वर्षा की चुदाई इंदौर में

प्रेषक : प्रताप …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम प्रताप है, में इंदौर का रहने वाला हूँ और में अभी कुछ दिन पहले ही नया नया कामुकता डॉट कॉम पर कहानियों के मज़े लेने लगा हूँ और मैंने अब तक ना जाने कितनी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लिए ऐसा करने से मेरा मन बहुत खुश हुआ। दोस्तों मुझे यह सब करना अच्छा लगने लगा और फिर दोस्तों आप लोगो की सच्ची कहानियाँ पढ़कर कुछ दिनों के बाद मेरे मन में भी एक विचार आने लगा कि मुझे भी अपनी उस सच्ची घटना को लिखकर आप तक पहुंचाकर उसके बारे में खुलकर बताना चाहिए। दोस्तों इस कहानी में अपनी लड़की के साथ हुई उसकी घटना के बारे में सुनकर बड़ा दुःख व्यक्त किया, जिसकी वजह से हमारे बीच की वो दूरी बिल्कुल खत्म हो गई और उसके बाद हम दोनों के जिस्म एक दूसरे से चिपककर उस काम को करने के लिए बेबस हो गए, जिसके बाद हम दोनों ने उस रात को पूरा पूरा मज़ा लिया। दोस्तों अपनी इस कहानी को सुनाने के बहुत सारे विचार मेरे मन में कुछ दिनों से चलते ही रहे और एक दिन मैंने बड़ी मेहनत और लगन से अपनी इस कहानी को लिखना शुरू किया, जो आज आप सभी के सामने आ चुकी है और में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी कहानी सभी पढ़ने वालों को जरुर पंसद आएगी। अब में आप सभी का समय खराब ना करते हुए अपनी आज की कहानी को सुनाना शुरू करता हूँ।

दोस्तों मेरे एक बहुत अच्छा दोस्त है और उसकी शादी कुछ साल पहले हो चुकी है, उसकी पत्नी का नाम सोना है और वो दिखने में बहुत सुंदर है, उसका गोरा भरा हुआ बदन मतलब उसमे कोई भी कमी नहीं है और उसका व्यहवार हर किसी से बात करने के वो प्यार भरा अंदाज मुझे बड़ा अच्छा लगता है। फिर मेरी उनके साथ बहुत अच्छी बनती और वो मुझे शुरू से ही अपने भाई जैसा मानती और इस वजह से में उनके घर पर हर कभी चला जाता हूँ। दोस्तों मेरा उनके साथ उठाना, बैठना, खाना पीना और बाहर घूमना फिरना लगा ही रहता था और में घर के किसी भी छोटे बड़े कामों में भी उनकी मदद किया करता। एक दिन सोना के जन्म दिन की पार्टी थी और उसने अपने बहुत सारे दोस्तों को उस पार्टी में बुलाया और में एक रात पहले से ही उनके घर पर रुककर तैयारियों में लगा हुआ था। दोस्तों हम सभी बहुत हंसी खुशी अपने अपने कामों में लगे हुए थे और मेरे उस दोस्त और उसकी पत्नी को पहले से ही पता था कि में बहुत अच्छा गाना गाता हूँ, क्योंकि में उनको पहले भी अपने गाने गाकर सुना चुका था।

फिर उस पार्टी वाले दिन शाम को भी उन दोनों के कहने पर मैंने सभी लोगों के बीच खड़ा होकर अपना एक गाना सुनाया, तब मेरे उस गाने को सुनकर वहां पर मौजूद सभी लोगों ने मेरे गाने की बड़ी तारीफ कि उनको मेरा वो गाना बड़ा पसंद आया। फिर वहीं उन लोगों में सोना की एक बहुत ही सुंदर दोस्त जिसका नाम वर्षा था, उसने मुझसे मेरे चुप हो जाने के बाद दोबारा दूसरा गाना गाने के लिए कहा और मैंने उसके आग्रह करने पर दूसरा गाना भी उन सभी को सुनाया और इस तरह से हम दोनों उसी पार्टी में एक दूसरे के साथ बातें और कुछ देर बाद हंसी मजाक करने के बाद अब हम एक दूसरे को अच्छे से समझने भी लगे थे। अब मुझे उसके साथ बातें करने पर बड़ी ही खुशी मिल रही थी, जिसका कोई ठिकाना नहीं था और वो भी मेरे साथ खुश थी और कुछ घंटो में ही हम एक दूसरे से अब ऐसे बातें कर रहे थे, जैसे हम बहुत सालों से दोस्त हो। फिर कुछ घंटे चलने के बाद हमारी वो पार्टी खत्म हो गई, जिसके बाद वहां पर आए हुए सभी लोग एक एक करके अपने अपने घर जाने लगे थे। फिर सभी लोगों के चले जाने के बाद वर्षा ने अब पूरी तरह से खुलकर मुझसे मेरे बारे में पूछा कि आप कहाँ रहते हो, क्या करते हो? और उसके अलावा उसने मेरे बारे में बहुत कुछ बातें और जानकारियां ली।

फिर मैंने भी उसको अपने बारे में सभी कुछ सही सही बता दिया, जिसको सुनकर वो बहुत खुश हुई और फिर उसके बाद मैंने भी उसके बारे में बहुत कुछ पूछा उसके बारे में सभी कुछ जान लेने के बाद, फिर हम दोनों ने आपस में एक दूसरे से अपना अपना मोबाइल नंबर का आदान प्रदान किया और फिर उसके बाद हम दोनों भी अपने अपने घर आ गये। दोस्तों मुझे उसके साथ बातें करना उसके बारे में इतना सब जान लेना बहुत अच्छा लगा और वैसे वो दिखने में सुंदर होने के साथ ही उसका रंग भी दूध जैसा सफेद, उसकी बड़ी बड़ी काली आंखे, रसभरे गुलाबी होंठ, सुराही जैसी गर्दन, मीठी सुरीली आवाज, पतली कमर, गोरे उभरे हुए बूब्स और उसका वो पूरा भरा हुआ बदन देखकर में उसकी तरफ पहली बार में ही लट्टू हो गया और देखा जाए तो उसका स्वभाव भी बड़ा ही हंसमुख था। दोस्तों मतलब देखा जाए तो उसमे कोई भी कमी नहीं थी, बात करने के तरीके से वो मुझे खुले विचारों की होने के साथ साथ किसी अच्छे घर की होने के संकेत भी दे रही थी और इसलिए में उसको देखकर पूरी तरह से उसका दीवाना हो चुका था। फिर उसके साथ पहली बार मिलकर बातें करके कुछ दिन ऐसे ही निकलते चले गए और में अपने कामों में बहुत ज्यादा व्यस्त हो गया।

अब इसलिए मुझे उसके बारे में बिल्कुल भी विचार नहीं आया, लेकिन फिर ऐसे ही अकेले बैठे कुछ बातें सोचते हुए मुझे एक दिन अचानक से वर्षा का विचार दोबारा आ गया। फिर जिसकी वजह से मेरे मन में खुशी की एक लहर दौड़ गई और मैंने तब मन ही मन में सोचा कि चलो वर्षा से फोन पर बात की जाए और यह बात सोचकर मैंने खुश होते हुए उसको फोन लगा दिया। अब मेरा मोबाईल कान पर लगा हुआ था, सामने वाली तरफ लगातार कुछ देर तक घंटी जाती रही और तभी उधर से फोन उठते ही एक बड़ी ही मधुर एक आवाज़ मेरे कानों में आई, हैल्लो जिसको सुनकर में कुछ देर तक कुछ भी नहीं बोल सका। अब में मन ही मन उत्साहित होकर बस सुनाता ही रहा और वैसे मुझे उस पागलपन की वजह से बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था कि में क्या कहूँ? फिर उधर से आवाज़ आई हेल्लो बोलिए ना आप कौन बोल रहे है? तब मैंने बड़ी धीरे से कहा कि में “प्रताप, प्रताप बोल रहा हूँ। अब वो मेरा नाम आवाज को सुनकर बोली हाँ प्रताप आज आपने मुझे कैसे याद किया? और वैसे में भी कुछ दिनों से सोच रही थी कि में तुमसे बात करूं, लेकिन में क्या करती मेरा वो पुराना वाला मोबाइल कहीं खो गया है और तुम्हारा यह नंबर उसी में था और इसलिए में बस बात करने के बारे में सोचकर ही रह जाती थी।

अब छोड़ो वो बातें यह बताओ कि तुम कैसे हो? मैंने उसको कहा कि में एकदम ठीक हूँ और तुम कैसी हो? फिर उसने भी कहा कि हाँ में भी ठीक ही हूँ और फिर कुछ देर तक इधर उधर की कुछ औपचारिक बात करके हम दोनों ने फोन को बंद कर दिया, लेकिन दोस्तों मुझे पहली बार उसके साथ मिलना और उसके बाद फोन पर बात करना इतना अच्छा लगा कि उसकी वो काया मुझे बिल्कुल दीवाना बना गई। फिर उस वजह से हम दोनों के बीच धीरे धीरे हर दिन ही फोन पर बातें होने लगी थी और उसके बाद फिर हम एक दिन में कई बार जब भी मौका मिलता फोन पर बातें करने लगे थे और फिर उसके बाद तो अब हम दोनों रातों में भी बहुत देर तक लगातार बातें करने लगे थे, क्योंकि हम दोनों को अब एक दूसरे से बात करके आवाज सुनकर रहा नहीं जाता था। अब हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आने लगे थे और फिर हम दोनों धीरे धीरे अब एक बहुत अच्छे दोस्त भी बन चुके थे और इस वजह से हम अपनी किसी भी तरह की कोई भी बातें किसी से नहीं छुपाते, सब कुछ पूरी तरह खुलकर बता देते। अब वो मुझे अपने मन का हाल सुनाती और में अपने मन की हालत उसको बता देता, ऐसा हमारे बीच कुछ महीने तक लगातार चलता रहा और उस वजह से हम दोनों बड़े खुश रहने लगे थे।

फिर एक दिन उसका मेरे पास फोन आया और वो मुझसे कहने लगी कि कल 6 फरवरी है और तुम्हे कल मेरे घर आना है। फिर उसी समय चकित होकर मैंने उसको पूछा कि क्यों क्या कोई खास बात है? जो मेरा वहां पर कल ही आना जरूरी है, में क्या कभी किसी और दिन तुमसे मिलने नहीं आ सकता? अब वर्षा मुझसे बोली कि हाँ कोई विशेष बात है बस, इसलिए तुम्हे कल आना है। तभी मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है फिर तुम मुझे आने का समय भी बता दो में कब तुमसे मिलने आऊं? वो हंसते हुए कहने लगी कि कल शाम को ठीक 6 बजे में तुम्हारा इंतजार करूँगी और तुम्हे आना ही होगा वरना तुम मुझसे दोबारा बात या मिलने की कोशिश कभी भी मत करना। अब मैंने भी हंसते हुए उसको कहा कि हाँ ठीक है, में तुम्हारे बताए ठीक समय पर जरुर आ जाऊंगा और मैंने उसको इतना कहा और उसने मुझसे बाय कहकर अपनी तरफ से फोन बंद कर दिया। दोस्तों उसके बाद में उसको दोबारा मिलने की बात अपने मन में सोच सोचकर पूरी रात खुशी से पागल हो गया और इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे रात को नींद आई। फिर उसके बाद सुबह जल्दी उठकर में नहा धोकर खुश होता हुआ तैयार हुआ और में एकदम ठीक समय पर उसके घर पर पहुंच गया, क्योंकि में पहली बार उसको मिलने जा रहा था।

अब इसलिए रास्ते से में एक फूलों का गुलदस्ता भी खरीदकर अपने साथ उसके लिए लेकर पहुंच गया। अब वो मुझे अपने घर पर देखकर बहुत खुश हुई और मेरे हाथ में वो गुलदस्ता देखकर बहुत चकित होकर वो अब मुझसे पूछने लगी क्या तुम्हे पहले से पता था कि आज मेरा जन्मदिन है? तब मैंने उसको कहा कि नहीं मुझे ऐसा कुछ भी पता नहीं था हाँ, लेकिन पहली बार किसी सुंदर लड़की ने मुझे मिलने के लिए अपने घर पर बुलाया है, उस दिन को यादगार बनाने के लिए में इसको अपने साथ में ले आया हूँ और अब मुझे यह बात जानकर भी बहुत खुशी है कि आज तुम्हारा जन्मदिन है, तुम्हे जन्मदिन मुबारक हो तुम हजारों साल जियो। अब मेरे मुहं से यह बात सुनकर हंसते हुए मुझसे धन्यवाद बोलकर उसने मेरे हाथ से वो गुलदस्ता ले लिया और मुझे अपने घर के अंदर बुला लिया। तब मुझे पता चला कि उसके घर में उसकी मम्मी, पापा और तीन भाई थे वर्षा दूसरे नंबर की थी बाकी दो उसको छोटे थे और फिर उसने मेरा परिचय अपने घर के सभी सदस्यों से करवाया, उसके घर वालों को मेरा व्यहवार बहुत अच्छा लगा। फिर देर रात तक मेरा वहां पर रुकना खाना-पीना हुआ और उसके बाद में वापस अपने घर पर आने लगा। फिर उसी समय उसकी मम्मी मुझसे बोली कि अब बहुत रात हो चुकी है और इसलिए अब तुम ऐसा करो कि आज रात यहीं पर रुक जाओ, उसके बाद तुम कल सुबह उठकर चले जाना।

अब मैंने उनको कहा कि नहीं में चला जाऊंगा, आप मेरी चिंता ना करे वैसे भी में अपनी कार से आया हूँ और इसलिए मुझे वापस जाने में कोई भी समस्या नहीं आएगी और अब में उनको इतना कहकर घर से बाहर निकल गया। फिर में अपनी कार के पास आ गया, तब मैंने देखा तो वो पंचर थी और उसके बाद मैंने स्टेपनी को देखा तो वो भी मुझे बिना हवा के मिली और अब में इतनी रात को पंचर कहाँ बनवाता और इस वजह से में हारकर वहीं पर रुक गया। फिर जब में ऊपर आया, तब तक वर्षा अपने कपड़े बदल चुकी थी और वो अब अपनी सोने की तैयारी करके सोने ही जा रही थी। अब मैंने उसके पास जाकर उसको अपनी वो सारी बात बताई और फिर उसने मुझसे कहा कि मेरी मम्मी पहले ही तुमसे कह रही थी कि आज रात यहीं पर रुक जाओ और इसलिए कहते है कि कभी भी अपने से बड़ो की बात को नहीं टालते और इस तरह से में एक रात के लिए वहीं पर रुक गया। अब उसने मेरे लिए ऊपर छत पर ही बिस्तर लगा दिया, क्योंकि वो गर्मियों की राते थी और उस दिन एकदम चाँदनी रात थी और वैसे उसके मम्मी पापा भी ऊपर छत पर ही सोते थे, वर्षा ने भी ऊपर छत पर ही अपना भी बिस्तर लगा लिया। फिर उसके बाद एक घंटे तक मेरे गाने का उसके घर के लोगों ने बड़ा आनंद लिया और फिर उसके बाद हम सभी सो गये।

फिर उसके बाद करीब 2:30 का समय होगा, अचानक से मेरी नींद खुल गई शायद वो मेरे लिए नयी नयी जगह होने की वजह से कुछ अटपटा लग रहा होगा और इसलिए मैंने करवट बदली तो देखा कि वर्षा भी उस समय जाग रही थी। अब मैंने उसको पूछा कि क्यों क्या हुआ तुम्हे भी नींद नहीं आ रही है? उसने कहा कि हाँ मुझे पता नहीं क्यों आज नींद नहीं आ रही है और फिर उसके बाद हम दोनों बातें करने लगे और तब मैंने उसको पूछा कि वर्षा क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया है? उसने कहा कि हाँ एक लड़का था जिसका नाम गौरव नाम था में उसको कुछ समय पहले बहुत चाहती थी और शायद अब तक तो हम दोनों की शादी भी हो गई होती, लेकिन मेरी किस्मत को यह मंजूर नहीं था। फिर एक बार मैंने उसके प्यार में अपने बचपन की एक हक़ीकत के बारे में उसको बता दिया और तब उसने मेरी उस बात को सुनकर मुझसे शादी के लिए साफ मना कर दिया। अब मैंने उसको पूछा कि वो ऐसी कौन सी बात थी? जिसको सुनने के बाद उसने तुम जैसी सुंदर लड़की के साथ शादी करने से साफ मना कर दिया। अब उसने मेरे ऊपर पूरा पूरा भरोसा करके अपने बचपन की वो बात मुझे बताना शुरू किया, वो बोली कि में तब बहुत छोटी थी और अपने नाना-मामा के घर पर ही रहती थी।

उनका घर बहुत बड़ा है और उस समय मेरा कमरा चोथी मंजिल पर था, लेकिन मुझे अपनी पढ़ाई के लिए नीचे बैठक वाले कमरे में हमेशा ही आना होता था। फिर पढ़ाई करते समय अक्सर में वहीं पर थककर सो जाती थी, जब रात को मेरे मामा जिन्हे घर में सभी लोग गब्बू मामा कहकर बुलाते थे, मेरी नानी उनके साथ मुझे ऊपर भेज देती। फिर मेरे वो मामा मुझे ऊपर ले जाकर मेरे कमरे में लेटा देते थे, लेकिन जब वो मुझे पकड़कर सीड़ियों से ऊपर ले जाते थे, उस समय मेरी पेंटी में अपने हाथ को डालकर वो मेरी चूत में अपनी उंगली को डाल देते थे और वो इस तरह मेरे साथ हर दिन किया करते, जिसकी वजह से मेरी चूत का आकार धीरे धीरे पहले से अब बड़ा हो गया। एक दिन सही मौका देखकर उन्होंने अपना “वो’ बाहर निकालकर मेरी चूत के मुहं पर लगा दिए, लेकिन तब तक भी मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है? हाँ लेकिन मुझे कुछ अजीब सा जरुर लग रहा था और ऐसा मेरे साथ बहुत समय तक चलता ही रहा, जिसकी वजह से मेरे बूब्स भी अब पहले से ज्यादा बाहर निकल आए थे और अब मुझे महावारी भी आने लगी थी।

एक दिन गब्बू मामा अपने काम में सफल हो गये, ऐसा सालों तक चला और अब मेरे मामा का परिवार भी बड़ा हो गया और इसलिए वो जगह अब कम पड़ने लगी थी। फिर मेरे नाना ने हम लोगों के लिए एक अलग से मकान जो मुख्य सड़क पर था, वो लेकर हमे दे दी और इसलिए हम लोग वहीं उस मकान में रहने लगे थे और कुछ समय बाद मेरे ताऊ जी का एक लड़का जिसका नाम दिनेश है वो भी अपनी पढ़ाई करने के लिए उन दिनों राजस्थान से इंदौर आ गया। अब मेरे कमरे में बहुत जगह थी और इसलिए वो भी उसी कमरे में रहने लगा और धीरे धीरे वो मेरे बहुत करीब आ गया। अब मुझे बचपन से ही ग़लत आदत पड़ चुकी थी इसलिए मुझे उसका साथ अब बहुत अच्छा लगने लगा था, वो धीरे धीरे सभी के सो जाने के बाद देर रात को मेरे बिस्तर पर आ जाता और फिर वो मुझसे चिपककर सो जाता। फिर उसके बाद वो धीरे से मेरी चूत को अपने हाथ से सहलाता और उसके बाद वो सही मौका पाकर मेरी चूत को अपनी जीभ से चूमने चाटने लगता और फिर उसके बाद वो भी अब मेरी चुदाई करने लगा था।

फिर महीने दो महीने में एक बार वो मेरी चूत के बालों को भी ब्लेड से साफ करने लगा था और एक बार जब चुदाई करते हुए कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि मेरे पेट में उसका बच्चा ठहर गया तब वो मुझे अपने साथ हॉस्पिटल ले जाकर मेरा गर्भपात भी करवाकर आ गया और हमारे बीच यह सब करीब पांच सालों तक वैसे ही चलता रहा। फिर जब उसकी पढ़ाई पूरी हुई तब वो वापस अपने घर चला गया और फिर उसके चले जाने के कुछ दिनों बाद तुम मेरी जिंदगी में आए हो। फिर मेरी यह पूरी सच्ची घटना को मेरे मुहं से सुनकर उसने मुझसे शादी करने से साफ मना कर दिया और उसने मुझसे कहा कि तुम मेरे लिए नहीं बनी हो में तुम्हे क्या समझता था और तुम क्या निकली यह बात तुम मुझे पहले बात देती तो में हमारी यह दोस्ती इतनी आगे ही नहीं बढ़ने देता। अब आज से हो सके तो तुम मुझे भुलाकर प्लीज मेरा पीछा छोड़ दो अच्छा हुआ तुमने मुझे शादी से पहले ही यह सभी बातें बता दी वरना आगे जाकर हम दोनों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती और इतना कहकर अब वर्षा मुझे यह बात बताते हुए बीच में ही रुककर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी थी।

फिर मैंने उसको कहा कि वर्षा तुम्हारे साथ अब तक जो कुछ भी हुआ है उसमे तुम्हारी कोई भी ग़लती नहीं थी, वो सब तुमने अंजाने में किया और धीरे धीरे तुम्हारी आदत पड़ी तुम्हे मज़ा आने लगा और वैसे भी नादानी में किया गया कोई भी काम हमेशा गलती ही कहलाता है और अपनी गलती को मान लेना सबसे बड़ा प्राश्चित माना जाता है, उसको कोई भी गलती या जानबूझ कर किया गया काम नहीं कह सकते। अब तुम वो सभी बातें भूलकर बस मेरी तरफ देखो में क्योंकि अब तुम्हारे साथ हूँ हमेशा हमेशा के लिए में कभी भी तुम्हे छोड़कर नहीं जाऊंगा। फिर मैंने उसको कहा कि वर्षा तुम्हारे घर वाले मुझसे तुम्हारी शादी नहीं करेंगे वरना में तुम जैसी सुंदर समझदार लड़की से शादी करके अपने आपको इस पूरी दुनिया का सबसे ज्यादा खुशनशीब इंसान समझता और फिर मैंने इतना कहकर उसी समय उठकर उसको अपने गले से लगा लिया और उसके बाद धीरे धीरे उसको मैंने अपनी बाहों में समेट लिया और उसके बाद उसको मैंने कहा कि जान में तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मुझे तुम्हारे साथ पहले क्या हुआ उस बात से कोई भी मतलब नहीं है मुझे बस तुम्हारे आज से मतलब है।

अब मेरे मुहं से यह सभी बातें सुनकर वो भी अब मुझ में पूरी तरह से सिमट गयी, मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि कब मेरे हाथ खुद ब खुद उसके बूब्स पर चलने लगे और मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड जोश में आकर तनकर खड़ा हो गया। फिर इस बात का भी मुझे पता ही नहीं पड़ा कि मेरा लंड अब मेरी पेंट से बाहर आने को एकदम तड़प रहा था। फिर कुछ देर उसके गोरे गालों, सुराही जैसी गर्दन के साथ साथ उसके गोलमटोल बड़े आकार के मुलायम बूब्स को छुकर दबाकर महसूस करने के बाद मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ती ही चली गई, क्योंकि मुझे उसकी तरफ से बिल्कुल भी विरोध जैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था और इसलिए हम दोनों मस्ती में चूर होकर वो सब करते चले गए। अब धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए मैंने उसकी सलवार में अब अपने एक हाथ को डाल दिया में कुछ देर पेंटी के ऊपर से ही उसकी उभरी हुई चूत की गरमी को महसूस करता रहा और वो जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी। अब कुछ देर बाद उसकी बैचेनी को समझकर मैंने ज्यादा देर करना बिल्कुल भी उचित नहीं समझा और उसी समय उसकी पेंटी के अंदर अपने एक हाथ को डालकर में अब उसकी चूत को सहलाने लगा।

फिर उस समय मैंने छुकर महसूस किया कि करीब बीस मिनट तक चले हमारे उस काम की वजह से वो एकदम गरम हो चुकी थी, उसकी चूत अब जोश में आकर अपना रस भी छोड़ने लगी और उसके मुहं से मुझे हल्की हल्की ऊफ्फ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह स्सीईईई की अब आवाजे भी आने लगी थी, जिससे साफ पता चलता था कि उसकी चूत पूरी तरफ से गरम होकर जोश में आकर मेरा लंड लेने के लिए तरस रही है और वो क्या दोस्तों अब तो मेरा भी बड़ा बुरा हाल था? मेरे लंड को भी कोई ठिकाना चाहिए था जो उसको शांत करके बैठा सके, लेकिन ऊपर छत पर हमारा वो काम कैसे पूरा होता वहां पर सभी लोगों के होने की वजह से हम दोनों को डर था और शायद उसने मेरे बिना कहे ही मेरे मन की बात को उसी समय सुन लिया और इसलिए उसने अब मुझे नीचे चलने का इशारा किया। अब में उसका वो इशारा समझकर मन ही मन बड़ा खुश हुआ और तुरंत ही तैयार हो गया, तब हम दोनों बिना देर किए नीचे आ गये मैंने उसके कमरे में पहुंचते ही अंदर से दरवाजा अच्छी तरह बंद कर लिया। फिर बिना एक भी पल गवाए मैंने झट से उसकी सलवार को पेंटी के साथ साथ उतार दिया, उस काम को करने में उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और फिर उसको मैंने पलंग पर एकदम सीधा लेटा दिया।

फिर उसके बाद में उसकी गीली चूत को कुछ देर अपनी प्यासी नजरों से देखने लगा, जो देखने में बड़ी ही सुंदर मेरे लंड को लेने के लिए बैचेन नजर आ रही थी और फिर उसके बाद मैंने उसके दोनों पैरों को पूरा खोलकर उसकी चूत में अपनी जीभ को लगा दिया। अब में चूत के दाने को अपनी जीभ से टटोलने लगा, मेरे ऐसा करने से वो बिल्कुल मस्त हो गयी में कुछ देर उसकी चूत को चूसता ही रहा और फिर उसके बाद मैंने उसको 69 आसन में आने के लिए कहा। फिर हम दोनों जोश में आकर बहुत देर तक एक दूसरे की चूत और लंड को चाटते, चूसते रहे ऐसा करने में हमे बड़ा मस्त मज़ा वो आनंद आ रहा था, जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता कि हम क्या और कैसा उस समय महसूस कर रहे थे? फिर मैंने उसके कुछ देर बाद उसकी प्यासी चूत में अपना लंड डाल दिया मेरे हल्के से ज़ोर लगाने से ही पूरा लंड उसकी खुली गीली चूत में बड़े आराम से फिसलता हुआ अंदर चला गया। दोस्तों यह सब इसलिए इतने आराम से हुआ क्योंकि उसकी चूत पहले भी बहुत बार लंड के मज़े ले चुकी थी और इसलिए उसको ज्यादा कुछ दर्द का सामना नहीं करना पड़ा।

अब बस वो तो चुदाई के मज़े मेरे तेज तेज धक्कों से लेने लगी थी और में ज्यादा जोश में आकर उसकी चूत में अपने लंड को जोरदार धक्के देकर ठोकता चला गया, जैसे कि में उसकी चूत पर कोई अपना पुराना गुस्सा निकाल रहा था, लेकिन कुछ भी कहो उसकी चुदाई करने में मुझे बड़ा मज़ा आया, क्योंकि उसने भी मेरा पूरा पूरा साथ दिया। अब वो मेरे हर धक्के पर अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर अपनी तरफ से धक्के देकर मेरा पूरा लंड अंदर लेने की कोशिश करती और करीब बीस मिनट की उस उठा पटक के बाद मेरा अब झड़ने का समय आ गया और उस तेज धक्कों की चुदाई में हम दोनों ही एक साथ झड़ गये। फिर तब जाकर हमारा वो जोश अब ठंडा हुआ, लेकिन तब भी में उसको हल्के हल्के धक्के देता गया और अपने वीर्य को उसकी चूत की गहराईयों में पहुंचाता गया। फिर कुछ देर बाद जाकर मेरे लंड को असली शांति मिली और वो धीरे धीरे छोटा होता हुआ अपने असली आकार में आ गया। दोस्तों मैंने अब पहले उसकी चूत की तरफ देखा वहां से हम दोनों का एक सफेद रंग का तरल प्रदार्थ एक साथ मिलकर बाहर आकर उसकी गोरी जांघ पर से नीचे टपक रहा था और वो अपने दोनों पैरों को वैसे ही फैलाकर उसको बाहर निकालती रही और में उसके बूब्स को सहलाता रहा।

दोस्तों कुछ भी कहो, लेकिन उसका वो पूरा जिस्म मुझे कहीं से भी कमजोर नहीं लगा उसने अपने शरीर के हर एक अंग को बहुत देखरेख करके अच्छी तरह सम्भाल रखा था, वो ऊपर से लेकर नीचे तक एकदम काम की देवी नजर आ रही थी और उसको मुझसे ज्यादा ही चुदाई का अनुभव भी था और इसलिए उसने ना तो ज्यादा चीखना चिल्लाना किया और चुदाई करते समय उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया। दोस्तों बस यही तो एक सबसे बड़ा फायदा होता है किसी भी अनुभवी चूत के साथ चुदाई करने पर मज़ा भी दुगना हो जाता है। फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए और एक बार फिर से एक दूसरे को कसकर बाहों में भरकर हमने चूमना शुरू किया और उसके बाद हम वापस ऊपर आ गये। फिर उसके बाद हम दोनों अपनी अपनी जगह पर जाकर सो गए, हमारी उस रात की पहली चुदाई के बारे में किसी को भी पता नहीं था। फिर दूसरे दिन सुबह में करीब सात बजे उठ गया, मैंने फ्रेश होकर चाय नाश्ता करने के बाद अपनी गाड़ी को ठीक किया और उसके बाद में उसको बाय कहकर बड़ा खुश होता हुआ वापस अपने घर चला आया, लेकिन दोस्तों हमारा यह चुदाई का सिलसिला उसके बाद बहुत समय तक वैसे ही चलता रहा। अब हम दोनों को जब भी कोई अच्छा मौका मिलता हम एक दूसरे के साथ चुदाई के मज़े लेने लगते, जिसमे हर बार वो मेरा पूरा पूरा साथ दिया करती थी ।।

धन्यवाद …

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