सुनीता के साथ पहली चुदाई

प्रेषक : राजा …

हैल्लो दोस्तों, में काफ़ी दिनों से कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी स्टोरी पढ़ रहा हूँ और इन्जॉय कर रहा हूँ। अब में आपको पहले अपने बारे बता देता हूँ। मेरा नाम राजा है, मेरी उम्र 27 साल है, मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है। यह बात उन दिनों की है, जब मेरी उम्र 18 साल थी। में अभी एक प्राइवेट जॉब में एक अच्छी पोस्ट पर हूँ। अब में आपको मेरे एक रियल सेक्स एनकाउंटर के बारे में बताने जा रहा हूँ। ये उन दिनों की बात है, जब मैंने प्राइवेट जॉब जॉइन किया ही था। अब प्राइवेट जॉब होने की वजह से मुझे किराए के हाउस में रहना पड़ा था, वो हाउसिंग बोर्ड के हाउस थे।  अपनी पोस्ट के स्टेटस के हिसाब से मुझे पूरा हाउस किराए पर लेना पड़ा था। अब ऑफिस से मुझे एक सर्वेंट मिल गया था, जो दोनों टाईम का खाना बनाता और घर की सफाई करता था।

यह बात राजस्थान के भीलवाडा डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर की है। मेरे घर के पड़ोस में एक गुप्ता फेमिली रहती थी। उनका रेस्टोरेंट का बिजनेस था इसलिए अंकल और आंटी दोनों ज़्यादातर रेस्टोरेंट पर ही रहते थे, वो कुल मिलाकर अच्छी फेमिली थी, उनके 2 बेटियाँ और 1 बेटा सोनू था। उनकी बड़ी बेटी का नाम सुनीता, उम्र 18 साल और छोटी बेटी की उम्र 16 साल और उनके लड़के की उम्र 12 साल थी। सुनीता की बॉडी बहुत सेक्सी थी, हाईट 5 फुट 6 इंच, कलर वेरी फेयर, बूब्स और कुल्हें बहुत अच्छे शेप में थे।  अब हाउस में रहने के 15 दिनों में ही वो मुझे खटकने लग गई थी। शाम के टाईम में जब वो भाई-बहन और पास के बच्चों के साथ खेलती थी, तो वो स्कर्ट और शर्ट पहनकर खेलती थी। में शाम को छत पर बैठकर उसको देखता था, उसके बूब्स और कूल्हों का मूव्मेंट देखकर मेरा 6 इंच का लंड खड़ा हो जाता था। जिसे में रात को शांत करता था। तब तक में वहाँ रहने के लिए मेंटली सेट हो गया था।

अब मुझे मौके का इन्तजार था। खैर फिर जल्दी ही मुझे मौका मिल गया। हमारे हाउस के पास एक मंदिर में भंडारा था। अब मुझे भी इन्विटेशन था। अब रात को प्रसाद वितरण के बाद लंगर का प्रोग्राम था, क्योंकि भंडारे में लंगर का भी प्रोग्राम था इसलिए प्रसाद लेने के लिए भीड़ बहुत ज़्यादा थी। अब मेरी किस्मत अच्छी थी कि सुनीता लाईन में मेरे आगे ही खड़ी थी। अब में तो फिराक में था कि किसी तरह उसकी बॉडी को मेरी बॉडी टच कर जाए। तभी भीड़ बढ़ गई और किसी ने पीछे से धक्का दिया। तो धक्के की वजह से में आगे की तरफ आ गया और सुनीता की पीठ मेरी छाती से टकराने लगी थी। अब आप समझ गये होंगे कि क्या हुआ होगा? अब मेरा लंड उसके कूल्हों के पीछे टकराने लगा था, आप मज़े की बात देखिए उसने बिल्कुल विरोध नहीं किया था और अपने कूल्हों को पीछे की तरफ कर लिया था। फिर हम करीब 1 मिनट तक इसी पोज़िशन में खड़े रहे। अब मेरा लंड तनकर रोड की तरह टाईट हो गया था। फिर उत्तेजना में मैंने पीछे से एक धक्का दिया। तब भी वो कुछ नहीं बोली, बल्कि वो आगे की तरफ झुक गई थी, जिसके कारण अब में उसके कूल्हों के बीच की दरार को एकदम साफ महसूस कर रहा था। फिर मैंने उसके चेहरे को देखा जो कि उत्तेजना की वजह से एकदम लाल हो रहा था। अब में समझ गया था कि वो एक चालू लड़की थी, जिसने अभी तक लंड का स्वाद नहीं लिया था, लेकिन वो मेरा लंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। खैर उस घटना के बाद में जब भी उसे देखता, तो वो अपनी नजरे नीची करके मुस्कुरा देती थी। अब में समझ गया था कि लाईन क्लियर है, लेकिन ऐसा कोई चान्स नहीं मिल रहा था कि में उसे चोद सकूँ, खुदा सबकी सुनता है। अब इस बीच मेरे उनकी फेमिली से अच्छे रिलेशन हो गये थे।

फिर एक दिन गुप्ता अंकल ने मुझसे सुनीता को कोचिंग पढ़ाने के कहा, यह मेरे लिए अच्छा मौका था।  तब मैंने कहा कि क्यों नहीं? मेरा भी टाईम पास हो जाया करेगा, क्योंकि ऑफिस से आने के बाद में भी बोर हो जाता हूँ। अब मैंने सुनीता को कोचिंग देना शुरू कर दिया था, लेकिन 1 हफ्ते के बाद भी में उसे सभी के लिए तैयार करने के लिए साहस नहीं उठा पाया, जो मुझे चाहिए था। फिर एक दिन जब रविवार था और उसके मम्मी, पापा रेस्टोरेंट गये हुए थे और उसके भाई बहन भी उनके साथ चले गये थे। फिर दोपहर में सुनीता मेरे घर आई और बोली कि उसे गणित में कुछ समस्या आ रही है  इसलिए अगर में उसको वो एक्सरसाईज पढ़ा सकूँ। तब मैंने कहा कि हाँ-हाँ क्यों नहीं? में भी अकेला बैठा बोर हो रहा हूँ।

फिर में सुनीता के घर चला गया। फिर वो चाय बनाकर ले आई। तो तब मैंने उससे पूछा कि अंकल, आंटी नहीं दिख रहे? तो तब उसने कहा कि आज रेस्टोरेंट की छुट्टी है इसलिए वो हमारे रिलेशन में गये हुए है। घर पर कोई नहीं है और में अकेली हूँ, वो लोग शाम को 9 बजे तक वापस आएँगे। उसने अकेली शब्द पर ज़ोर देकर कहा था। अब में समझ गया था कि इससे अच्छा मौका राजा तुझे नहीं मिलेगा। अब में उसे गणित की एक्सरसाईज पढ़ाने लगा था, लेकिन मेरी आँखें बार-बार उसके बूब्स पर अटक जाती थी। अब जब वो लिख रही थी तो तब मैंने गौर से देखा, तो उसने शर्ट के नीचे ब्रा नहीं पहन रखी थी, जबकि जब वो मेरे घर आई थी तो जहाँ तक मुझे ध्यान था उसने ब्रा पहन रखी थी। फिर मैंने इमेजिन किया कि उसने चड्डी भी उतार दी होगी। अब यह विचार मन में आते ही मेरा लंड एकदम टाईट हो गया था और मेरा पजामा फूल गया था, जिसे शायद उसने अपनी आँखों से देख लिया था। अब वो लिखते-लिखते मुस्कुरा रही थी। अब इस समय दोपहर के 12 बज रहे थे। फिर मैंने टाईम वेस्ट करना ठीक नहीं समझा, आज में किसी भी तरीके से उसको चोदने के मूड में था।

फिर आख़िर मैंने उससे पूछा कि सुनीता एक बात बताओ? उस दिन जब मंदिर में में तुम्हारे पीछे खड़ा था, तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगा ना? तो तब वो बोली कि क्यों? क्या हुआ था? तो तब मैंने कहा कि उस दिन मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी। तब सुनीता फिर से बोली कि क्यों? ऐसा क्या हो गया था? तो तब मैंने कहा कि सच बताना तुम्हें प्यारा लगा? तो तब वो चुप रही। तब मैंने फिर से कहा कि उस दिन तुम्हारी बॉडी को टच करके में बहुत उत्तेजित हो गया था, तुम सच बताना क्या तुम्हें प्यारा लगा था? तो इस बार वो गर्दन नीचे करके मुस्कुरा दी और कुछ नहीं बोली। तब मैंने कहा कि सुनीता तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, आई लव यू। तब मुझे उसका रेस्पॉन्स मिला आई लव यू टू। तो यह सुनते ही मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में ले लिया और उसकी आँखों में देखने लगा था। अब उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था।

फिर मैंने धीरे से उसके गोरे-गोरे गालों को चूम लिया, तो तब मुझे वो तैयार दिखी। फिर मैंने उसके रसीले होंठो पर अपने होंठ रख दिए और फिर में काफ़ी देर तक उसके होंठो को चूसता रहा। अब सुनीता बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी और अब वो भी मेरे होंठो को चूस रही थी। अब उसकी साँसें बहुत भारी हो रही थी। फिर बिना वक़्त खोए मैंने उसके एक बूब्स को दबा दिया, लेकिन उसका ध्यान किसिंग की तरफ ही था। फिर किस करते-करते मैंने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। अब मेरे सर्प्राइज के हिसाब से उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी तो उसको किस से हटाकर मैंने उसके दोनों बूब्स अपने हाथ में ले लिए और उससे कहा कि मैंने इतने खूबसूरत बूब्स आज तक नहीं देखे, सुनीता तुम शानदार हो और यह कहकर मैंने उसके दोनों बूब्स को मसलना चालू कर दिया। तभी सुनीता बोली कि अरे दरवाजे की कुण्डी तो लगी ही नहीं है, में दरवाजा बंद करके आती हूँ और फिर वो अपनी शर्ट के बटन बंद करके वो दरवाजा बंद करने चली गई। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब में जाते हुए उसके गोल-गोल नितंबों को देख रहा था। मैंने नहीं सोचा था कि वो इतनी आसानी से फंस जाएगी। फिर वो वापस आकर बोली कि चलो अंदर वाले रूम में चलते है। फिर अंदर वाले रूम में आते ही मैंने उसे खड़े-खड़े ही पकड़ लिया और फिर उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और पीछे से उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाकर उसके गोल-गोल चूतडों पर अपना एक हाथ फैरने लगा था। अब मेरे सर्प्राइज के हिसाब से उसने नीचे चड्डी नहीं पहन रखी थी। अब में समझ गया था कि आज वो मुझे भरपूर मज़ा देगी। फिर में उसके चूतडों की गोलाई पर अपना हाथ फैरने लगा और उन्हें दबा-दबाकर सुनीता को अपनी तरफ खींचने लगा था। अब में आज उसे अपने से चिपकाकर उसके बदन में समा जाना चाहता था। फिर मैंने उसे बेड पर पटक दिया और पागलों की तरह उसे चूमने लगा था और उसके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा था। तब वो बोली कि जरा धीरे-धीरे दबाओ, मुझे दर्द होता है।

फिर तब मैंने कहा कि मेरी रानी में कब से इस पल का इन्तजार कर रहा था? आज मुझे जी भरकर प्यार करने दो।  तब वो बोली कि मेरे राजा जी भरकर मुझे प्यार करो, में अब तुम्हारी हूँ, जी भरकर मेरी चुदाई करो। में इस चुदाई के लिए बहुत दिनों से तड़प रही हूँ। अब उसके मुँह से चुदाई शब्द सुनकर में बहुत उत्तेजित हो गया था। अब मेरा लंड पजामें को फाड़कर बाहर आने को बेताब था, लेकिन उससे पहले में उसे पूरी नंगी करके उसके पूरे शरीर को चूमना चाहता था। फिर मैंने उसकी शर्ट और स्कर्ट दोनों को उतार दिया, ओह गॉड उसका गोरा, चिकना बदन देखकर में हैरान रह गया था। उसके बूब्स एकदम टाईट तने हुए थे, उसके पिंक निपल एकदम खड़े थे। फिर मैंने उसकी जांघों की तरफ देखा एकदम केले के जैसी चिकनी, भारी-भारी जांघे देखकर में आपको बता नहीं सकता मेरा क्या हाल हो रहा था? उसकी गोरी जांघो के बीच में उसकी गोरी-गोरी चूत, काले-काले बालों से ढकी पड़ी थी। आज 7 साल के बाद भी उसके बारे में लिखते हुए मेरा लंड रोड की तरह खड़ा हो गया है और मेरी जीन्स को फाड़ देना चाहता है। अब मेरी हालत एकदम पागलों जैसी हो गई थी।

फिर मैंने पहले उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और फिर करीब 2 मिनट के बाद में उसके गोरे-गोरे, भारी-भारी बूब्स तक आया और उन्हें मसलने के बाद मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा था। अब सुनीता ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी और अब वो हल्की- हल्की सिसकारियाँ ले रही थी। फिर करीब 2 मिनट तक उसके एक बूब्स को चूसने के बाद मैंने उसके दूसरे बूब्स को भी बुरी तरह चूसा। फिर में उसकी जांघो पर आ गया और जांघो से लेकर उसके पैरों तक खूब चूमा और उसे बहुत प्यार से चूमा, चाटा। फिर इसके बाद मैंने उसे उल्टा लेटा दिया, क्या शानदार चूतड़ थे उसके? उसकी कमर से एकदम उठे हुए और क्या गजब की गोलाई थी उसके चूतड़ों में? अब में दीवानों की तरह उसके गोरे-गुदाज बदन के एक-एक अंग को चूम और चाट लेना चाहता था।

फिर मैंने उसके गोरे-गोरे, गोल-गोल चूतडों को 5-7 बार अपने दाँतों से काटा। अब सुनीता इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि वो बोली कि हाए राजा अब ना तड़पाओ, अब डाल भी दो, मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी है, जरा मेरी चूत की तरफ देखो कितना पानी छोड़ चुकी है? तो तब मैंने देखा तो सचमुच उसकी चूत के पानी से उसकी झांटो के बाल गीले हो चुके थे। फिर मैंने केवल उसकी चूत को सूँघा तो मुझे मज़ा आ गया, लेकिन अभी में उसके साथ और खेलना चाहता था। तब मैंने कहा कि सुनीता  क्या तुम मेरा लंड देखना और उसे प्यार करना नहीं चाहोगी? तो तब उसने कहा कि मुझे मालूम है  आपका लंड कितना लंबा है? में पिछले रविवार को आपके घर पर आई थी तो तब मैंने आपको हस्थमैथुन करते हुए देख लिया था, आपने आँखें बंद कर रखी थी और फिर मैंने आपको करीब 5 मिनट तक आपके रूम की साईड वाली खिड़की से देखा था। मैंने आपका वीर्य निकलते हुए भी देखा था।

फिर तभी से करीब हर रात आपके लंड के बारे में सोचकर में भी अपने सपनों में आपसे चुदवाती रही हूँ, आज मेरा वो सपना पूरा कर दो। तो तब मैंने अपना 6 इंच लम्बा लंड पजामे में से बाहर निकाला और उसके हाथ में दे दिया। तब उसने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर कहा कि अरे ये तो बहुत गर्म हो रहा है। फिर थोड़ी देर हिलाने के बाद उसने मेरे लंड के सुपाड़े पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी और फिर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर सुनीता ने अपनी आँखें बंद कर ली और मेरे लंड को अंदर बाहर करने लगी थी। अब मेरा लंड उसके मुँह में इतना टाईट हो चुका था कि उसका मुँह छोटा पड़ रहा था, लेकिन वो साली जैसे मेरे लंड को खा ही जाना चाहती थी, पता नहीं ये सब उसने कहाँ से सीखा था? अब मेरी हालत इतनी खराब हो चली थी  कि मैंने सोचा कि अब थोड़ी देर भी लगी तो में उसके मुँह में ही डिसचार्ज हो जाऊँगा और चुदाई का मज़ा लेने के लिए थोड़ा इन्तजार करना पड़ेगा। उसके घरवालो के बारे में पता लगने के बाद मैंने डिसाइड किया था कि उनके आने तक में सुनीता को कम से कम 4-5 बार चुदाई का सुख दूँगा।

फिर मैंने उसके मुँह से अपना लंड बाहर निकालकर उसको सीधा लेटाया और उसकी चूत जो कि अभी भी बहुत गीली थी, उसके मुँह पर अपने लंड का सुपाड़ा लगाया और आगे की तरफ धक्का दिया, लेकिन उसकी चूत भले ही गीली थी, लेकिन फिर भी मेरा मोटा लंड जगह ना बना सका और एक साईड को फिसल गया था। सुनीता की चूत भी बहुत टाईट थी, वो 18 साल की ही तो थी। खैर फिर मैंने अपने लंड के सुपाड़े पर अपना थूक लगाया और उसकी चूत के छेद पर रखा और उससे कहा कि सुनीता अपने बदन को टाईट कर लो और अपने दाँत भी ज़ोर से भींच लो। तब उसने ऐसा ही किया। फिर मेरे एक करारे झटके से मेरा लंड करीब 1 इंच उसकी टाईट चूत में फँस गया। तो तभी वो ज़ोर से चिल्लाई हाई  में मर गई, इसको तुरंत बाहर निकालो वरना मेरी चूत फट जाएगी। तब  मैंने उसके होंठो को अपने होंठो से दबा लिया, ताकि उसकी चीख मेरे लिए परेशानी ना खड़ी कर दे।

फिर करीब 1 मिनट तक में इसी पोज़िशन में उसके ऊपर पड़ा रहा। अब उसके मुँह से गू-गू की आवाज आ रही थी। फिर मुझे जैसे ही महसूस हुआ कि उसकी चूत रास्ता दे रही है तो तब मैंने एक और धक्का दिया तो तब मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। तब मैंने उसके मुँह से अपना मुँह हटा लिया और उससे पूछा कि सुनीता दर्द थोड़ा कम हुआ या नहीं? तो तब वो बोली कि अभी भी बहुत तेज दर्द हो रहा है, प्लीज इसे बाहर निकाल लो, मुझे नहीं करवाना। तब मैंने उसे थोड़ा इधर-उधर की बातों में उलझाया और फिर पूरे ज़ोर के धक्के के साथ मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। फिर कुछ देर तक में ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा। फिर मैंने आगे-पीछे धक्के लगाने चालू कर दिए और फिर 2 मिनट के बाद मैंने उससे पूछा कि अब कैसा लग रहा है सुनीता? तो तब वो कुछ नहीं बोली बस अपनी आँखें बंद करके पड़ी रही। अब में समझ गया था और अब उसे धीरे-धीरे मस्ती आ रही थी।

फिर करीब 2 मिनट और करने के बाद उसने भी नीचे से रेस्पॉन्स देना शुरू कर दिया और बोली कि राजा, मेरे राजा ज़ोर से करो, मेरी चूत को रगड़ डालो, तुम क्या शानदार चुदाई करते हो, आआआ, आह, उफफफफफ, बहुत मज़ा आ रहा है और तेजज़्ज़्ज्ज आह में गईईईई और उसका पूरा शरीर जैसे झंनझना गया था। अब उसने जबरदस्त पानी छोड़ा था, जिसे मैंने तब महसूस किया, जब उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और मेरे गालों गर्दन पर किस करने लगी, तो कभी काटने लगी थी। उसकी चूत इतनी टाईट थी कि मुझे लगा कि में भी उसकी चूत में ही डिसचार्ज हो जाऊँगा, लेकिन मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसे मुँह खोलने को कहा और अपना सारा माल उसके मुँह में डाल दिया, जिसे वो बड़े शौक से पी गई थी। फिर उसके घरवालों के आने तक मैंने सुनीता को 3 बार और चोदा और पूरी सावधानी रखते हुए मैंने अपना माल एक बार उसके मुँह में और 2 बार उसके बूब्स पर छोड़ा और 4 बार उसके साथ चुदाई करने के दौरान मैंने उसको अलग-अलग पोज़िशन में चोदा और आने वाले अगले सेक्स प्रोग्राम के लिए उसे एक्सपर्ट कर दिया। फिर इसके बाद भी करीब 6 महीने तक सुनीता के साथ मुझे जब भी कोई मौका मिला तो तब हम दोनों ने खूब मौज मस्ती की और यहाँ तक की मैंने उसकी गांड को भी पूरी तरह से खोल दिया था ।।

धन्यवाद …

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