भाभी की टाईट चूचीयाँ Kamukta

 

प्रेषक : देवदास …

हैल्लो दोस्तों, में जानता हूँ कि आप सबको चुदाई की कहानी काफ़ी अच्छी लगती है इसलिए तो यह साईट इतनी पॉपुलर है। में भी चुदाई की कहानी पढ़ने और चुदाई करने का काफ़ी शौकीन हूँ। में कामुकता डॉट कॉम का बहुत पुराना पाठक नहीं हूँ, लेकिन फिर भी में इस साईट को काफ़ी पसंद करने लगा हूँ। ओके चूँकि आज में पहली बार अपनी कोई घटना किसी के साथ शेयर करने जा रहा हूँ इसलिए इतना कुछ लिख रहा हूँ। मेरा नाम देवदास है और में झारखंड स्टेट के जमशेदपुर शहर में रहता हूँ। में एक शादीशुदा मर्द हूँ, लेकिन मुझे चुदाई का एक्सपीरियन्स काफ़ी समय से है, लेकिन में अपनी कोई पुरानी घटना को ना बताते हुए एक नयी घटना बताने जा रहा हूँ, जो मेरे साथ कुछ ही दिन पहले ही घटी थी।

मेरी पड़ोस की एक भाभी जिसकी उम्र लगभग 28 साल की है, वो काफ़ी खूबसूरत तो नहीं, लेकिन गोरी सेक्सी बदन की मालकिन है, उसके बूब्स 32 साईज के है, जो कि काफ़ी टाईट है। भाभी जब से शादी करके आई है मेरी नजर तब से उस पर लगी हुई थी, आज भाभी के 3 बच्चे है। फिर भी जब कभी भी में उनके बूब्स को देखता हूँ तो मेरा लंड उसको चोदने के लिए बेकरार हो जाता है। भाभी भी मुझे पसंद  करती है, लेकिन कभी मौका नहीं मिलता है कि में उसे चोद सकूँ। में अक्सर शाम के समय भाभी के घर पर ही बैठता हूँ और जब भी मौका मिलता है, तो में उसके बूब्स को दबाने लगता हूँ और कभी तो में  उसकी चूत पर अपनी उंगलियाँ भी फैर देता हूँ। लेकिन उसे चोदने का मौका मुझे 1 हप्ते पहले ही मिला था, आज में वही कहानी आप सबको बताने जा रहा हूँ की कैसे मैंने आख़िर भाभी को चोदा था?

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यह बात उन दिनों की है जब मेरी बीवी अपने मायके गयी हुई थी और मेरे मम्मी पापा भी मामा के घर गये हुए थे। अब में अकेला ही घर पर था तो में काफ़ी देर तक भाभी के साथ ही समय बिताता था। उसी दौरान भाभी की सास ने अपने बच्चो को अपने साथ लेकर गाँव जाने का प्रोग्राम बनाया। अब में काफ़ी खुश था कि अब कुछ दिनों तक तो में भाभी को अकेला पाऊंगा। अब भाभी की सास गाँव चली गयी थी, लेकिन वो भाभी की छोटी बेटी को छोड़ गयी थी। भैया बिजनसमैन है और रात के 11 बजे वापस आते है। वैसे तो भाभी की और भी देवरानियां साथ में ही रहती है, लेकिन उन सबके कमरे अलग- अलग थे। उस दिन भी में काफ़ी देर तक भाभी के साथ बैठा रहा और मौका पाकर उनके बूब्स को दबाता रहा। फिर कुछ देर के बाद वो खाना खाने के लिए गयी और में चुपके से उसके कमरे में घुस गया और एक कोने में जाकर छुप गया था। मेरी किस्मत अच्छी थी की उस रात लाईट नहीं थी। अब घर में सिर्फ एक दीपक जल रहा था। फिर कुछ देर के बाद भाभी कमरे में आई और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। अब उसकी छोटी बेटी सो चुकी थी। अब भाभी भी अपने बेड पर जाकर लेट गयी थी।

फिर थोड़ी देर के बाद में निकलकर आया और भाभी के बगल में लेट गया और उसके बूब्स को दबाने लगा था। तो तभी अचानक से उसकी आँख खुल गयी और वो डरते हुए बोली।

भाभी :- तुम, तुम कब आए? प्लीज चले जाओ, कोई जान जाएगा।

में :- (उसके मुँह पर अपना हाथ रखते हुए बोला) कोई नहीं जान पाएगा भाभी, सब सो रहे है, बस आज तो मेरी इच्छा पूरी कर दो।

भाभी :- नहीं मुझे डर लग रहा है, प्लीज तुम जाओ।

लेकिन में नहीं माना और उनके बूब्स दबाता रहा और अपने दूसरे हाथ से उसकी साड़ी को ऊपर उठा रहा था। अब भाभी मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन में उसकी साड़ी को ऊपर उठाकर उसकी चूत पर अपना एक हाथ फैरने लगा था। अब धीरे-धीरे में उसके बूब्स को उसके ब्लाउज में से बाहर निकालने लगा था और उसके एक निप्पल को अपने मुँह में डालकर चूसने लगा था। अब भाभी गर्म हो चुकी थी।  अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। अब उसकी चूत गीली हो चुकी थी। फिर तब मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा था। तभी भाभी सिसकारियाँ लेते हुए बोली कि अब चोदो ना। तब मैंने पहले उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और में भी नंगा हो गया था। अब मेरा 8 इंच का लंड भी तनकर टाईट हो गया था। तब भाभी मेरा लंड देखकर धीरे से चीख पड़ी और बोली कि बाब रे इतना बड़ा लंड, ये मेरी चूत में कैसे जाएगा?

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फिर मैंने बड़े प्यार से अपने लंड को भाभी की चूत पर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता धक्का देने लगा।   फिर जब मेरा लंड आधे से ज्यादा भाभी की चूत में चला गया। तब भाभी कहने लगी कि देव अब रोको मत, आज मेरी चूत को फाड़ दो, इतने सालों में तुम्हारे भैया कुछ भी नहीं कर सके, लेकिन आज तो बस फाड़ ही डालो मेरी चूत को। इतना सुनते ही मैंने अपनी रफ़्तार तेज कर दी। अब भाभी सिसकारियाँ ले रही थी आह, आह, ऊफ, अया, फाड़ डालो इस चूत को, अया, काफ़ी मज़ा आआहह रहा है और फिर भाभी ने मुझे ज़ोर से जकड़ लिया। अब वो झड़ चुकी थी और कहने लगी कि देव जल्दी करो, उनके आने का वक़्त हो गया है। अब में भी और ज़ोर-जोर से उसको चोदने लगा था और फिर जब मेरा भी निकलने के करीब आया तो मैंने अपनी रफ़्तार और भी तेज कर दी और अपना सारा माल भाभी की चूत के अंदर ही डाल दिया और उसके उपर लेट गया और धीरे-धीरे उसकी चूचीयों को चूसने लगा था। तब भाभी बोली कि अब और नहीं, प्लीज अब तुम जाओ, लेकिन आज जो तुमने मुझे ख़ुशी दी है में इस ख़ुशी की तलाश अब हमेशा रखूंगी, अब तो में खुद मौके की तलाश में रहूंगी कि कब तुम्हारा लंबा मोटा लंड अपनी चूत में डालवाऊँ? लेकिन अब तुम प्लीज जाओ।

फिर मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी को लंबी किस देकर अपने घर आकर सो गया। फिर उसके बाद भी हमें जब कभी भी कोई मौका मिला तो तब मैंने भाभी को कई बार चोदा ।।

धन्यवाद …

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