नॉन वेज़ सेक्स स्टोरी – एक हसीन ग़लती

non veg sex story ek haseen galti मैं काँप उठी. अब कोई चारा नही था. मैं आधी नंगी थी ऐसे में वो बाहर निकला और कोई अंदर आ गया तो मैं बर्बाद हो जाउन्गि. मैने पेटिकोट का नारा खोला और धीरे से उसे नीचे गिरा दिया. वो मेरे पैरों में गिर गया. मैने पैर उस से निकाल लिए और पेटिकोट उठा कर एक तरफ रख दिया. अब मैं सिर्फ़ पॅंटी में उसके सामने खड़ी थी. मैं घबरा रही थी, शर्मा भी रही थी पर ना जाने क्यों एग्ज़ाइटेड भी थी. ये एग्ज़ाइट्मेंट मेरी गीली पॅंटी से सॉफ नज़र आ रही थी. मुकेश ने अपने सूपदे पर थूक लगाया और उसे रगड़ना सुरू कर दिया.

“हाई क्या जवानी है तेरी. अब ये पॅंटी भी उतार दे तो मज़ा आ जाएगा.”

“अब ये तो रहने दो मेरे बदन पर मुझे शरम आ रही है.” मैने कहा

“नही मेरी जान ये तो उतारनी ही पड़ेगी तुम्हे वरना मुझे मज़ा नही आएगा.”

मैने काँपते हाथों से पॅंटी को एक धीरे धीरे नीचे सरकाया. जब मेरी योनि का उपरी हिस्सा उसकी नज़रो की सामने आया तो वो अपने लिंग को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा. मैने धीरे धीरे पॅंटी नीचे सरका दी घुटनो तक.

“वाह क्या नज़ारा है. यही है जन्नत. नही नही ये चूत तो उस अँग्रेजन की चूत से भी प्यारी है. इसकी फांके बिल्कुल जुड़ी हुई हैं आपस में जैसे की कुँवारी चूत की होती है. पीनू भी खोल नही पाया इन फांको को. और इन्हे देख कर लगता है कि मनीष का छ्होटा सा लंड है. है ना सच कह रहा हूँ ना मैं.”

“तो हर किसी का इतना बड़ा होता है क्या. मनीष का जितना भी है मैं खुस हूँ उसके साथ.”

“खुस तो रहेगीं ही तू क्योंकि पत्नी है तू उसकी मगर तेरी चूत वो मज़ा नही ले पाएगी जिसकी की ये हकदार है. यार मैं लूँगा तेरी अब.”

मैं तो शरम से लाल हो गयी. बात ही कुछ ऐसी की थी उसने. मेरे पूरे शरीर में बीजली सी दौड़ गयी थी.

“देखो ऐसी बाते मत करो. मुझे कुछ कुछ होता है. और तुमने वादा किया था कि छुओोगे नही मुझे.”

“तेरी जैसी हसिनाओं को चोदने के लिए झुटे वादे करने पड़ते हैं वरना मेरे जैसे को तेरे जैसी भोसड़ी कहाँ मिलेगी.” वो बोला और आगे बढ़ कर मेरे से लिपट गया.

“आहह क्या कर रहे हो तुम छ्चोड़ो नही तो मैं चिल्लाउन्गि.”

“चील्लाओ ज़ोर से चील्लओ पर देख लो तुम्हारा ही बिगड़ेगा जो भी बिगड़ेगा हिहिहीही.” उसने बोला और मेरी योनि की फांको को मसल्ने लगा. ना चाहते हुवे भी मेरे शरीर में बिजली की एक लहर सी दौड़ गयी.

उसकी मोटी मोटी उंगलियाँ मेरी योनि की फांको को कभी रगड़ रही थी और कभी फैला रही थी. मैं तो मदहोश होती जा रही थी.

“क्यों कर रहे हो तुम मेरे साथ ऐसा आआहह छ्चोड़ो मुझे.” मैने नितंबो को झटका देते हुवे कहा. दरअसल मेरी योनि मचल उठी थी उसकी उंगलियों की चुअन के कारण और अब मैं खुद ही हिल हिल कर उसके हाथो को और ज़्यादा फील करना चाह रही थी अपनी योनि पर.

अचानक उसने मेरी योनि में उंगली डाल दी. “आआहह नही प्लीज़ आहह.”

वो मेरे आगे घुटनो के बल बैठ गया. उसकी उंगली धँसी हुई थी मेरी योनि में और मैं अपने नितंबो को आगे पीछे हिला रही थी. चाहती तो हट सकती थी पीछे मगर नही मैं हट ही नही पा रही थी. मैने उसकी तरफ देखा तो वो मेरी तरफ मुस्कुरा रहा था.

“अब ये चूत मेरी है, मुझे इसे मारने से कोई नही रोक सकता.” उसने अपने एक हाथ से अपने मोटे लिंग को सहलाते हुवे कहा. मैने शरम से आँखे बंद कर ली.

अचानक वो रुक गया और मैने सवालिया नज़रो से उसकी तरफ देखा. उसकी नज़रे कुछ ढूंड रही थी. तभी उसकी नज़र एक बोरी पर गयी. उसने वो उठा ली और फर्स पर बिछा दी.

“कुतिया की तरह मर्वओगि या सीधे लेट कर.” वो बेशर्मी से बोला.

मैं शरम से लाल हो गयी. “देखो कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी.”

“कोई नही आएगा. वैसे भी हम इस आल्मिरा और संदूक के पीछे हैं.” उसने कहा और मेरे उभारों को मूह में ले लिया. मैं कराह उठी और उसके सर को थाम लिया दोनो हाथो से. ऐसा लग रहा था मैं तुरंत झाड़ जाउन्गि. पर मैं खुद को थामे रही.

अचानक वो हट गया और बोला, “कैसे दोगि बोलो ना.”

“जैसे तुम चाहो,” मैने बोल कर चेहरा ढक लिया हाथों में.

अचानक उसके हाथ फीसलते हुवे मेरे नितंबो तक जा पहुँचे.

“अरे वाह ये तो बड़े मुलायम हैं. ज़रा घूमना तो.”

मैं शर्मा गयी. उसने मुझे अपने आगे घुमा दिया और वो घुटनो के बल बैठ गया और मेरे नितंबो की दोनो गोलाईयों को सहलाने लगा.

“ओह यार क्या गांद है तेरी. ऐसी गांद आज तक नही देखी मैने.”

मैं शरम से लाल हो गयी.

उसने मेरे नितंबों को फैलाया और अपनी नाक को उनकी दरार में फँसा दिया.

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