फिर थोड़ी देर
तक हमारे बीच इधर उधर की बातें हुई और फिर में अपने घर आ गया। अब मैंने पूरी रातभर
पूजा भाभी के बारे में सोच सोचकर करीब दो तीन बार मुठ मारी, लेकिन आज मेरा लंड
शांत ही नहीं हो रहा था। फिर अगले दिन जब में उनके घर पढ़ाई करने दोबारा से पहुँचा,
तब मैंने देखा कि उस दिन वो साड़ी पहने हुई थी और वो उस बिना बाह के ब्लाउज में बहुत
ही हॉट सेक्सी लग रही थी।

अब मेरा मन कर रहा था कि में उसके होंठो को खा जाऊं, उसी समय वो मुझे
देखकर मुस्कुराई और कहने लगी कि आओ ना संजय बैठो और उसी समय मैंने उनको पूछा क्या आप
कहीं जा रही है? वो बोली कि नहीं बस ऐसे ही दिल किया इसलिए मैंने इस साड़ी को बाँध
ली, लेकिन तुम मुझसे यह सब बातें क्यों पूछ रहे हो? फिर मैंने उनको कहा कि वो
इसलिए क्योंकि आज आप इस साड़ी में बहुत सुंदर लग रही हो। फिर मैंने अपनी किताब निकाली,
लेकिन उन्होंने तुरंत ही उस किताब को पकड़कर बंद कर दिया और वो कहने लगी कि आज हम
बस बातें ही करते है, पढ़ाई कल से करेंगे। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है जैसी आपकी
मर्जी और अब वो पहले से ज्यादा मेरे पास सरक आई और तभी अचानक से उनकी साड़ी का पल्लू
नीचे सरक गया और मुझे उनके बूब्स नजर आने लगे। दोस्तों उनके बड़े गले के ब्लाउज से
उनकी वो गोरी छाती उभरकर बाहर आ रही थी और यह सब देखकर मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया।
अब मेरे धीरे धीरे समझ में आ रहा था कि वो आज जानबूझ कर मेरे सामने इतना झुककर
बैठी थी, जिसकी वजह से उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार नीचे सरककर उनके मस्त बूब्स के मुझे
दर्शन करवा रहा था। अब मेरा मन ललचाने लगा था और उनकी पतली गोरी कमर की चिकनाई पर
हाथ फैरने की मेरी इच्छा हो रही थी।

फिर मैंने ध्यान से देखा कि उनकी वो साड़ी कमर से बहुत नीचे बंधी थी, जिसकी
वजह से मुझे उनकी नाभि का गहरा गढ्ढा अपनी जीभ से चाटने का आमंत्रण दे रहा था और आज
उसने अपने बालों को भी खुले रखे थे वो कमर तक लटके हुए थे, जो अब गालों को चूमते
और बड़ी अदा से वो अपनी एक उंगली से उन्हें पीछे करती। अब उसकी ऐसी अदाए देखकर
मेरा लंड बिल्कुल बेकाबू हो रहा था और अब में मौका पाकर उसको अपने एक हाथ से दबा
रहा था, में बहुत गरम हो रहा हूँ यह सभी उसने अब अच्छी तरह से महसूस कर लिया था। फिर
वो मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली कि संजय क्या में तुम्हें सच में अच्छी लगती हूँ?
उसी समय झट से मैंने कहा कि हाँ पूजा भाभी जी। अब वो बोली कि तुम मुझे बस पूजा कहो
क्योंकि अब हम एक दोस्त है और ऐसा कहकर उन्होंने मेरे हाथ पर अपना एक हाथ रख दिया।
अब इतने में मुझे जोश आ गया और फिर में थोड़ा उसके पास सरक गया और उसके चेहरे को
झपटकर मैंने अपने दोनों हाथों में ले लिया और उसको पकड़कर उसके मोटे रसभरे होंठो
को अपने मुँह में लेकर जबरदस्ती चूसने लगा था। अब उन्होंने कुछ देर बाद जबरदस्ती
मुझसे छुटकर मुस्कुराते हुए कहा कि संजू बाहर का दरवाजा खुला है, कोई हमे देख लेगा।
फिर उनकी इस बात से में समझ गया था कि उनका अब इरादा क्या है?

दोस्तों असल में उस दिन उन्होंने उनके बाकी के छात्रों को छुट्टी दे
रखी थी, यह सब मुझे बाद में पता चला था। फिर मैंने उठकर जल्दी से दरवाजा बंद किया
और उसको खीचकर खड़ा किया तुरंत अपनी बाहों में भर लिया। अब में एक बार फिर से उसको
चूमने प्यार करने लगा था, उन्होंने भी मेरे गले में अपना एक हाथ डाल दिया था और वो
भी मेरा साथ देते हुए मेरे चुम्मे का जवाब देने लगी थी। अब हम दोनों एकदम पागलों
की तरह एक दूसरे को चूम रहे थे और फिर मेरे हाथ उसकी मस्त गांड को दबा रहे थे, उनका
ब्लाउज पीछे से बहुत खुला हुआ था। अब मेरे हाथ उसकी नंगी पीठ पर भी फिसल रहे थे और
उस समय में इतने जोश में था कि मैंने उसके ब्लाउज के हुक भी एक झटका देकर तोड़ दिए
थे। फिर मैंने देखा कि उसने नीचे काले रंग की पारदर्शी ब्रा पहनी हुई थी, जिसमे से
उसके बड़े आकार के बूब्स लगभग बाहर ही दिख रहे थे। अब मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलने
की कोशिश कि, लेकिन मुझे ऐसा करने में ज्यादा देर लग रही थी, क्योंकि उसकी ब्रा
बहुत टाईट थी। दोस्तों उस ब्रा ने सिर्फ आधे बूब्स और सिर्फ निप्पल को ही ढक रखा
था, मैंने ज़ोर लगाकर उसकी ब्रा को भी फाड़ दिया।

अब मेरे इस जंगलीपन से वो भी मधहोश हो रही थी और फिर उसने मेरी टीशर्ट
को ऊपर उठाकर निकाल दिया, मेरी छाती पर बहुत बाल थे और वो उनको अपने एक हाथ से सहलाने
लगी थी। फिर वो मेरे छोटे-छोटे निप्पल को चूमने लगी थी और वो उसका एक हाथ मेरी
पेंट के उठे हुए हिस्से पर ले गयी और उसने वहाँ दबाया। अब वो मेरी पेंट के ऊपर से
ही मेरे लंड को मसल रही थी। फिर मैंने उसकी साड़ी को उतारकर फेंक दिया, तभी उसने
मेरी तरफ देखा और मेरा लंड पर अब भी उसके एक हाथ में था। अब मैंने उसके होंठो को
चूमा और उसके पेटीकोट का नाड़ा खीच दिया और फिर इस तरह उसके पेटीकोट को भी मैंने उतार
दिया। फिर उसने जल्दी से मेरी पेंट के बटन खींचकर खोले और मेरी पेंट को उतार दिया था।
अब वो सिर्फ एक गुलाबी पतली छोटी सी पेंटी में थी, जिसमे से उसकी झाटो के बाल भी
बाहर आ रहे थे और में अंडरवियर में था, लेकिन अब मेरा लंड पूरे उफान पर था जो कि एक
तंबू सा लग रहा था। फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे लेकर अपने कमरे में चली गयी
और फिर वहाँ पर उसने मेरा अंडरवियर भी उतार दिया। अब मेरा लंड झटके से बाहर आकर
उसकी चूत को सलामी देने लगा था और अब मेरा लंड जोश में आकर झटके दे रहा था।

फिर जब उसने मेरे लंड को देखा तो उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी
और उसके मुँह से निकला संजू इतना लंबा और मोटा वाह यह कितना तगड़ा है? और फिर वो तुरंत
ही अपने घुटनों पर बैठ गयी और उसने लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और अब वो तो
उसको पागलों की तरह चाटने लगी थी। अब पूजा भाभी उसको लोलीपोप की तरह अपने मुँह में
भरकर चूसने लगी थी और वो इतने अच्छे से उसको अपनी जीभ से चाट रही थी कि में तो उस
मज़े की वजह से जैसे स्वर्ग में था। अब में उसके सर को पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने
लगा था और करीब दस मिनट के बाद मैंने उसको वैसे ही उठाया और पलंग पर लेट गया, जिसकी
वजह से अब उसकी गांड मेरे मुँह के पास थी। फिर मैंने उसकी पेंटी में पीछे से अपना
एक हाथ डाल दिया और उसके भारी भारी कूल्हों को सहलाया और फिर उसकी पेंटी के ऊपर से
उसकी उभरी हुई चूत पर अपना एक हाथ लगाकर महसूस किया। दोस्तों मुझे छुकर पता चला कि
उसकी पेंटी चूत के पास से पूरी गीली हो चुकी थी। फिर मैंने जल्दी से उसकी पेंटी को
नीचे सरका दिया और उसने खुद ही मेरी मदद करते हुए अपनी पेंटी को अपने पैरों से बाहर
निकाल दिया। दोस्तों मैंने देखा कि उसकी चूत पर झाटे थी, लेकिन उसकी चूत की दरार एकदम
साफ चिकनी थी, उसकी चूत बड़ी ही उभरी हुई गुलाबीपन लिए एकदम चिपके होंठ थे उसकी चूत
के।

फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया और महसूस किया कि उसकी
चूत बहुत ही गरम थी और अब मेरे ऐसा करते ही उसके मुँह से सिसकियाँ निकल गयी आहह ऊफ्फ्फ्फ़
हाँ और तेज करो जान, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। अब में अपनी दो उंगलियाँ बड़ी तेज़ी
से उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा था और वो ऊऊहह आह्ह्ह् थोड़ा धीरे माँ आईईई हाँ
अब ज़ोर से संजू ऊउह्ह्ह्ह जैसी आवाजें अपने मुँह से लगातार निकालने लगी थी। अब
उसकी दोनों आंखे बंद हो चुकी थी और फिर हम दोनों उसी समय 69 आसन में आ चुके थे। फिर
मैंने उसका पैर पकड़कर उसको अपने ऊपर खीच लिया और फिर उसकी चूत को अपने मुँह के ऊपर
सेट किया। अब उसकी चूत से रस टपक रहा था और उसकी चूत भी फड़क रही थी। फिर मैंने अपनी
जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया तभी वो तड़प उठी और अपनी चूत को मेरे मुँह पर
दबाया और कहने लगी कि नहीं संजय, नहीं प्लीज आह्ह्ह उउम्म्म्म में मर जाऊंगी ऊफफ्फ्फ्फ़
तुम यह क्या कर रह हो? मैंने ऐसा कभी नहीं किया, स्सीईईइ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है
ऊऊह्ह्ह्ह संजू और अब वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी थी,
उसकी चूत से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। फिर मैंने उसको कहा कि अपनी झाटे साफ कर
लेना, क्योंकि मुझे तुम्हारी चूत एकदम साफ देखनी है।

तभी वो मुस्कुराते हुए बोली कि जब भी तुम्हारा मन करे तुम अपने हाथों
से इसको साफ कर देना और फिर यह तो अब तुम्हारी ही है और अब वो मुस्कुराने लगी थी।
अब मैंने उसकी गांड में भी अपनी एक उंगली को डाल दिया, तब वो दर्द से चीख पड़ी और बोली
कि ऐसा मत करो, प्लीज मुझे दर्द होता है। फिर मैंने हंसकर कहा क्यों यह भी तो अब
मेरी हुई ना? तब वो बोली कि अब तो सब कुछ तुम्हारा ही है, लेकिन प्यार से करो मेरे
राजा, आह्ह्ह। फिर हम दोनों करीब दस मिनट तक एक दूसरे को उसी तरह मुँह से चोदते
रहे और इतने में वो पागलों की तरह मचलने लगी ऊफ्फ्फ्फ़ ज़ोर से करो, अपनी जीभ को पूरी
अंदर डालो, आअहह संजय में गई आईई और फिर उसकी चूत से पानी का फव्वारा निकल गया। अब
उस रस की वजह से मेरा चेहरा और पूरा मुँह पूरा भर गया, जिसको मैंने अपनी जीभ से पूरा
चाट लिया, वो बड़ा ही स्वादिष्ट था। अब मैंने उसको सीधा करके लेटा दिया और उसके
होंठो और बूब्स को चूमने लगा था और में उसके बूब्स को तो बहुत ज़ोर-ज़ोर से मसल रहा
था। अब में उसके छोटे-छोटे बूब्स के उठे हुए निप्पल को अपने होंठो से दबा रहा था और
फिर एक बार तो उसके निप्पल को अपने पूरे मुँह में लेकर दोनों बूब्स को मैंने बहुत जमकर
चूसा, जिसकी वजह से अब उसके दोनों बूब्स लाल हो चुके थे।

अब वो मुझसे बोली कि संजय अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, प्लीज कुछ करो
वरना में में मर ही जाऊंगी। फिर मैंने तुरंत ही उसके कूल्हों के नीचे एक तकिया लगा
दिया जिसकी वजह से उसकी चूत एकदम ऊपर उठकर पूरी खुल गई और मैंने बड़े प्यार से उस
पर अपना एक हाथ फैरा। अब वो जोश में आकर आहहहहह करने लगी थी और मुझसे कहने लगी, चोदो
मुझे जल्दी से प्लीज चोदो, आह्ह्ह तुम इसके अंदर अपने लंड को जल्दी से डालो दो। अब
में भी पूरी तरह से गरम हो चुका था, मेरे बदन का रुआ-रुआ खड़ा हो चुका था, मैंने अपने
लंड को उसकी चूत के खुले होंठो पर रख दिया। फिर उसने भी झट से अपने दोनों पैरों को
पूरा फैला लिया, उसकी चूत बड़ी टाईट नजर आ रही थी। अब मैंने एक ज़ोर का झटका लगाया,
जिसकी वजह से मेरे लंड का मोटा टोपा उसकी छोटी सी चूत को फैलाता हुआ अंदर चला गया।
तभी उसके मुँह से चीख निकल गयी और वो उस दर्द तड़प उठी सिसकियाँ लेते हुए मुझसे
कहने लगी, आहहह ऊफ्फ्फ्फ़ में मर गयी आईईईईईई धीरे कर हरामी फ्री का माल समझकर टूट पड़ा
साले। अब मैंने उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और उसके होंठो को अपने मुँह में ले
लिया कुछ देर बाद उसका दर्द थोड़ा सा कम हुआ और वो थोड़ी देर में शांत हो चुकी थी।

फिर मैंने एक और झटका लगाया, तब मेरा लंड आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में
जा चुका था, लेकिन तभी वो दर्द से मचल उठी आह्ह्ह ऊफ्फ्फ छोड़ दो, अब इसको बाहर
निकालो आहह मेरी चूत फट गयी, यह कितना मोटा है? उफफफ्फ। दोस्तों मैंने उसको कसकर
पकड़ रखा था, वो छूटने की बड़ी कोशिश कर रही थी। अब में बहुत जोश में था और फिर
मैंने फिर से एक धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अब उसकी टाईट चूत में
चला गया, शायद उसकी चूत बहुत कम चुदी थी इसलिए वो इतनी कसी हुई थी। अब मैंने उसको पूछा
कि तुम तो एक शादीशुदा औरत हो, लेकिन फिर भी तुम्हारी चूत इतनी टाईट कैसे है? उसने
कहा कि तुम्हारा लंड तो घोड़े जैसा लंबा और मूसल जैसा मोटा है, उसके सामने मेरी यह
छोटी सी चूत क्या करेगी। अब मैंने उसको पूछा क्या तुम्हारे पति का छोटा है? तब
उसने कहा कि उनका तो तुम्हारे लंड का आधा भी नहीं है और मेरी चूत में इतना अंदर तक
तो आज तक कुछ भी नहीं गया। अब मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे यह अब मेरे गले से ही बाहर
निकल आएगा और यह कहते हुए उसने मेरे लंड पर हाथ लगाकर देखा कि कितना बाकी है? तभी
उसको अपने हाथ में खून नजर आया। अब उसने कहा कि तुमने आज एक बार फिर से मेरी चूत
की सील को तोड़ दिया, देखो मेरी चूत से कितना खून निकल रहा है?

फिर यह देखकर उसकी बातें सुनकर मुझे और भी जोश आ गया। फिर मैंने उसको
चूमना शुरू किया और उसके बूब्स को चूसा और निप्पल को बड़े मज़े से चाटा, उसके बाद मैंने
झटके देने शुरू किए और अब लंड के अंदर बाहर जाने से उसको थोड़ी सी राहत मिलनी शुरू
हुई। फिर थोड़ी देर के बाद वो भी मेरे साथ मज़े लेने लगी थी आह्ह्ह्ह आश धीरे करो
जान, ऊफ्फ्फ्फ़ क्या तुम आज मुझे मार ही डालोगे? आज कितने दिनों के बाद मेरी यह आग
ठंडी हो रही है, आहह संजय और फिर उसने मुझे चूमना शुरू किए और वो अपनी कमर उछालने
लगी थी। फिर मैंने उसी समय अपना पूरा लंड बाहर खीचा और दोबारा एक ज़ोरदार झटका मार दिया,
जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अब जड़ तक उसकी चूत में सेट हो गया था। अब में उसको बड़ी
तेजी से धक्के देकर चोद रहा था और वो भी मज़े मस्ती में आकर नीचे से अपने कूल्हों को
उछाल उछालकर मेरा साथ दे रही थी। अब मेरे धक्कों की गति बहुत तेज हो चुकी थी, मेरे
धक्कों की गति तूफान मैल जैसी थी और फिर उसकी भी गति तेज हो गयी और अब वो
बड़बड़ाने लगी थी आहह हाँ और ज़ोर से, फाड़ दो तुम मेरी चूत को आईईईईई संजू मेरा
निकल गया, आह्ह्ह्ह और फिर वो झड़ गयी।

अब उसने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर लपेट लिए और वो एकदम शांत हो चुकी
थी, लेकिन मेरे धक्के अभी भी चालू ही थे और में अभी भी उसको वैसे ही धक्के देकर चोदे
जा रहा था। फिर करीब पांच मिनट के बाद वो एक बार फिर से गरम हो गयी और मेरा साथ
देने लगी थी और फिर करीब दस मिनट के बाद वो दोबारा से झड़ गयी। अब में भी पूरी मस्ती
में आ चुका था, मैंने अपनी गति को और तेज कर दिया था, जिसकी वजह से अब उसके मुँह
से वो अजीब-अजीब सी आवाजे आने लगी थी आह्ह्ह्ह सस्स्स्स्स ऊह्ह्ह्हह जानू तुम बहुत
अच्छे हो में तुमसे प्यार करती हूँ वाह तुम कितना चोदते हो? मेरा पति तो बस दो
मिनट में ही उतर जाता है, उफफ्फ मेरी चूत गयी काम से चोदो और तेज। अब वो अपना सर
इधर-उधर पटक रही थी और कह रही थी, हाँ ऐसे ही करते रहो मेरे जानू, करते रहो और अब उसने
एक बार फिर से अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को पूरी तरह से जकड़ लिया था और एक
ज़ोर के झटके के साथ वो तीसरी बार झड़ गयी थी। अब वो मेरे होंठो पर अपने होंठ रखकर
मुझे चूमने लगी थी और अब मेरा लंड भी आखरी पढ़ाव पर आ चुका था और इसलिए में ज़ोर-ज़ोर
से उसकी चूत में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा था।

अब में अपने पूरे लंड को बाहर निकालकर अंदर डाल रहा था और उसकी रसभरी चूत
के पानी से उसकी चूत गीली हो चुकी थी, जिसकी वजह से अब पूरे कमरे में फच-फच की आवाजे
गूंजने लगी थी। फिर में अपनी पूरी ताकत से और भी ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा था
और अब में भी झड़ने लगा था। फिर मैंने उसकी चूत की जड़ में अपने लंड को दबाया और अपनी
पिचकारी को चला दिया, करीब चार-पांच बार पिचकारी चलाकर में उसकी चूत में ही झड़
गया। अब उसकी चूत मेरे वीर्य से पूरी भर चुकी थी और में करीब दो मिनट तक तो ऐसे ही
उसके ऊपर लेटा रहा और फिर उसके बाद में उसके पास आकर लेट गया। अब वो मेरे कंधे पर अपना
सर रखकर लेट गयी, उसका वो नंगा मुलायम शरीर सच में बहुत आकर्षक लग रहा था, में
अपने हाथों को उसके पूरे नंगे बदन पर घुमाता गया ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा
था और वो भी खुश पुरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी। दोस्तों हमारी उस पहली चुदाई
के बाद तो कभी-कभी वो मुझे अपने साथ लेकर दूसरे शहर जाती और वहाँ पर भी किसी अच्छे
से होटल में हम दोनों कमरा लेकर दो दिनों तक नंगे ही रहते और बड़ी जबर्दस्त चुदाई
करते।

अब वो आज भी मेरे पड़ोस में रहती है, उसके एक बेटा है और शायद वो मेरा
ही है, लेकिन उसको अब उसने पढ़ाई के लिए पंचगनी में रखा है। फिर वो जब भी उसको
मिलने जाती है, तब वो मुझे भी अपने साथ ले जाती है और फिर हम महाबलेश्वर में रुककर
चुदाई का पूरा मस्त मज़ा लेते है और बहुत खुश होते है। दोस्तों यह थी मेरी सच्ची
चुदाई की कहानी मुझे उम्मीद है कि सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने
वालों को यह जरुर पसंद आएगी।

धन्यवाद …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *