पडोसी को पोर्न देखते हुए पकड़ा

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मेरा नाम अंजना है मैं एक शादीशुदा महिला हूं लेकिन मेरा तलाक हो चुका है और मैं लुधियाना में रहती हूं। मेरा एक 15 वर्ष का लड़का भी है जो कि स्कूल में पढ़ता है। मेरा तलाक हुए काफी समय हो चुका है,  अब मैं अपने बच्चे के साथ ही खुश हूं और उसी के साथ मेरा समय पता नहीं कब निकल जाता है, मुझे मालूम ही नहीं पड़ता। मैं जॉब भी करती हूं, सुबह मैं जॉब पर निकल जाती हूं और शाम को जब मैं घर पर होती हूं तो अपने लड़के के साथ ही ज्यादा समय बिताती हूं। मैंने कभी भी दूसरी शादी के बारे में नहीं सोचा, मेरे डिवोर्स को हुए 7 वर्ष हो चुके हैं लेकिन मैंने कभी भी किसी और के साथ शादी करने के बारे में नहीं सोचा क्योंकि मैं हमेशा से ही चाहती हूं कि मैं अपने बच्चे को ज्यादा समय दे पाऊँ, मैं उसके साथ खुश हूं। वह जब भी छोटी-छोटी बातों को लेकर खुश होता है तो मुझे बहुत ही खुशी मिलती है।

मेरे पति से मेरे तलाक की वजह मेरी ननद है वह मेरे पति को बहुत भड़कती रहती थी और हमेशा ही मेरे बारे में कुछ ना कुछ गलत कहती रहती थी इसीलिए मेरी ननद के साथ मेरी बिल्कुल भी नहीं बनी, उसने मुझ पर कई बार चरित्रहीन होने का भी आरोप लगाया और जब भी मेरे पति के दोस्त हमारे घर पर आते तो वह मेरे बारे में हमेशा ही कुछ ना कुछ गलत कह देती जिससे कि मेरे पति के दिमाग में भी शक का कीड़ा भर गया और वह मुझ पर हमेशा ही शक करने लगे। मैंने कई बार उनसे बात भी की थी परंतु मेरी बात का उन पर कोई भी असर नहीं हुआ, वह सिर्फ अपनी बहन की बातों को ही मानते थे और अपनी बहन की बातों पर ही बहुत भरोसा करते हैं। उनकी बहन का भी तलाक हो चुका था और वह हमारे साथ ही रहती थी क्योंकि मेरे और मेरे पति के अलावा उनका कोई भी नहीं था। मैंने उन्हें हमेशा ही अपनी बहन की तरह माना परंतु उन्होंने उसके बदले मुझे हमेशा ही गलत ठहराया है और मेरे पति की नज़रों में उन्होंने मुझे बहुत ही ज्यादा चरित्रहीन साबित करने की कोशिश की है, जिससे कि मेरे पति भी मुझ पर हमेशा ही शक करने लगे।

मुझे लगा कि अब मुझे अलग ही रहना चाहिए, मैंने इसी वजह से अलग रहने का फैसला कर लिया और मैंने कोर्ट में भी अपने तलाक के लिए अर्जी दे दी थी। काफी समय लगा मेरा तलाक होने में, मुझे नहीं पता था कि मुझे इतनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, दो साल बाद मेरे पति ने तलाक दिया है, मेरा केस बहुत लंबा चला। मेरे पति नहीं चाहते थे कि हमारा लड़का  मेरे साथ रहे इसी वजह से उन्होंने कई बार मुझ पर दबाव भी बनाया लेकिन मैंने हिम्मत नहीं आ हारी और अब मैं अपने लड़के के साथ रहती हूं। मेरे माता-पिता का भी देहांत हो चुका है इसलिए मेरा कोई भी नहीं है और मैं सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखती हूं। मेरी कुछ सहेलियां हैं वह कभी-कभार मेरे घर पर आ जाती है और जब भी उनके पास समय होता है तो वह लोग मेरे घर पर बैठने आ जाया करती हैं। हमारे जितने भी रिश्तेदार हैं वह सब मुझे कहते हैं कि तुम हमारे घर पर कभी भी नहीं आती, मैं उन लोगों से कहती हूं कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता इसलिए मैं आप लोगों के घर पर नहीं आ पाती। मेरा भी कहीं जाना बंद हो चुका है, मैं अपने किसी रिश्तेदार के घर जाना बिल्कुल पसंद नहीं करती क्योंकि उन लोगों ने भी मेरा कभी साथ नहीं दिया, हमेशा ही वह लोग मेरी पीठ पीछे मेरी बहुत ही बुराई करते रहे। जब तक मेरे माता-पिता जीवित थे तब तक उन्होंने ही मुझे बहुत सपोर्ट किया लेकिन उसके अलावा मेरे कोई भी रिश्तेदार मेरे कभी काम नहीं आए इसीलिए मैंने भी उन लोगों से अब ज्यादा संपर्क करना छोड़ दिया है। वह लोग हमेशा ही मेरे बारे में गलत कहते हैं इसीलिए मैं भी उनसे मिलना ज्यादा पसंद नहीं करती। हमारे पड़ोस में सुरेश नाम का लड़का रहता है, उसका घर हमारे सामने ही है और वह कभी-कबार मेरे लड़के के साथ खेलने के लिए आ जाता है। उन दोनों की आपस में बहुत बनती है, सुरेश की उम्र 22 23 वर्ष तक है,  उसके और मेरे लड़के की बहुत जमती है। वह दोनों कंप्यूटर पर हमेशा ही गेम खेलते रहते हैं, सुरेश अभी कॉलेज की पढ़ाई कर रहा है, जब मैं उसके साथ बैठती हूं तो उसे पूछती कि तुम्हारे कॉलेज की पढ़ाई कैसी चल रही है तो वह कहता है कि मेरे कॉलेज की पढ़ाई अच्छी चल रही है।

उसे भी मेरे बारे में सब कुछ पता है। सुरेश की उम्र कम है लेकिन वह बहुत ही समझदार है, जब कभी मैं घर पर नहीं होती तो मैं सुरेश के घर पर ही अपने घर की चाबी दे जाती हूं क्योंकि उन लोगों के साथ हमारा काफी घनिष्ठ रिलेशन है। उसके माता-पिता भी बहुत अच्छे हैं और वह लोग काफी व्यावहारिक हैं। कुछ समय पहले ही सुरेश के पिताजी भी रिटायर हो चुके हैं और वह घर पर ही रहते हैं। जब भी उसकी मां को समय मिलता है तो वह भी मेरे साथ बैठने के लिए आ जाती हैं, उनकी और मेरे बीच में बहुत अच्छी दोस्ती है, वह जब मेरे साथ बैठते हैं तो हमेशा ही कहती हैं कि तुम्हारे साथ बैठ कर मुझे काफी अच्छा लगता है क्योंकि सुरेश की मां भी ज्यादा किसी के साथ नहीं बैठती, वह मेरे साथ ही कॉलोनी में  बैठना पसंद करती है। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब सुरेश की मम्मी मेरे साथ बैठ कर बात करते हैं। एक दिन मैं ऑफिस में थी और उस दिन मेरा लड़का जल्दी घर आ गया, उसका पैर फिसल गया था उसकी वजह से उसे थोड़ा बहुत चोट भी आई थी, सुरेश के पिताजी ही उसे अस्पताल ले गए थे और उन्होंने ही उसके पट्टी करवाई। जब मैं घर पर आई तो वह बिस्तर पर लेटा हुआ था और कहने लगा कि आज मेरा पैर स्लिप हो गया था जिस वजह से मुझे चोट आई और अंकल ही मुझे अस्पताल में लेकर गए।

मैंने उसे कहा कि कोई बात नहीं तुम्हारी चोट ठीक हो जाएगी तुम चिंता मत करो। मैंने अपने लड़के को दवाई दी और उसके बाद वह आराम से सोने लगा, मैं भी घर पर काम करने लगी क्योंकि अगले दिन मेरी छुट्टी थी इसीलिए मैंने सोचा आज मैं घर का काम कर लेती हूं। मैं थोड़ा बहुत साफ सफाई करने लगी और उसी बीच में सुरेश आ गया वह कहने लगा कि आप ऑफिस से कब आए, मैंने उसे कहा कि मैं ऑफिस से तो शाम के वक्त ही आ गई थी। वह उस दिन मेरे लड़के के साथ बैठा रहा और कुछ देर बाद वह कंप्यूटर में गेम खेलने लगा। मैंने सुरेश से कहा कि तुम आज अकेले ही गेम खेल रहे हो, वह कहने लगा है मैं आज अकेले ही गेम खेल रहा हूं। मैंने कहा कोई बात नहीं तुम गेम खेलो तब तक मैं थोड़ा काम कर लेती हूं। मैं आपना काम करने लगी और सुरेश गेम खेल रहा था, मेरा लड़का दूसरे रूम में लेटा हुआ था। मैं सफाई करने के बाद जब रूम में गई तो मैंने देखा सुरेश कंप्यूटर पर गेम खेल रहा है, उसके बाद मैं किचन में चली गई, और किचन का काम करने लगी। किचन का काम खत्म करने के बाद।मैं जब रूम में गई तो सुरेश कंप्यूटर पर पोर्न मूवी देख रहा था। उसने मुझे आता हुआ नहीं देखा वह बड़े ध्यान से पोर्न मूवी देख रहा था। उसने अपनी पैंट के अंदर अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ा हुआ था और वह अपना लंड हिला रहा था। मैंने उसे देख लिया और जब मैंने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा तो वह सकपका गया और डर कर उसने जल्दी से वह मूवी हटा दी। मैंने सुरेश से पूछा कि तुम यह क्या कर रहे हो। वह कहने लगा कुछ भी तो नहीं कर रहा मैंने जब उसकी पैंट के अंदर हाथ डाला तो उसका पूरा लंड खड़ा हो रखा था और मैंने उसके लंड को उसकी पैंट से बाहर निकाला तो सुरेश का 9 इंच का बहुत ही मोटा सा लंड था। मैंने उसे कहा कि तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा है मैं उसके लंड को अपने हाथों से हिलाने लगी। उसका लंड देखकर मुझसे बिल्कुल नहीं रहा गया मैंने उसकी कुर्सी को अपनी तरफ कर लिया और उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। वह मुझे कुछ भी नहीं कह पाया और उसे भी बहुत अच्छा लगने लगा। कुछ देर बाद वह मुझे कहने लगा कि आप तो बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रहे हो ऐसे तो मेरी गर्लफ्रेंड भी नहीं करती।

मैंने उसके लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया और बड़े अच्छे से सकिंग करने पर लगी हुई थी। उसे बहुत ही अच्छा लगने लगा और वह कहने लगा आप बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही है मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा कि मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है मैंने इतने दिनों बाद किसी के लंड को अपने मुंह में लिया है। जब मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा किया तो उसने भी मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया और काफी देर तक सुरेश मेरी योनि को चाटता रहा मेरी योनि से पानी का रिसाव होने लगा था और उसने अपनी जीभ से मेरे सारे तरल पदार्थ को अपने मुंह में ले लिया। जब उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे बहुत दर्द महसूस हुआ काफी समय बाद मैंने किसी की लंड अपनी योनि के अंदर लिया था। वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के दे रहा था सुरेश मुझे कहने लगा कि आंटी आपकी जवानी तो आज भी बरकरार है आपकी चूत पर एक भी बाल नहीं है आपका यौवन तो आज भी पहले जैसी ही है। मैं अपने मुंह से मादक आवाज निकल रही थी और सुरेश भी मुझे उतनी ही तेजी से चोद रहा था। उसने मुझे 15 मिनट तक बड़े ही अच्छे से चोदा और 15 मिनट बाद जैसे ही सुरेश का वीर्य मेरी योनि के अंदर गिरा तो मुझे गर्म महसूस हुआ और मैं समझ गई कि उसका माल गिर चुका है। उसने जब अपने लंड को मेरी योनि से निकाला तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ और सुरेश कहने लगा कि आपने तो मुझे बड़े ही मजे दिए है मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।

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