बहन की कमसिन दोस्त को कार के अंदर चोदा

 

hindi chudai ki kahani

मेरा नाम अरमान है और मैं पुणे का रहने वाला हूं। मेरे पापा बिल्डर है और मेरी उम्र 26 वर्ष है। मेरे पापा की वजह से मुझे कभी भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई। वह मेरी हर जरूरतों को पूरा करते हैं। जब भी मुझे कुछ आवश्यकता होती है तो वह तुरंत ही वह चीज मुझे दे देते हैं। मुझे बाइक का बहुत ही शौक है तो वह नई नई बाइक मुझे गिफ्ट कर देते हैं। मेरे पापा के पास भी बहुत सारी कार है, मुझे भी कार चलान बहुत ही अच्छा लगता है। मेरी बहन भी मेरी तरह ही है, मेरी बहन का नाम प्रियंका है हम दोनों ही कई बार लॉन्ग ड्राइव पर चले जाते हैं और काफी दिनों बाद लौटते हैं। उसे भी घूमने का बहुत शौक है और मुझे भी घूमने का बहुत शौक है। मेरी मां हमेशा मेरे पापा को कहती है कि तुम इन दोनों की कुछ ज्यादा ही जरूरतों को पूरा कर देते हो इसलिए यह दोनों बात भी नही सुनते हैं। मेरी मां का नेचर बहुत ही सख्त किस्म का है। वह कुछ भी गलत चीज बर्दाश्त नहीं करती हैं और यदि उनके सामने कुछ भी गलत हो रहा हो तो वह तुरंत ही बोल देती हैं।

मेरे पापा भी उनसे बहुत ज्यादा डरते हैं, मेरी मां ही घर में सबको डांटती है। उनके आगे हम तीनों की बोलने की हिम्मत नहीं होती इसलिए हम चुपचाप उनकी बातों को सुन लिया करते हैं। एक बार प्रियंका पापा की कार ले गई और वह कुछ ज्यादा ही स्पीड में थी तो उसका एक्सीडेंट हो गया, जब उसका एक्सीडेंट हुआ तो हम लोग बहुत ही टेंशन में हो गए हम लोग तुरंत हॉस्पिटल गए तो हमने देखा प्रियंका बहुत ही सीरियस है। पापा बहुत ही डर गए थे और वह रोने लगे। मुझे भी उन्हें देखकर रोना आ गया क्योंकि पापा प्रियंका से बहुत ही प्यार करते हैं और मेरी मां भी कहीं ना कहीं अंदर से दुखी थी लेकिन वह फिर भी अपने चेहरे पर किसी भी प्रकार से ऐसा भाव नहीं ला रही थी लेकिन उन्हें अंदर से बहुत ही तकलीफ थी। जब प्रियंका के दोस्तों को उसके ऐक्सिडेंट के बारे में पता चला तो सभी हॉस्पिटल आ गए। उसके कॉलेज के काफी सारे दोस्त उसे मिलने आए थे और वह सब हमसे पूछ रहे थे कि प्रियंका की तबीयत कैसी है तो हम बता रहे थे कि अभी डॉक्टर ने कुछ भी नहीं कहा है लेकिन हम लोग भी अंदर से डरे हुए थे। डॉक्टर से जब हमने इस बारे में पूछा तो वो कहने लगे की आप चिंता मत कीजिये, कुछ दिनों बाद वह ठीक हो जाएगी लेकिन वह बहुत ज्यादा सीरियस हो गई थी। अब धीरे-धीरे वह ठीक हो रही थी।

उसका स्वास्थ्य अब थोड़ा ठीक हो रहा था। प्रियंका कार बहुत ही ज्यादा तेज चलाती है मम्मी ने कई बार उसे इस बारे में रोका भी था पर वह फिर भी उनकी बात नहीं मानती थी और जब प्रियंका थोड़ा ठीक हो गई तो मम्मी ने पापा को बहुत ही डांटा और वो कहने लगी कि यह सब तुम्हारी ही गलती की वजह से हो रहा है यदि तुम इन्हें इतनी छूट नहीं देते तो शायद इतना बड़ा एक्सीडेंट नहीं होता। अब पापा को भी कहीं ना कहीं इस बात का बुरा लगने लगा था वह सोचने लगे कि यदि प्रियंका को कुछ हो जाता तो फिर क्या होता इसलिए वह थोड़ा सख्त हो गए थे और हम दोनों को अब वह हमेशा ही हिदायत देते रहते थे कि तुम दोनों अपनी लिमिट में रहकर ही काम किया करो। प्रियंका अब बात कर पा रही थी और पापा उसे बहुत समझा रहे थे। जब मैंने प्रियंका से पूछा कि तुम्हारा एक्सीडेंट कैसा हुआ तो वो कहने लगी कि मेरे आगे से कोई व्यक्ति आ गए थे, उन्हें बचाने की कोशिश में ही मेरा एक्सीडेंट हो गया और मेरी कार एक पेड़ से टकरा गई। प्रियंका के दोस्त अक्सर घर पर आते जाते थे क्योंकि वह प्रियंका के बारे में पूछते रहते थे और पूछते थे कि उसकी तबीयत कैसी है। उस समय हम लोग भी डरे हुए थे। मैं प्रियंका के सारे दोस्तों को जानता था क्योंकि मैं उनसे अकसर मिलता रहता था लेकिन इस बार उसकी एक नई दोस्त घर पर आई। जब प्रियंका ने मुझे उससे मिलाया तो मैं उससे मिलकर बहुत ही खुश हुआ। उसका नाम आकांक्षा था। मेरे दिल में उसे देख कर पता नहीं क्या हुआ और मैं उसे देखता ही रह गया। मैंने जब प्रियंका से उसके बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि यह मेरी सहेली आकांक्षा है यह मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी और उसके बाद फौरन चली गई।

मैं आकांक्षा की तरफ खींचा चला गया और मैंने प्रियंका से कहा कि तुम मेरी बात आकांक्षा से करवा दो। वो कहने लगी कि ठीक है मुझे थोड़ा ठीक होने दो उसके बाद मैं तुम्हारी बात आकांक्षा से करवा दूंगी। प्रियंका ठीक होने लगी और वह अब चलने फिरने लगी थी। मैं उसे अपने साथ पार्क में लेकर जाता था और वहां पर हम दोनों टहला करते थे। अब धीरे-धीरे उसकी तबीयत भी ठीक हो गई। एक दिन आकांक्षा हमारे घर पर आई और प्रियंका ने उससे मेरी बात करवाई और मैं भी उससे बात करने लगा था। मैं भी आकांक्षा को लेकर घूमने चला जाता था और हम तीनों अक्सर घूम लिया करते थे लेकिन मेरे पापा अब हम पर बहुत ही पाबंदियां लगा कर रखे थे और वो कहते थे कि तुम्हें मैंने बहुत ही ज्यादा छूट दी है इस वजह से यह सब हो रहा है इसलिए अब तुम मेरी बातों को सीरियसली लिया करो। अब हम लोग भी बहुत डर गए थे क्योंकि जबसे प्रियंका का एक्सीडेंट हुआ था उसके बाद से हम लोगों के अंदर डर बैठ गया था और कहीं ना कहीं हम लोग बहुत डर चुके थे इसी वजह से हम लोग बहुत ही कम घूमने जाते थे। हम लोग ज्यादा घूमने नहीं जाते थे हम सिर्फ कॉलेज जाते थे और कॉलेज से घर वापस आ जाते थे। आकांक्षा हमारे घर पर ही आती थी जब आकांक्षा हमारे घर पर आती तो हम लोग बैठकर काफी बातें किया करते थे और मुझे आकांक्षा के साथ समय बिताना भी अच्छा लगने लगा था। मैंने एक दिन आकांक्षा को प्रपोज कर दिया। जब मैंने उसे प्रपोज किया तो उसने हां कर दी और जब उसने हां की तो हम दोनों के बीच में अच्छा रिलेशन बन चुका था और हम लोग अक्सर घूमने चले जाया करते थे।

प्रियंका भी हमारे साथ रहती थी। अब वह हमारे घर पर कुछ ज्यादा ही आने लगी थी क्योंकि हम दोनों के बीच में रिलेशन था इसलिए वह अक्सर हमारे घर पर आ जाया करती थी और मुझे बहुत अच्छा लगता था जब वह हमारे घर आया करती थी। मुझे ऐसा लगता था कि मुझे उसके साथ और समय बिताना चाहिए। अब हम दोनों फोन पर बहुत बात किया करते थे। मुझे उससे बात करके बहुत अच्छा लग रहा था। जब से आकांक्षा मेरी लाइफ में आई तब से मेरी भी जिंदगी बहुत ज्यादा बदल गई थी। मैं भी अब अपने पापा के साथ काम पर जाने लगा था और उनका हाथ बटा दिया करता था। मेरे पापा भी बहुत खुश होते थे जब मैं उनके साथ काम पर जाया करता था और वह कहते थे कि तुम अब बहुत कुछ चीजें सीखने लगे हो। मुझे बहुत ही अच्छा लगता था जब मेरे पापा इस प्रकार से कहते थे और मुझे अपने आप खुद ही अच्छा भी लगता था क्योंकि मैं अब कुछ काम कर रहा था नहीं तो पहले मैं सिर्फ घूमता ही रहता था और मैं कुछ भी काम नहीं करता था। यह सब आकांशा की वजह से हुआ था क्योंकि जब वह मेरी जिंदगी में आई तो उसने मुझे समझाया कि तुम्हें अपनी जिंदगी में कुछ कर लेना चाहिए इसी वजह से मैंने अपने पापा के साथ काम करने का फैसला कर लिया और आकांक्षा भी जब हमारे घर पर आती तो मैं उसके साथ बहुत ही समय बिताता था और जब मुझे टाइम मिलता तो हम लोग लॉन्ग ड्राइव पर भी निकल जाते थे।

एक बार आकांक्षा को मैं लॉन्ग ड्राइव पर ले गया वह मेरे साथ बहुत ही कंफर्टेबल महसूस करती थी। उस दिन मेरा मूड कुछ ज्यादा ही उसे देख कर उत्तेजित हो रहा था और मैंने उसके हाथों को पकड़ लिया। जब मैंने उसके हाथों को पकड़ा तो वह पूरी उत्तेजना में आ गई और बहुत ही खुश हो गई।  मैंने गाड़ी को रोकते हुए एक किनारे पर खड़ा कर दिया। वह मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी जिससे कि मुझे पूरा मजा आ रहा था और  आकांक्षा को भी बड़ा ही मजा आ रहा था। जब वह मेरे लंड को चूस रही थी तो उसने मेरे पानी निकाल दिया था। मैंने भी उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया और अपनी सीट को पूरा नीचे कर दिया। मैंने जब उसकी शॉर्ट स्कर्ट को ऊपर उठाया तो उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। मैंने उसकी पैंटी को उतारते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और मैं बहुत देर से उसकी योनि को चाटे जा रहा था जिससे कि उसकी योनि से पानी निकलने लगा।

मैंने उसकी योनि के अंदर जैसे ही अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी। मैं उसे बड़ी तेजी से झटके देने लगा वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और मैं उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था। जब मैं उसे चोदता तो वह पूरे मूड में आ जाती और मैं भी उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के दिए जा रहा था। उसका शरीर गर्म होने लगा था और मेरा शरीर भी पूरा गर्म हो चुका था। उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी इसलिए मुझसे बिल्कुल भी उसकी वह गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मैंने उसके दोनों पैरो को अपने कंधे पर रखते हुए उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किया उन्हीं झटको के बीच में मेरा वीर्य पतन हो गया। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाला तो मेरे लंड पर खून लगा हुआ था। उसने अपनी चूत और मेरे लंड पर लगे माल को अपनी पैंटी से साफ कर दिया। उसकी योनि से अब भी खून टपक रहा था। हम दोनों उसके बाद अपने घर वापस चले गए। आकांक्षा भी बहुत खुश थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था हम दोनों अक्सर लॉन्ग ड्राइव पर चले जाते और या फिर हम दोनों रेस्टोरेंट में जाया करते थे।

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