मुँह बोली बहन की चुदाई 4 घंटे तक

प्रेषक : विजय …

हैल्लो दोस्तों, में काफ़ी दिनों से कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी कहानियां पढ़ रहा हूँ, ये कहानियाँ पढ़ पढ़कर मुझे भी लगा कि मुझे अपनी स्टोरी सबके साथ शेयर करनी चाहिए। ये एक रियल स्टोरी है इसलिए मैंने इसमें अपना और अपनी मुँह बोली बहन का नाम चेंज कर दिया है। अब में आपको ज़्यादा बोर नहीं करते हुए सीधे स्टोरी पर आता हूँ। ये आज से लगभग 2 साल पहले की बात है, मेरे गावं (इंदौर शहर से 120 किलोमीटर की दूरी पर है) में मेरे घर के सामने एक घर है, जहाँ 6 फेमिली मेम्बर्स रहते है, उस घर में लगभग एक 50 साल की औरत है, जो घर की मुखिया है, जिन्हें हम सभी बुआजी कहते है। उनके एक बेटी और एक बेटा है, उनके बेटे के दो लड़के है एक 4 साल का और एक 9 साल का है। बुआजी की बेटी का नाम सुनीता है, उसकी उम्र 26 साल थी और में तब 21 साल का था। सुनीता की शादी हो चुकी थी, लेकिन एक बदनामी के कारण उसके पति ने उसे छोड़ दिया था।

अब वो अपनी माँ के घर ही रहती थी, हमारा घर आमने सामने था, तो वो हमारे घर आती जाती रहती थी। में उसे सुन्नी दीदी कहकर बुलाता था, मेरे मन में उसके लिए कभी कोई ग़लत विचार नहीं थे, हम आपस में फ्रेंक बातें करते थे। लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी हो जाएगा, अब में बताता हूँ कि कैसे हम दोनों में सेक्स हुआ? एक दिन की बात है में बुआजी के घर था और उनके छोटे पोते के साथ मस्ती कर रहा था, इतने में सुन्नी भी वहाँ आ गई और हमारे साथ मस्ती करने लगी। अब मस्ती करते-करते में खंबे के पीछे छुप गया, तो वो भी मेरे पीछे छुपने आ गई। अब मैंने खंबे को सामने से पकड़ा हुआ था, तो वो उल्टी आकर उसने मेरी पीठ से अपनी पीठ लगाकर खड़ी हो गई, जिससे उसके दोनों बड़े-बड़े नितंब मेरे कूल्हों को टच कर रहे थे और वो मस्ती में अपने चूतड़ो को मेरे कूल्हों पर रब कर रही थी। अब मुझे अजीब सी फिलिंग होने लगी थी, अब में समझ गया था कि ये मुझसे चुदवाना चाहती है, लेकिन में बहुत शर्मीला था तो में कुछ कर नहीं पाया।

अब मेरा उसे देखने का नज़रिया बदलने लगा था, अब में उसके बारे में सोच-सोचकर रोज मुठ मारने लगा था। अब सुन्नी भी मुझे अलग नज़र से देखती थी, लेकिन में डरपोक था अब मेरी उससे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई थी। फिर एक दिन शाम के तकरीबन 8 बजे की बात है में, मेरे अंकल का लड़का, और सुनीता तीनों पड़ोस की एक भाभी के घर पर बैठे थे, जब सर्दियों का मौसम था तो सोने के लिए भाभी ने पहले से ही बिस्तर लगा रखे थे। अब में और मेरे अंकल का लड़का एक पलंग पर बैठे थे और सुनीता दूसरे पलंग पर लेटी हुई थी। क्योंकि हम लोग एक दूसरे से काफ़ी फ्रेंक थे, तो में उठकर सुनीता के पलंग पर चला गया। अब हम दोनों चादर ओढ़कर लेटे-लेटे बातें करने लगे थे।

अब सुनीता के बगल में सोने से मुझे वो काफ़ी गर्म लग रही थी। तो मैंने बिना कुछ कहे अपनी एक टाँग उसके पैरो पर रख दी और अपना एक हाथ उसके पेट पर रखकर अपनी उंगली चलाने लगा और उससे चिपककर सो गया। अब हमने चादर ओढ़ रखी थी इसलिए किसी को हम पर शक भी नहीं हुआ था। अब 1-2 घंटे तक हम लोग ऐसे ही बातें करते रहे, फिर ज़्यादा रात होने को आई तो हम अपने- अपने घर चले गये। अब सुनीता और मेरे बीच में इतना सब कुछ होने के बाद भी मेरी आगे बात बढ़ाने की हिम्मत नहीं हुई। लेकिन में जो चाहता था, वो सुनीता ने ही कर दिखाया था। फिर उसने मेरे अंकल के लड़के को एक मैसेज देकर मेरे पास भेजा, तो उसने कहा कि सुनीता दीदी ने तुझे बुलाया है। तो मैंने कहा कि कहाँ बुलाया? तो उसने कहा कि उनके घर पर। तो मैंने कहा कि ठीक है और में अपने घर से खाना खाकर लगभग 10 बजे रात को सुनीता के घर गया तो सब लोग अलाव लगाकर ताप रहे थे, क्योकि गावं में लोग जल्दी नहीं सोते और ठंड में ऐसे ही अलाव में तापते है।

अब आधी रात तक में गया तो में कुछ देर तक अलाव के पास बैठा रहा। फिर मैंने बुआजी से पूछा कि सुनीता दीदी कहाँ है? तो उन्होंने कहाँ कि घर में अंदर चूल्‍हे के पास ताप रही है। फिर में अंदर गया तो सुनीता अकेले चूल्‍हे में ताप रही थी। अब में भी उसके बाजू में जाकर तापने लगा और पूछा कि क्यों बुलाया? तो उसने कहा कि कल शाम को भाभी के घर तुम क्या कर रहे थे? अब ये सुनकर तो में डर गया था, पता नहीं अब ये क्या कहने वाली है? फिर मैंने कहा कि कुछ भी तो नहीं। फिर सुनीता ने ही कहा कि तुम मेरे पेट पर अपना हाथ फैर रहे थे और मुझसे चिपक भी रहे थे, तुम मेरे साथ क्या करना चाहते थे? अब वो इतना खुलकर बोल रही थी। लेकिन फिर भी मेरी गांड फट रही थी, अब में कुछ नहीं बोल रहा था। फिर सुनीता ने फिर से पूछा कि बोलो क्या करना चाहते हो? लेकिन में कुछ बोल नहीं पा रहा था। अब में सोच रहा था कि में क्या कहूँ? कैसे कहूँ? क्योंकि मैंने कभी किसी लड़की को आज तक नहीं चोदा था और ना ही किसी को प्रपोज किया था।

फिर से सुनीता ने कहा कि ऐसे चुप रहने से काम नहीं चलेगा, कुछ तो बोलो क्या करना चाहते हो? फिर में कुछ देर तक सोचता रहा और जब में कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पाया तो मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और एक लंबी लिप लॉक किस कर दिया। फिर मैंने कहा कि बस अब ठीक है। तो सुनीता बोली कि बस इतना ही करना था और कुछ नहीं। तो मैंने कहा कि करना तो है, लेकिन यहाँ तो सब लोग बैठे है। तो फिर उसने कहा कि कल सब लोग खेत में चले जाएगे और में बीमारी का बहाना बनाकर घर पर ही रहूँगी, तो तुम दोपहर में घर आना और गावं में भी कोई नहीं रहेगा, क्योंकि गावं में दिन में लोग ज़्यादातर खेत में चले जाते है। फिर में घर जाकर सो गया, लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी, क्योंकि अब मुझे कल का बेसब्री से इंतजार था।

मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था तो सोचा कि कल कैसे करूँगा? तो मैंने मेरे मोबाइल में कुछ ब्लू फिल्म डाउनलोड कर ली और उन्हें देखकर कल की तैयारी करने लगा और मुठ मारकर सो गया। फिर अगले दिन सुबह उठा और उठकर नाश्ता करके दोपहर का इंतजार करने लगा। अब दोपहर भी हो गई थी, फिर मैंने जल्दी से खाना खाया और सुनीता के घर चला गया। तो मैंने देखा कि वहाँ कोई नहीं था, फिर में वापस आने लगा, तो वो मुझे सामने से आते हुए मिली। फिर मैंने पूछा कि कहाँ गई थी? तो वो बोली कि भाभी के घर गई थी। फिर मैंने पूछा कि घर पर कोई है तो नहीं, तो उसने कहा कि कोई नहीं है। फिर हम जल्दी से अंदर गये और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। फिर जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया, में तो भूखे कुत्ते की तरह उस पर टूट पड़ा और उसके होंठो, गालों, गर्दन सब जगह खूब किस करने लगा, उसने साड़ी पहन रखी थी। फिर उसने कहा कि थोड़ा रूको तो सही में बिस्तर लगा लेती हूँ, हमारे पास 4 घंटे है हम खूब मजे से करेगें, तो मैंने कहा कि ठीक है।

फिर उसने बिस्तर लगाया और फिर वो कंघी लेकर अपने बालों में कंघी करने लगी। अब मुझसे से सब्र नहीं हो रहा था, अब मेरा लंड पेंट में बहुत टाईट हो रहा था। फिर मैंने सुनीता को पीछे से जाकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके दोनों बूब्स को अपने एक-एक हाथ में पकड़कर दबाने लगा। अब मेरी पेंट में खड़ा लंड उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी गांड की दरारो में रगड़ने लगा था। फिर कुछ ही देर में मेरा पानी मेरी पेंट में ही छूट गया और फिर मैंने उसे छोड़ दिया और बेड पर आकर बैठ गया। फिर उसने कहा कि क्या हुआ? तो मैंने कहा कि मेरा काम तो हो गया। अब वो ये सुनकर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी। फिर मैंने पूछा कि तुम हंस क्यों रही हो? तो वो बोली अभी तो कुछ हुआ ही नहीं और तुम कह रहे हो कि मेरा काम हो गया। तो मैंने कहा कि हाँ यार मेरा तो पानी भी निकल गया है और मेरी अंडरवेयर भी खराब हो गई है।

अब वो ये सुनकर और ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी थी। फिर वो अपनी हंसी रोककर बोली कि लाओ में तुम्हारी अंडरवेयर धोकर सूखा देती हूँ, थोड़ी देर में सूख जाएगी और में तुम्हें सीखा भी दूँगी कि चुदाई कैसे करते है? तो मैंने कहा कि ठीक है। लेकिन मुझे टावल दो मुझे शर्म आती है में तुम्हारे सामने अपनी अंडरवेयर कैसे निकालूं? फिर उसने कहा कि ठीक है मेरे भोले राजा और मुझे टावल दिया। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसे धोने के लिए अपनी अंडरवेयर दे दी। फिर उसने मेरी अंडरवेयर धोकर सूखा दी और मेरे पास बिस्तर पर आ गई। फिर मैंने पूछा कि तुम भी तो अपने कपड़े उतारो। तो उसने कहा कि सच में तुम मेरे भोले राजा हो, तुम्हें चुदाई के बारे में कुछ भी पता नहीं है। फिर वो बोली कि तुम पहली बार कर रहे हो ना इसलिए जल्दी से तुम्हारा पानी निकल गया, अब में कहती हूँ वैसा करो, तो मैंने कहा कि ठीक है।

फिर सुनीता ने कहा कि तुम्हें मुझे पूरी नंगी करना है, लेकिन एक-एक कपड़े और आराम-आराम से उतारकर समझे। अब में समझ गया था, क्योंकि मैंने ब्लू फ़िल्मो में देखा था। फिर सुनीता ने कहा कि पहले साड़ी से शुरू करो, तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर मैंने धीरे-धीरे करके सुनीता की साड़ी निकालकर फेंक दी। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी, अब में उसके बूब्स देखकर उसके ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा था। अब वो अपनी गर्दन ऊपर करके लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। फिर मैंने उसका ब्लाउज भी खोल दिया, अब ब्लाउज खोलते ही उसके गोरे-गोरे बूब्स बाहर आ गये। अब में आपको बता दूँ कि गावं में लेडीस ब्रा और पेंटी नहीं पहनती थी। अब में पहले सुनीता के एक बूब्स को अपने मुँह में लेकर पीने लगा था और दूसरे बूब्स को अपने एक हाथ से टाईट दबाने लगा था। अब वो मदहोश होती जा रही थी और मेरी पीठ पर अपना हाथ फैरती जा रही थी।

फिर मैंने सुनीता को बिस्तर पर गिरा दिया और उसका पेटीकोट भी उतार दिया। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने बिस्तर पर अपनी आँखे बंद किए हुए सीधी लेटी हुई थी। फिर मैंने भी अपना टावल निकाल फेंका, अब में भी पूरा नंगा हो गया था। अब में उसकी क्लीन शेव चूत को देखता ही रह गया था, जिसमें से हल्का-हल्का भूरे कलर का पानी बह रहा था। अब में भी उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठो पर अपने होंठ लगाकर किस करने लगा और सुनीता के बूब्स भी दबा रहा था। अब इतनी देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और हल्का-हल्का पानी छोड़ने लगा था। अब में लगातार सुनीता के बूब्स दबाए जा रहा था और उसे किस भी किए जा रहा था। लेकिन अभी तक सुनीता ने अपनी आँखे नहीं खोली थी। फिर उसने धीरे से अपने हाथ में मेरे लंड को पकड़ा, वैसे मुझे बहुत ही असीम आनंद मिला था। फिर सुनीता ने मेरे लंड को कुछ देर तक अपने हाथ में लेकर मसला। फिर सुनीता अपनी दोनों टांगे चौड़ी करके मेरे लंड को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी। लेकिन मेरे लंड का टोपा ही अंदर जा रहा था और बाकी का लंड बाहर ही था।

अब चूत और लंड का इतना ही स्पर्श हुआ था, जो कि मेरा पहला अनुभव था मुझे मजा आ गया था, जिसे में यहाँ लिखकर नहीं बता सकता हूँ। फिर में सुनीता के ऊपर से हटकर उसकी दोनों जाँघो के बीच में आ गया और उसकी जाँघो को थोड़ा और फैलाया और फिर अपने लंड को सुनीता की चूत में ऊपर नीचे करके अपना आधा लंड घुसा ही दिया, क्योंकि वो वर्जिन नहीं थी। फिर उसकी दोनों टांगो को चौड़ा करके अपने लंड को सुनीता की चूत में घुसाकर उसके ऊपर लेटकर अपने दोनों हाथों को उसकी कांख के नीचे से उसके कंधो को पकड़कर अपने लंड से सुनीता की चूत में एक जोरदार धक्का मारा। जिससे मेरा पूरा का पूरा लंड सुनीता की चूत में पच की आवाज़ के साथ घुस गया। जिससे सुनीता की ज़ोर से चीख निकल गई और अब उसकी आँखो में आँसू आ गये थे, वो वर्जिन तो नहीं थी, लेकिन वो काफ़ी दिनों से चुदी नहीं थी इसलिए वो एकदम से चिल्ला उठी थी।

अब मुझे भी मेरे लंड में थोड़ा दर्द हुआ, फिर क्या था? जैसे ही सुनीता की चूत में मेरा पूरा लंड घुसा तो अब में धक्के पे धक्के मारे जा रहा था और सुनीता दर्द से कराह रही थी। अब मुझे उसकी कराहने की आवाज सुनकर और जोश आ रहा था और में और तेज़ी से उसे चोदने लगा था। अब में उसे गपागप चोदे जा रहा था और सुनीता अहहाआह अहहह आहे भरती जा रही थी। फिर करीब 20 मिनट तक लगातार धक्के मारने के बाद में सुनीता की चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया। अब वो भी दो बार झड़ चुकी थी, अब उसने मुझे कसकर अपने सीने से लगा लिया था। फिर कुछ देर तक सुनीता की चूत में लंड डाले ही हम दोनों चिपकर सोए रहे। फिर हम दोनों ने उठकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए और फिर में अपने घर आ गया। तो दोस्तों ये मेरी पहली रियल चुदाई की कहानी थी, अब में आपको मेरी अगली कहानी में बताऊंगा कि कैसे मैंने सुनीता के साथ ब्लू फ़िल्मो वाली स्टाइल में और खेतों में सेक्स किया? और बहुत इन्जॉय किया।

धन्यवाद …

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