biwi ke friend ko fasaya • Hindi Sex Stories

 

Hindi Chudai ki kahani मेरी बीबी (सुचित्रा उम्र 40 वर्ष) की एक अच्छी सहेली (वन्दना उम्र 32 वर्ष) है जो मेरी ही कालोनी में कुछ दूर अपने खुद के घर में रहती है, मेरी बीबी और उसकी सहेली दोनों एक ही सरकारी ऑफिस में नौकरी करती है दोनों में खूब जमती है एक दूसरे के घर भी खूब आना जाना है ! सुचित्रा और मैं दोनों मिया बीबी प्रति रविवार को बड़ी सब्जी मंडी कार से सब्जी लेने जाते है और एक सप्ताह की सब्जी लेकर रख लेते है ये बात वन्दना को जब पता चली तो वंदना भी हमारे साथ कार में चलने लगी सब्जी लेने के लिए ! चुकि वन्दना के पति टूरिंग जॉब में है इस लिए उनका, महीने में 15 दिन तो बाहर ही निकल जाता है !

गृहस्थी का सारा साजो सामान वन्दना को ही जुटाना पड़ता है ! मैं वंदना से ज्यादातर कम ही बातें किया करता था पर वन्दना का मेरे घर आना जाना खूब लगा रहता है ! वन्दना एक बहुत ही खूबसूरत महिला है इस लिए सुचित्रा की नजरें भी मेरे ऊपर सतर्क रहती है ! मैं एक फैक्ट्री में सिफ्ट मैनेजर हु तीनो पाली में ड्यूटी करनी होती है ! मेरी उम्र करीब 45 साल है पर आज भी कड़ियल जवान रखा हु ! सब्जी लेने जाते जाते वन्दना धीरे धीरे मेरे साथ खुलने लगी , बातें करने लगी खासकर उस समय जब सुचित्रा पास में नहीं होती ! सब्जी मंडी में कई बार वन्दना का सब्जी का झोला सम्हालने में मदद करता ! इस तरह से हर रविवार को सब्जी लेने जाते जाते करीब 10 माह हो गए एक बार सब्जी मंडी में बहुत अधिक भीड़ थी उस भीड़ में एक दो बार वंदना की चूचियाँ मेरे बाह से टकरा गई तो मैंने वन्दना की तरफ देखा और सरमा गया पर वन्दना के होठो में एक सरारती मुस्कान दिखी जिसका मतलब मैं उस समय पर समझ नहीं पाया ! सब्जी मंडी में कई बार ऐसा हुआ की सब्जी का झोला भर गया तो वंदना मेरे साथ सब्जी झोला रखने चल देती और लौटते समय मेरे साथ ही सब्जी मंडी में घूमती क्योकि भीड़ में सुचित्रा को ढुढते ढुढते समय लग जाता तब तक वन्दना मेरे साथ ही घूमती इस दौरान कई बार वन्दना मेरे से अपनी चुचिया घिसते हुए पीठ चिपक जाती ! एक सन्डे को पीछे की सीट पर झोला रखते समय मैंने वंदना को किस कर लिया और चूची को दबा दिया तो वन्दना इधर उधर देखी और बोली ” क्या कर रहें है आप कोई देख लेगा” मतलब मैं समझ गया यदि कोई नहीं देखे तो चलेगा ! अब ये रोज का काम हो गया वंदना जल्दी ही सब्जी का झोला रखने चल देती तो हम दोनों पीछे की सीट में बैठ जाते और 3-4 मिनट तक एक दूसरे को किस करते-करते मैंने वंदना के ब्लाउज के नीचे से हाथ डालकर चूचियों को खिला लेता ! वंदना की चूचियाँ एक दम से बढ़िया टाइट और सुडौल है , ज़रा सा भी नहीं लटकी हुई है ! वन्दना पूरी तरह से पट चुकी थी बस चुदाई का मौका तलास रहा था और ओ मौका एक दिन मिल गया !

एक सन्डे को क्या हुआ की सुचित्रा की तबियत ठीक नहीं थी तो सुचित्रा बोली ” आज आप अकेले चले जाओ और सब्जी ले आओ,मेरी तबियत टीक नहीं है” तब मैंने कहा ”टीक है मैं चला जाऊँगा पर वन्दना को नहीं ले जाऊँगा” तब सुचित्रा बोली ”क्यों वंदना आपके ऊपर बैठ कर जाएगी या उसके जाने से पेट्रोल ज्यादा लगेगा” तब मैंने कहा ” तुम्हारे साथ उसका जाना अच्छा लगता है पर मेरे साथ जाएगी तो लोग क्या कहेंगे” तो सुचित्रा बोली ” जिस दिन लोगो को सुनने की परवाह किया उस दिन जीना दूभर हो जाएगा और आज की तो बात है” तब मैंने कहा ”ठीक है” जबकि मैं नौटंकी करने के लिए ये सब कह रहा था ! मैं जल्दी जल्दी तैयार हो रहा था की इतने में वंदना का फोन आया ओ आने के लिए पूछ रही थी तो सुचित्रा ने कह दिया तू तैयार रह आ रही हु ! और मैं जल्दी से तैयार होकर वन्दना के घर के सामने पहुंच गया उस समय सुबह के 8 बजकर 15 मिनट हो रहे थे फरवरी का महीना था नार्मल हलकी हलकी ठंडी थी मैं जैसे ही पहुंचा वंदना कार देखकर छत से जल्दी जल्दी सीढ़ी उत्तर रही थी तब मैं जल्दी से वंदना पहुंचा और बोला ”अभी तक तैयार नहीं हुई क्या” तो वंदना बोली ”आप कैसे ? दीदी कहाँ है ? ” तब मैंने वंदना को बांहों में भरते हुए किस करते हुए बोला ”आज सूचित्रा की तबियत टीक नहीं अपुन दोनों ही चलेंगे” तो वंदना मुझे किस किया और बोली ”ओके” और फिर जल्दी से कमरे के

अंदर घुस गई और कपडे बदलने लगी तो मैं भी पहुंच गया कमरे के सामने पर वंदना ने अंदर से लाक किया हुआ था दरवाजा ! जब मैंने दरवाजा खटखटाया तो बोली ” रुकिए कपडे पहन लू फिर आती हु” तब मैंने कहा ”दरवाजा तो खोलो” तो बोली ” नहीं ” मैंने कई बार कहा पर नहीं मानी और जल्दी ही कमरे से साड़ी पहन कर निकली जबकि हमेसा ही सलवार सूट पहन कर जाती थी सब्जी मंडी ! साड़ी में देखकर मैंने बोला ”वाउ क्या मस्त लगती हो साड़ी ,में” तो कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा कर रह गई और फिर बोली ”चलिए” और मैं जल्दी जल्दी सीढ़ी उत्तर कर कर में आ गया कुछ ही मिनट में वन्दना भी घर में लाक लगाकर आई और रोज की तरह कार की पीछे वाला दरवाजा खोला तो मैंने कहा ”आगे आ जाओ न” तो वन्दना ने पीछे का दरवाजा बंद करके आगे की सीट में बैठ गई और दोनों कार से चल दिए और रास्ते में मैंने वंदना से अपनी मंसा को बताया तो वंदना बोली ” छिः कितने गंदे हो आप कार में भला कैसे बनेगा” तब मैंने वंदना को पूरा प्लान बताया तो वंदना कुछ नहीं बोली !

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