मस्तानी भाभी की मस्त गांड

प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, जवान औरत से सेक्स करना और औरत को चोदना हर जवान लड़के का सपना होता है और मेरा भी था की किसी मस्त जवान औरत की गांड मारी जाए और उसकी चूत में जीभ डालकर उसका रस चखा जाए। औरत की भारी-भारी कसी-कसी उठान लिए ब्लाउज में दूध से भरी चूचीयाँ हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी और आकर्षित करती और में उनको दबाने के सपनो में खो जाता कि कब ब्लाउज के बटन खोलकर उन चूचीयों को आज़ाद करूँगा? और कब ब्लाउज के हुक खोलकर ब्रा को हटाकर, दोनों चूचीयाँ अपने हाथों में लेकर्ट दबाऊंगा? और कब औरत के बूब्स, स्तन मेरे हाथों में आएँगे? कब में भी उन निपल्स को अपने मुँह में लेकर पी पाउँगा? में मौहल्ले की हर जवान, गोरी, सुंदर और प्यारी भाभी के बारे में सोचता कि यह रात को कितना मज़ा लूटवाती होगी? और लंड की सवारी कर रोज जन्नत घूमने जाती होगी। हर भाभी भी मुझसे बहुत घुली-मिली थी, उनको कभी भी कोई काम होता तो उनका यह देवर हमेशा काम करने को तैयार रहता था।

एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहाँ अपनी बीवी के साथ रहने आए। यह बात एक रात की है, मुझे गर्मी के कारण नींद नही आ रही थी तो में ऐसे ही बाहर आँगन में निकलकर आ गया। अब सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूब लाईट की रोशनी बाहर आ रही थी, क्योंकि खिड़की के काँच पर कपड़ा पड़ा था। परंतु खिड़की का एक दरवाज़ा हल्का टेढ़ा खुला था, ताकि थोड़ी हवा कमरे में आ जा सके। तो मैंने सोचा कि शायद भैया पढ़ रहे हो, फिर मैंने बस हल्के से दबे पैर पास जाकर खिड़की के नीचे से अंदर देखा तो मेरी सांस जैसे रुक गई। अब भाभी पूरी नंगी होकर पेट के बल लेटी थी और उनकी मस्त माँसल गांड ऊपर की तरफ थी।

अब भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे और साथ-साथ वो उनके चूतड़ पर भी मसाज कर रहे थे। अब भाभी धीरे-धीरे अपने मुँह से अहह सस्स्सस्स अहह की आवाज कर रही थी हमम्म्मम म्‍म्म्ममममम ऊऊ और जब भैया तेल लगाकर अपनी उंगली भाभी के चूतड़ फैलाकर उनकी गांड में अंदर घुसा डालते तो भाभी कह उठती धीरे-धीरे डालो बाबा दर्द होता है। अब भैया लुंगी पहने अपने दोनों हाथों से उनके ऊपर जाँघो पर बैठकर उनके दोनों चूतडों की मसाज कर रहे थे। अब अपनी गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी। अब भाभी के उल्टा होकर लेटने से मैंने देखा कि भैया धीरे से लेटकर पीछे से उनकी गांड में अपनी जीभ भी लगा रहे थे, जिससे भाभी आआहह ऊह करती जा रही थी। फिर भैया ने पीछे से ही भाभी के चूतडों को फैलाया, जिससे उनकी चूत भी दो फांको में बट गई और उनकी चूत के गुलाबी छेद में अपनी उंगली डाल अंदर-बाहर करने लगे।

अब भाभी को अजीब सा नशा चढ़ने लगा था, अब वो मदहोश होने लगी थी। फिर भैया धीरे से भाभी के चूतडों के नीचे आ गये और अपनी जीभ से भाभी की चूत को लप-लपकर चाटना शुरू किया। तो इससे भाभी की सिसकियाँ और साँसे और गर्म और तेज़ हो गई। फिर भाभी अपनी पीठ के बल लेट गई और भैया ने आगे वाले हिस्से की मालिश करनी शुरू की और भाभी के दोनों टांगो को फैलाकर उनकी गोरी माँसल जांघो की रगड़-रगड़कर मालिश करनी शुरू की और अपने अंगूठे से उनकी चूत के दोनों फांको की मसाज करने लगे। फिर खूब सारी अपनी थूक डालकर उनकी चूत पर लेप लगा दिया और फिर अपनी जीभ से उनकी चूत को रगड़-रगड़कर लाल कर उसके गुलाबी छेद में अपनी जीभ अंदर-बाहर करके अपनी उंगली से तेज़ी से अंदर बाहर कर उसकी चूत को गीला कर चोदने का प्रोग्राम बनाया।

अब भैया बार-बार भाभी की चूत के ठीक बीच में ऊपर उगी हुई हल्की काली, घुँगराली झांटो को भी अपने मुँह से अपने होंठो में दबाकर नोच रहे थे, जिससे भाभी को बहुत नशा छा जाता था। उनकी झांटो के नीचे चूत की सुंदरता देखते ही बनती थी, वो बड़ा ही सुहावना सीन था, जिसे देखकर मेरा लंड तनकर कुतुब मीनार सा टाईट खड़ा हो गया था और अब मेरे लंड ने चड्डी में ही अपना पानी छोड़ दिया था। अब मेरा लंड भी खड़ा होकर भाभी को चोदने का हो गया। फिर मैंने देखा कि भैया भाभी के सिर की तरफ अपनी टांगो को करके लेट गये और भाभी की चूत में अपनी जीभ डालकर उनकी चूत से खेल रहे थे और भाभी भैया का 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड पकड़कर अपनी जीभ से भैया के लंड का गुलाबी सुपाड़ा चाट रही थी। फिर थोड़ी देर में भाभी ने भैया का लंड अपने मुँह में लिया और शांति के साथ अंदर-बाहर का मज़ा देकर आह ऊओ करती रही और अपने हाथ से मज़बूती से मेरे लंड को पकड़कर पूरा खड़ा कर दिया।

फिर भैया ने भाभी की चूत को फैलाकर अपना लंड उनकी चूत के अंदर डाला, तो भैया का लंड खप की आवाज़ के साथ नर्म रेशम सी चिकनी चूत की मखमली गहराई में समा गया और फिर भैया ने अपने लंड को अंदर-बाहर करके भाभी को जन्नत की सैर करवानी शुरू की। तो फिर भाभी बोली कि अब गांड भी तो मारो। तो इतना सुनने पर भैया ने भाभी की चूत से अपने लंड को बाहर निकालकर उनकी गांड के छेद पर अपना लंड लगाकर एक धक्का मारा और उनकी गांड की धुनाई करके 3-4 मिनट में झड़ गये। अब उनके लंड से गर्म वीर्य का फव्वारा देखकर मेरा भी लंड भीग आया था, लेकिन में क्या करता? तो मुझे दबे पैर वापस आकर सोना पड़ा और बड़ी मुश्किल से मेरी रात कटी। अब मैंने भी भाभी की गांड मारने की सोच ली थी और फिर कुछ दिन के बाद मुझे भी मौका मिल गया। फिर एक दिन में अचानक से भाभी के बेडरूम में जा घुसा, तो भाभी नहाकर टावल लपेटकर बाथरूम से बाहर निकली थी तो वो मुझको देखकर समझ तो गई कि इस लड़के को मेरी चूत चाहिए, लेकिन मुस्कराकर बोली कि आज घर में कोई नहीं है, सब शादी में गये है, कल तक हम दोनों इस घर में अकेले है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने कहा कि जानता हूँ, भाभी आप बहुत सुंदर हो। तो भाभी ने मुस्कराकर कहा कि आज इतनी तारीफ क्यों? तो मैंने कहा कि वो भाभी आज मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दो। तो भाभी ने कहा कि तुम्हारी तमन्ना क्या है? अब भाभी के चेहरे पर एक कातिल हसीना वाली मुस्कुराहट थी। फिर मैंने कहा कि मुझे आपकी गांड मारनी है, सच भाभी इतनी खूबसूरत, जवान, मदमस्त, भरी-फूली हुई साँचे में ढली गांड मैंने आज तक नहीं देखी, तुम्हारी गांड इतनी माँसल है, आपकी गोरी-गोरी गांड के दर्शन करवा दो भाभी, तुम्हारी खूबसूरती की कसम ज़िंदगीभर तुम्हारा गुलाम रहूँगा और यह कहकर में उनके टावल से लिपट गया और उनको अपनी बाहों में उठा लिया। फिर भाभी को बाहों में भरने और गोद में उठाने से उनका टावल निकलकर ज़मीन पर आ गिरा और अब वो ब्रा और पेंटी में आ गई थी। अब वो हल्की गुलाबी ब्रा और पेंटी में बहुत ही मादक लग रही थी।

फिर वो मुस्कुरा उठी तो मैंने भी जल्दी से उनके होंठो को अपने होंठो में क़ैद किया और 3-4 मिनट तक उनके होंठ अपने होंठो में दबाए रखे। अब हमारी जीभ आपस में एक दूसरे से लड़ रही थी और थूक का आदान-प्रदान हो रहा था। अब में उनके होंठ चूसता तो कभी वो मेरे होंठ चूस रही थी। उनके होंठ बहुत मीठे, गुलाबी, मुलायम और गुलाब की पंखुड़ी की तरह थे। अब में उनको गोद में ऊपर उठाए था, अब उनकी दोनों गोरी जांघे मेरी कमर के इधर-उधर थी। फिर मैंने उनको बिस्तर पर लाकर लेटा दिया और उनकी मसाज करने लगा और भाभी की ब्रा खोलकर उनकी दोनों बड़ी-बड़ी चूचीयाँ पीने लगा, उनके निपल्स तो बहुत ही मीठे थे। फिर मैंने अपने अंगूठे की चुटकी बनाकर उनके निपल्स की मालिश की और फिर सक करता रहा और उनके दोनों बूब्स को अच्छी तरह से सहलाया, जिससे उनकी चूचीयाँ टाईट होकर फूलकर बड़ी हो गई और फिर उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटा, उनकी गोल गहरी नाभि महक कर बता रही थी कि भाभी कस्तूरी हिरण के समान थी।

फिर भाभी बोली कि जल्दी से मेरी पेंटी उतारो और मेरी चूत को चाटकर मेरी चूत की खुजली मिटाओ। तो मैंने भी एक होनहार देवर की तरह उनकी आज्ञा का पालन किया और बिना टाईम गँवाए अपनी जीभ से उनकी चूत की सेवा करनी शुरू दी, तो भाभी बोली कि हाए यार कितना मज़ा देते हो आअहह ऊह। अब उनको अपनी चूत की खुजली और जलन शांत करवाने में बड़ा मज़ा मिल रहा था। अब मेरी जीभ भाभी की चूत में सांप की तरफ अंदर-बाहर आ जा रही थी। अब में लप-लपकर उनकी चूत को गीला करके अपनी पूरी रफ़्तार से उनकी चूत को चाटने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उनके चूतड़ ऊपर किए और उनकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे मैंने उनकी गांड के ऊपर भी अपने प्यार का लेप लगाया। अब में उनकी चूत को अपने होंठो में दबाता, तो कभी अपनी जीभ बाहर निकालकर उनकी गांड के काले छेद पर भी थूक लगाकर हल्के से अपनी जीभ से उनकी गांड सहला देता, जिससे उनकी जवानी को एक करंट सा लगता।

अब में मेरे लंड को तैयार कर चुका था तो मैंने भाभी को कहा कि अपनी दोनों टाँगे फैला लो, ताकि तुम्हारी गांड में लंड डालने में आसानी हो और ज़ोर लगाकर एक धक्का दिया तो मेरा लंड उनकी गांड के अंदर चला गया और बड़े मजे लेकर उनकी गांड मारी। फिर में नीचे सीधा लेट गया और भाभी सामने की तरफ अपना मुँह करके मेरे लंड पर अपनी गांड टिकाकर बैठ गई। फिर मैंने उनकी गांड को चीरना शुरू किया और पीछे से अपने हाथ को आगे बढ़ाकर उनकी दोनों चूचीयाँ दबाने लगा और नीचे से उनकी गांड की धुनाई करता रहा और पीछे से उनके दोनों बूब्स की मालिश करता रहा, जिससे उनको आराम मिलता रहा। अब मेरे लंड को उनकी गांड के अंदर बाहर करने से एक अलग ही सुख मिल रहा था और साथ ही मैंने अपनी दो उंगलियों को उनकी चूत के गुलाबी छेद में अंदर डाल उनकी चूत की चुदाई भी शरू की, ताकि भाभी को दुगुना मज़ा मिल सके और वो जन्नत की सैर का भरपूर आनंद ले सके। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने मेरे लंड को उनकी गांड से बाहर खींच लिया और भाभी के बूब्स पर अपना सारा वीर्य गिरा दिया। अब में भाभी की गांड की सैर कर उनका गुलाम बन गया था, अब में आज भी उनकी गांड मारने जाता हूँ और खूब मजे लेता हूँ ।।

धन्यवाद …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *