Bhabhi ki train mai chudai • Hindi Sex Stories

 

Bhabhi ki train mai chudai kahani मैं गजेन्द्र सिंह राजपूत करीब 45 साल का हूँ ! मेरी ही कालोनी में मेरे ही जिले के मेरे ही राजपूत समाज के एक सज्जन नागेन्द्र सिंह रहते है ! एक ही जाति और एक ही जिला का होने के कारण घरेलु संबध बन गए ! करीब 10-12 वर्ष से एक दूसरे के घर आना जाना है ! नागेन्द्र सिंह की उम्र करीब 49 वर्ष है ! नागेन्द्र सिंह मेरे से बड़े है इस लिए उनकी पत्नी को ”भौजाई साहब” कहता हु हलकी फुलकी हँसी मजाक भी हो जाती है भाभी जी से ! भाभी जी की उम्र लगभग 43 साल के आसपास होगी,इनकी उचाई लगभग 5 फिट 6 इंच के आसपास होगी मैं इनके बगल में खड़ा हो जाता हु तो छोटा लगता हु ! मेरी हाइट रेणुका भाभी से कम है पर मैं सरीर से मोटा तगड़ा खासा सांड लगता हु भरे हुए गाल है मेरे पर मेरा रंग
काला है ! भाभी जी खुले विचारों की बहुत ही आधुनिक हसमुख और आकर्षक है ! गोरा रंग मीडियम शरीर, कुछ मोटापा लिए हुए थोड़ा सा पेट बाहर निकला हुआ है जो साड़ी में छिप जाता है ! सलवार-लेगी सूट में आज भी 34 -35 साल की लगती है ! इनको एक लड़की 23 साल की और एक लड़का 20 साल का है ! नागेन्द्र सिंह भाई साहब दुबले पतले से गाल चिपके हुए कमजोर शरीर के है जबकि भाभी जी मस्त टना टन माल रखी है ! दोनों पति पत्नी में बहुत अच्छी पटती है कभी लड़ाई झगड़ा नहीं सुना दोनों के बीच में ! दोनों खूब मस्त रहते हैं इससे लगता है की रेणुका भाभी को भरपूर लण्ड खाने को मिलता है ! जब भी रेणुका भाभी को देखता हु तो मन में एक बार जरूर ख्याल आता है चोदने का ! पर भाभी ने कभी घास नहीं डाला ! वैसे मैंने कई बार लाइन मारा रेणुका को पर रेणुका ने कोई हिंट नहीं दिया पर कभी झिड़की भी नहीं दिया इससे आशा है की कभी न कभी मौका मिल सकता है रेणुका को चोदने का ! और ये मौका मिल ही गया कैसे आगे पढ़िए …………………………………।

हुआ क्या की रेणुका भाभी होली के समय 2 मार्च 2015 को अपने गाँव जा रही थी और मैं भी गाँव जा रहा था ! भाभी रेलवे स्टेशन में अपने पति के साथ दिखाई दी, पर मैं उनके पास नहीं गया दूर से ही देखता रहा सोचा की इनके पति भी साथ जा रहे होंगे पर फिर अचानक ध्यान गया की दोनों एक साथ गाँव नहीं जाते क्योकि लड़की घर में अकेली हो जाती है (इनका लड़का दूसरे शहर में रहता है पढ़ाई करने के लिए) और दूकान अलग से बंद करनी पड़ती है ये सब याद आते ही मैं खुस हो गया और ट्रेन का इन्तजार करने लगा ! साम के 6 बजकर 25 मिनट पर ट्रेन आई और रेणुका भाभी S-6 डिब्बे में चढ़ गई उनका रिजवारवेसन था ! पर मेरा कोई प्लान नहीं था गाँव जाने का इस लिए रिजर्वेसन नहीं हो पाया तब चुपचाप जनरल डिब्बे में ही बैठ गया पर एक घंटे बाद अगले स्टेशन में जब ट्रेन रुकी तो रेणुका भाभी के डिब्बे में चढ़ गया होली के कारण जनरक डिब्बा तो क्या स्लीपर में भी भारी भीड़ थी ! बड़ी मुस्किल से खड़े होने की जगह मिली ! ट्रेन के चलने के बाद धक्के खाते खाते मैं रेणुका भाभी के पास तक पहुँच गया तो उनकी नजर मेरे ऊपर पडी और मेरी भी नजर उनके ऊपर पडी तो मैंने ”भौजाई साहब सलाम” कहा तो ओ मुस्कुराई और सिर को हलके से झुकाया और पूछ लिया ” कहा जा रहे हो डॉली के पापा ” ( डॉली मेरी लड़की का नाम है ये मुझे इसी तरह से पुकारती है) तो मैंने बताया ”गाँव जा रहा हु भौजाई साहब” तो फिर पूछी ” रिजवारवेसन क्यों नहीं कराया” तब मैंने कहा ”अचानक जाना हो रहा है” इतने में किसी ने जोर से धक्का दिया और मैं गिरते गिरते बचा तो रेणुका भाभी बोली ”आप यहाँ आकर बैठ जाइए” तब मैं रेणुका भाभी के पास जाकर बैठ गया और पूछ लिया ” भौजाई साहब आप गाँव क्यों जा रही है” तब उन्होंने जबाब दिया ”दादी शांत हो गई है उनके 13 वें में शामिल होने जा रही हूँ ! फिर बात चीत को जो शिलशिला चालू हुआ तो काफी देर तक बातें करता रहा ओ भी खूब घुल मिलकर बातें करने लगी इसके पहले कभी भी इतनी बातें नहीं किया ट्रेन में भीड़ होने की बजह से उनसे चिपक कर बैठा हुआ था उनकी नंगी बाहों का स्पर्श मात्र से ही मेरा लण्ड खड़ा हो रहा था बार बार मैंने भी टी सर्ट पहन रखी थी इसलिए मेरी बलिष्ट भुजाएं भाभी की चिकनी चिकनी

बाहों से बार बार रगड़ खाता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता , उन्हें भी अच्छा लग रहा था इस लिए ओ भी चिपक कर बैठी रही , बीच बीच में उनके साड़ी का पल्लू गिर जाता तो उनकी चूचियों की घाटियाँ साफ़ साफ़ नजर आती, जब मैं भाभी की चूचियों देखने लगता तो ओ अपना पल्लू सम्हाल लेती पर 15-20 मिनट बाद किसी न किसी बहाने ओ अपने पल्लू को गिरा देती तो बरबस ही मेरी नजर उनकी सुन्दर-सुडौल चूची की घाटियों पर पड़ने लगती ! इसी ताक झांक में रात के 9 बज गए तो रेणुका बोली ”खाना खाते है डोली के पापा” तो मैंने बोला ” आप खा लो भौजाइ साहब मुझे भूख नहीं” तो मुस्कुराते हुए बोली ” क्यों मेरी देवरानी ने ऐसा क्या खिला दिया की भूख नहीं लगी है” (हकीकत तो ये थी की मैं खाना ही नहीं लाया था) तब मैंने हँसते हुए कहा ”आपकी देवरानी इतना कहा खिलाती है की भूख नहीं लगे” और हलके से दाईं आँख को दबा दिया तो ओ मुस्कुराने लगी और बोली
”अच्छा खाना बिना भूख के भी खाने में अच्छा लगता है ” और इतनाकहकर टिफिन खोलने लगी पर सीट में भीड़ होने के कारण नहीं बना तो बोली ” मेरी सीट ऊपर की है वहीं चलकर खातें हैं” और सीट से उठ गई और अपनी ऊपर वाली सीट में चढ़ने लगी तो उनकी गोरी गोरी पाँव की पिंडलियाँ (घुटने के नीचे का भाग) दिखाई दे गई मुझे क्या मस्त चिकनी चिकनी है इनकी पिंडलियाँ, एक भी बाल नहीं , मैं तो भाभी की जांघो की कल्पना करके उत्तेजित हो गया लण्ड में तूफ़ान सा आने लगा ! रेणुका सीट पर चढ़ने के बाद बोली ”लाइए झोला दीजिये” तो मैंने उनका झोला पकड़ा दिया ! इतने में नीचे वाली सीट का मुसाफिर बोला मैं लेटूंगा तो बीच की सीट वाला उठ गया और बोला मैं सीट खोल लेता हूँ और उसने अपनी सीट खोल लिया अब बैठने की कोई जगह नहीं बची तो मैं खड़ा हो गया इतने में भाभी ने आवाज दिया ” अरे डॉली के पापा आ जाओ न दो तीन पूड़ी खा लो ” तब मैंने फिर से मना किया (हकीकत में तो मैं भाभी के पास जाने के लिए तड़प रहा था पर उतवलापना नहीं दिखाना चाहता था) तो बोली ” अरे आ जाओ इतने नखरे क्यों दिखा रहे हो” तब मैं ऊपर की सीट में चढ़ गया और सामने बैठ गया तो भाभी बोली ”लीजिये खाइये” तब मैंने कहा ” अलग से दे दीजिये” तो बोली ”क्यों मेरे साथ खा लोगे तो असुद्ध हो जाओगे क्या” तब मैं कुछ कहे बिना रेणुका की टिफिन में साथ ही खाने लगा सब्जी थी स्वादिष्ट , खाना खाते खाते 9 बजकर 30 मिनट हो गए ! रेणुका ने टिफिन को झोले में डाल दिया और बोली ”इसे नीचे रख दीजिये” तब मैं सीट के नीचे उतरा और झोले को रख दिया और खड़ा हो गया , इतने में ओ भी सीट के नीचे उतरी और बाथरूम चली गई, जाते जाते बोली ” मेरी पर्स का ध्यान रख्ने मैं आती हूँ” जब ओ वापस आई तो मैं भी बाथरूम चला गया और वापस देखा तो रेणुका बिस्तर लगाकर एक बड़ा सा पतला सा कम्बल ओढ़ कर लेट गई थी ! मैं आकर साइड वाली सीट में सज्जन के पाँव की तरफ बैठ गया तो ओ सज्जन कुछ देर बाद मुझे उठा दिया तो मैं खड़ा हो गया तब तक 10 बज चुके थे रेणुका भाभी ने मुझे खड़ा हुआ देखा तो बोली ”आप मेरी सीट पर आकर बैठ जाइए” तब मैं थोड़ी से ना नुकुर करने के बाद ऊपर की सीट में जाकर उनके पाँव की तरफ बैठ गया कुछ ही देर में सभी लाइट बंद हो गई डिब्बे में अन्धेरा छा गया ! मैं भी आँखे बंद करके बैठा रहा करीब 11 बजे तक मुझे इतने जोर से नींद लगी की मैं रेणुका भाभी के पाँव के पास ही अपने पाँव को समेट कर लेट गया तो

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