लडके ने चुदाई करके अदभुत हौसला दिखाया

antarvasna, hindi sex story हेल्लो दोस्तों, मुझे आप लोग एक आम बन्दे के रूप में पहचान सकते है | इस दुनिया में हम सब आम लोग है लेकिन जब हम कोई अदभुत कार्य करते है तब हमे एक दर्जा मिलता है | चलिए अब मैं आपको अपने विषय में कुछ सुनाता हूँ जिससे आप मुझे अदभुत का दर्जा दे सकते है | मैं जिस आफिस में कार्य करता हूँ वहा पर पड़ोस में एक लड़की रहती है | मैं आफिस में कार्य करते हुए उस लड़की को बाहर टहलते हुए देखा करता था | मैं उस लड़की को देखने के लिए अपने आफिस के दिए गए कार्य को जल्द से पूरा कर लेता था ताकि खाली वक्त में उस लड़की को देख सकूँ | वह आफिस मेरे दादा के मित्र का है जहाँ पर मैं कार्य करता था | आफिस में जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करने के वजह से मुझे आफिस का सबसे बड़े कार्यकर्ता के रूप में चुन लिया गया था | मैं अपने उस औहदे पर गर्व करता था | मुझे अपनी प्रतिभा पर पूरा भरोसा था | मैं ने इससे पहेले और अन्य आफिस में भी कार्य किया है | मैं  जहा भी कार्य करता हूँ लोग मेरी कार्य कुशलता पर गर्व करते है | मैं  भी अपनी प्रतिभा को बढाने के लिए प्रयास करता रहता हूँ | एक दिन मुझ पर खुस हो कर आफिस के मालिक ने मुझे एक बड़ा इनाम दिया | इनाम बहुत मूल्यवान और महेंगा था | उस मूल्यवान इनाम को पाकर मैंने अपने मालिक को धन्यवाद दिया |

मेरे मालिक आफिस की जिम्मेदारी मुझे देकर बाहर चले जाते थे | मैंने करीब एक साल में ही उन्नत्ति का शिखर पा लिया था | शुरुआत में मुझे एक सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था लेकिन जब मेरी निपुनता और कार्यकुशलता को देखा गया तो मुझे बड़े औहदे पर रखा गया | मैंने भी अपने औहदे का भार उठाने का फैसला किया और कार्यकुशलता को निखारते हुए सारे कार्यो को सरलता से करने लगा | अब आफिस के मालिक के बाद मेरे पास आफिस का हेड होने का अधिकार है | अन्य लोग मेरे अनुसार कार्य करते है | उन्हे मैं कार्य सौप देता हूँ और वो सारे लोग कार्य को वक्त में पुरे करने में लगे रहते है | मेरा आफिस का समय 10 बजे से 6 बजे तक का था | मैं  सब से पहेले आफिस में आया करता था और सबसे आखरी में जाता था | रात में आखरी तक दरवान रहता था उसे आफिस को ताला लगाने के कार्य सौप देता था |

मेरी एक आदत है सुबह उठकर मै टहलने के लिए जाता था | टहलकर आने के बाद में नाहाता हूँ | उसके बाद मैं ही अपने लिए सुबह का खाना बनाता हूँ | मैं रोजी रोटी कमाने के लिए बाहर से आया हूँ इसलिए मैं एक किराये के कमरे में रहता हूँ | किराये का खर्च और अन्य खर्च के लिए मुझे आफिस में शानदार प्रदर्शन करना पडता है | मैं अपने आफिस में अन्य लोगो के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हूँ | सुबह उस लड़की को देखने के लिए मैं आफिस में आट बजे आ जाया करता था | जब 6 बजे सब चले जाते थे तब दरवान ही सिर्फ रहता था  | 6 बजे के बाद मैं  उस लड़की को देखा करता था |

जब वो लडकी मुझ से पट गयी थी तब मैं ने उस लडकी को चोदा था तब पहले मैं ने उस लडकी के लोवर और टी शर्ट को उतारा | जब मैंने उस लडकी के कपडे पूरे उतार दिए तब उस लडकी ने सिर्फ चड्डी पहना हुआ था | उसके दूध झूल रहे थे और मैं उसके दूध को पकड़ रहा था | उसके बाद मैंने उस लडकी के झाट के बाल को पकड़ा | उसके बाद मैंने झाट के बालों को हटाया और उसके बाद मैंने अपना लंड उस लडकी के चूत के अन्दर डाल दिया | जब मेरे लंड के अन्दर गर्मी बड रही थी तब मेरे लंड से रफ़्तार निकल रही थी और मैं उस लड़की की चूत का भरता बनाने में लगा था | वो चिला रही थी बस करो पर मैं उसे पलता जा रहा था | उसके बाद मैंने उसके भोसड़े में अपना लंड अन्दर तक पेला और जब मज़ा नही आया तो उसे घोड़ी बना दिया और उसकी चूत छोड़ के उसकी गांड की तरफ बढ़ गया |

जैसे ही मैंने उसकी गांड के अन्दर थोडा सा लंड घुसाया वो चीखने लगी क्यूंकि उसे दर्द हो रहा था | पर मैंने उससे कहा थोडा सह लो मज़ा आएगा | उसने मेरी बात मानली और मैंने उसकी गांड को हलके हलके मारना शुरू किया | कुछ देर दर्द हुआ पर उसके बाद उसे भी मज़ा आने लगा | वो मुझे और चोदने को कहने लगी | मैं भी उसे चोदते हुए थक रहा था पर मेरा लंड था कि मुट्ठ निकालने का नाम ही नही ले रहा था | काफी देर की चुदाई के बाद मेरा माल निकला जो उसकी गांड के अन्दर ही भर गया |

उसके बाद हम दोनों लेट गए और उसने मेरे लंड को चूसना जारी रखा | पर मेरा लंड शांत चूका था |

मेरे मालिक ने आफिस में किसे रखना है और कैसे कार्य करवाना है सब मुझ पर सौप दिया था जिसका फायदा चुदाई से मिला | वह लड़की रोज नहीं आती थी क्योकि उसे सरकारी नौकरी की तयारी करनी थी | मैंने उस लड़की को एक तरह से फालतू में ही नौकरी पर रखा था | इसलिए उसके आने और न आने से मुझे कोई फर्क नहीं पडता था |  मेरे पास उस लड़की का नम्बर था लेकिन मैं  उसे फोन नही लगाता था | वो जब नहीं आती थी तब छुट्टी मांगने के लिए मुझे फोन करती थी और मैं  उस पर बिना दबाव डाला उसे छुट्टी दे देता था | लेकिन उसे एक सुजाव भी दिया करता था अगर तुम्हारे पास वक्त नही हो तो सिर्फ एक घंटे के लिए आफिस में आकर भी कार्य कर सकती हो | एक घंटे होने के बाद घर लौट सकती हो | उसके लिए एक तरह से पूरी आजादी थी | मुझे वो सुन्दर लगती थी और उससे दोस्ती करने के लिए मैं ने सब कुछ किया था | अब मुझे अगला कदम उठाना था | इसलिए मैं ने सुनीता से उस लड़की को लेकर एक गार्डन में घुमने को चलने को कहा |

सुनीता उसे लेकर गार्डन में पहुची और कुछ देर बाद मैं  गार्डन में पहुचा और हमने दुनिया भर की बाते किया | मैं ने एक दिन योजना के तहत एक पार्टी दिया ताकि वो लड़की उसके घर वालो को मेरी पार्टी में लाये और ऐसा हुआ भी | उस पड़ोस वाली लड़की ने उसके भाई और बहन को मेरी पार्टी में ले कर आई | अगले दिन वो लड़की ने पार्टी को शानदार कहा और मुझे बाधाई दिया | एक दिन मौका पाकर मैं  सुनीता के साथ उस लड़की के घर पर भी गया | उस लड़की से दोस्ती बड चुकी थी और अब मुझे उसके घर पर आने जाना का मौका मिल गया था | मैं ने उस लड़की के लिए एक आयोजन किया ताकि उसका भरोसा जीत सकू | उसकी एक छोटी सी सफलता पर मैं ने आफिस में सारे लोगो को पार्टी दिया | पार्टी में मैंने एक बड़ा खर्चा किया था सब लोग ने पार्टी का लुफ्त उठाया | आफिस में दिया गया मेरी तरफ से पार्टी ने मेरे लिए सब कुछ सरल कर दिया था | अब मुझे अवसर था कि मैं  उस लड़की से कभी भी अकेले रहकर बात कर सकता था | वो लड़की भी अकेले में मुझ से बात करने में कोई झिजक नहीं करती थी | मैं  रोजाना उस लड़की से आफिस में बात किया करता था | मेरे पास एक सुनहरा मौका था कि आगे बढकर कुछ ख़ास कर सकू | मैं ने अगली बार फिर एक पार्टी का आयोजन किया और उस पार्टी में मैंने उसके भाई से बात करने का फैसला किया | उस लड़की के भाई से मेरी दोस्ती हो चुकी थी | उसका भाई अब मेरा दोस्त था इसलिए वो भी मेरे आफिस आया करता था | मेरे तरीको ने आखिरकर मुझे सफलता दिलाई | मुझे अब कुछ नहीं करने कि आवस्यकता थी | मैंने अपने वक्त का उचित इस्तमाल तो किया इसके आलावा मुझे उचित दिशा में वक्त लगाने से उस लड़की से दोस्ती करना का मौका मिला | फिलहाल उस लड़की की शादी कही और तय हो चुकी है | उस लड़की ने शादी कर के एक बाहर वाले शहर में एक घर भी बनवा लिया |

मुझे तो सिर्फ उससे दोस्ती करना था | उस लड़की के पति से भी मेरी दोस्ती है | उसके बाद एक दिन मैं ने उस लडकी को चोदा था जब मैं  उस लडकी को चोद रहा था तब मुझे कुछ खास नही करना पड़ा मैं ने पहले अपने कपड़े को उतारा | जब मैं  नंगा था तब मैं ने उस लडकी के कपड़े के अन्दर अपने हाथ को डाला और उसकी चूत के अन्दर अपने हाथ को डालकर उसकी चूत को सहला रहा था | उसके बाद मैं ने उस लडकी के गांड में हाथ डाल और उसकी गांड के छेद अपनी उंगली को डाल दिया | उसके बाद उस लडकी ने मुझ से कहा की अब मुझे तुम्हारा लंड को दिखाओ | उस लडकी को अपना लंड दिखाने के लिए मैं ने अपने पेन्ट को खोला और अपना लंड उस लडकी को दिखाया | जब उस लडकी ने मेरा लंड देखा तो वो लडकी कहने लगी अरे बाप रे इतना लम्बा लंड | उसके बाद मैं ने अपना लंड उसकी चूत के अन्दर डाल दिया | अब उस लड़की के बच्चे भी हो चुके है | मैं  भी अब अपने कार्य में लगा रहता हूँ | उस लड़की के घरवालो ने मुझे उनका एक ख़ास समझा और हर बार शादी के मौके पर मुझे बुलाते है | मैं  आफिस में अन्य लड़कियों  को ख़ास पसंद करता हूँ लेकिन मैं  उनके लिए अभी तक कुछ ख़ास नहीं किया | अगर मेरे पास वक्त होगा तो मैं अन्य लड़कियों  के लिए भी वैसा करूंगा जैसा मैं ने उस लड़की के लिए किया था | फिलहाल मेरे आफिस में कई सारी लडकियां  है | उनके लिय जब मेरे पास वक्त होता है तो उनके लिया कुछ ख़ास आयोजन करना का फैसला भी करता हूँ |

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