chudai ki kahani

बाय्फ्रेंड के साथ होटेल मे चुदाई की

बाय्फ्रेंड के साथ होटेल मे चुदाई की


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हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम स्वाती है. मैं अपनी एक कहानी लेकर आई हू और मुझे उमीद है की आपको मेरी कहानी बहुत पसंद आएगी. मैं ज़यादा देर ना करते हुए आपको अपनी कहानी बताती हू. ये बात कुछ दिन पहले की है. मैं एक अच्छी सी कंपनी मे जॉब करती हू और मैं कभी कभी ऑफीस नही जाती हू तो मेरा काम मेरा बाय्फ्रेंड देखता है. मैं थोड़ी सेक्सी हू और गुड लुकिंग भी हू तो मेरे ऑफीस मे मेरे बहुत सारे मेल फ्रेंड्स है लेकिन मेरा एक बाय्फ्रेंड भी है जो मेरा साथ ऑफीस मे काम करता है. मुझे ऑफीस मे किसी भी क्लाइंट से बात करने के लिए रखा गया है और मैं बहुत अच्छे से किसी से भी बात करती हू इसलिए ऑफीस के लोग मुझसे दोस्ती भी करना चाहते है लेकिन मैं सबसे ज़यादा बात भी नही करती हू और मैं ऑफीस मे अपने काम से मतलब रखती हू. मेरा फिगर भी बहुत अच्छा है और कभी कभी तो कुछ लोग बातों बातों मे मेरे फिगर की तारीफ भी कर देते है.
ऑफीस वाली मस्त रीना

ऑफीस वाली मस्त रीना


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मैं सलमान देल्ही से आज एक बहुत मस्त कहानी आपके लिए ले कर आया हूँ. ये कहानी मेरे और मेरे साथ ऑफीस मे काम करने वाली रीना के बीच उसके साथ मेरे पहले सेक्स की है. ये कहानी एक दम सच्ची है, तो अब अपना लंड हाथ मे ले कर मज़ा लीजिए. मेरी उम्र 21 साल है, दिखने मे हॅंडसम और स्मार्ट हूँ. मैं एक गूवरमेंट जॉब करता हूँ. पर टाइम पास के लिए पार्ट टाइम एक मार्केट्टिंग की जॉब करता था. मैं जिस कंपनी मे काम करता था, वो कंपनी 4 प्रॉडक्ट बनाती है. जिसे मैं और मेरी टीम के कुछ मेम्बर लोगो के घर जा कर उसका डेमो देते थे. मुझे अपना ये काम बहुत अच्छा लगता था. सच कहूँ तो मैं इतने पैसे कमा लेता था, जीतने पैसे मैं अपनी गूवरमेंट जॉब से भी न्ही कमा पता था. इसलिए मुझे ये जॉब बहुत अच्छी लगती थी. धीरे धीरे मेरी कंपनी मे प्रामोसन हो गई. मुझे मेरे बॉस ने मेरा काम देख कर, मुझे कंपनी मे सेल्स मॅनेजर बना दिया. अब मैं कंप
meri biwi chudai or salhaj

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मैं अपने बीवी से सन्तुष्ट हूँ और वह मुझसे सन्तुष्ट है, हम लोगों का यौन जीवन पूर्ण रूप से सफल है, अर्थात मेरा लन्ड लगभग आठ इन्च का है और जब मैं अपनी बीवी की चुदाई करता हूँ तो जब तक वह न झड़े मेरा लन्ड अपना पानी नहीं छोड़ता है, इस वजह से वह मुझसे खुश रहती है और चुदाई में भरपूर साथ देने की वजह से मैं भी उससे खुश रहता हूँ। मेरी उम्र 38 साल है एवं मेरी बीवी 34 साल की है, हमारे तीन बच्चे हैं, कुल मिला कर हम लोग अपने आप में बेहद खुश हैं, मेरी बीवी सुन्दर है, सेक्सी है, वह थोड़ी मोटी है जिसके कारण उसके चुच्चे बड़े बड़े हैं और उसका विशाल मादक चूतड़ मानो जन्नत हैं, मादक चूतड़ एकदम गोल बड़े हैं और जब कुतिया बना कर पीछे से चूत चोदता हूँ तो मादक चूतड़ देखकर लन्ड तुरन्त पानी छोड़ देता है और मैं उसके पीछे बैठ कर मादक चूतड़ और चूत देर तक सहलाता रहता हूँ, सुन्दर और बड़े मादक चूतड़ मेरी कमजोरी हैं, अक्सर मैं जब भी
ek anokha sayong

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  मैं एक बार एक गोरखपुर से दिल्ली ट्रेन का रिजेरवेशन न मिलने के कारण स्लीपर बस से यात्रा कर रहा था। मुझे सीट भी आखिरी, अपर स्लीपर, मिली जो दो लोगों के सोने की थी लेकिन शायद कोई सवारी न होने के कारण ही देर होने के बाद भी रुकी हुई थी। मेरे बैठने के साथ ही ड्राइवर ने बस चला दी। ड्रेस चेंज करने के बाद, लूँगी बनियान में ही थका होने के कारण 10 बजे के आसपास सो गया। चूंकि बस नानस्टाप थी, इसलिए भी निश्चिंत था कि अब रास्ते में कंडक्टर सवारियाँ तो लेगा नहीं। रात में महसूस हुआ कि कोई मेरे पास लेटा हुआ है और उसका हाथ मेरे लन्ड को सहला रहा है। पहले मैंने सोचा कि मेरा सपना होगा पर फिर वही हुआ तो चुपचाप बिना हिले ड़ुले यह देखने की कोशिश की कि यह हो क्या रहा है और कौन कर रहा है। बहाने से मैंने टटोलने के लिए अपना हाथ बढ़ाया तो हाथों को चूचियों का स्पर्श हुआ। मतलब कि मेरी सहयात्री कोई महिला थी। अब
Mastram Sex Kahani – Vafa ya Hawas

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इस कहानी के माध्यम से आप लोगों को जरूर कुछ न कुछ एहसास होगा कि इस दुनिया में औरतें कैसी कैसी होती हैं ! खैर पहले मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ ! मेरा नाम नब्बू है, उम्र 28 साल है और मैं आजाद जिन्दगी जीने वाला हूँ, नागपुर में रहता हूँ, मैं एक अर्द्धसहकारी कंपनी में काम करता हूँ, मेरी अपनी जिंदगी कई लड़कियाँ आई और गई मैंने किसी से भी प्यार नहीं किया और ना ही करना चाहता था ! और मुझे इस बात का घमंड भी था ! लेकिन ऐसा हो न सका ! यह वो हकीकत है जिसने मेरी जिंदगी ही बदल दी, मैं आपको इस कहानी के माध्यम से बताना चाहता हूँ, जिसका एक-एक पल आज भी मेरे आँखों के सामने आता है ! चलिये कहानी का मज़ा लेते हैं ! एक बार मैं अपने ऑफिस के काम से दिल्ली गया था, मैं नागपुर से दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचा, सुबह के 9:30 बज रहे थे। मैंने एयरपोर्ट से बाहर निकल कर टैक्सी ली, मुझे मीटिंग अटेंड करनी थी जिसके लिए मै
rani mere dost ki wife ki chudai

rani mere dost ki wife ki chudai


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जब काम पूरा हो गया तो मैं अब रानी के साथ मस्ती के मूड में था पर कोई सिग्नल रानी ने नहीं दिया तो मैं उसे एम्ब्रस नहीं करना चाहता था। रानी से मैने पूछा आज जब अनिल तुमको छोड़ कर गये तो उसने ये क्यों बोला की राजु शरीफ़ आदमी है। तब रानी बोली कल अनिल मुझसे बोल रहे थे कि राजू बहुत ही बेवकूफ़ है अगर उसे मौका मिलता (किसी की वाइफ़ के साथ अकेले रहने का) तो वह जरूर मौके का फ़ायदा उठाता। फ़िर रानी बोली, जब मैने कहा कि अगर औरत ने गड़बड़ कर दी तो वह बोल रहे थे कि अगर वह किसी औरत को एक्साइट करे तो वह मना कर ही नहीं सकती है। रानी फ़िर बोली इसीलिये मुझे भी उनकी बात सुनकर मरदों की मानसिकता के बारे में पता चल गया और वह कोई गलती नहीं कर रही है और मैं भी ऐसा न करूं। अब मैने कहा ये बात तो ठीक है पर आपको तो मालूम है न मैं भी बड़ा कमीना हूं और आज तो मैं अब तुमको इस समय नहीं छोड़ सकता हूं जब दोनो फ़्री हैं। रानी कुछ ज्यादा नही
sautela baap ke sang bistar par

sautela baap ke sang bistar par


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मेरा नाम डौली है, मैं मुंबई की एक बेहद कमसिन हसीना हूँ, मैं भरे हुए यौवन की पिटारी हूँ जिसको हर मर्द अपने नीचे लिटाना चाहता है, पांच फ़ुट पांच इंच लंबी, जलेबी जैसा बदन, किसी को भी अपनी ओर खींचने वाला वक्ष, पतली सी कमर, मस्त गद्देदार गांड, गुलाबी होंठ, गोरा रंग ! अपने से बड़ी लड़कियों के साथ मेरा याराना है। मैंने इसी साल बारहवीं क्लास की है और नर्सिंग के तीन साल के कोर्स में मैंने दाखला लिया है। मेरी माँ की शादी सोलहवें साल में हो गई थी और बीस साल तक पहुंचते दो लड़कियो की माँ बन गई, सुन्दर औरत है, पांच बच्चे जन चुकी है लेकिन अभी भी कसा हुआ जिस्म है। मेरी माँ के कई गैर मर्दों के साथ रिश्ते थे जिससे मेरा बाप माँ के साथ झगड़ा करता। पापा ने काफी जायदाद माँ के नाम से खरीदी थी। आखिर दोनों में तलाक हो गया, तीन बच्चे पापा ने रखे और हम दो माँ के साथ रहने लगीं। माँ को जवान लड़कों का चस्का था,
nanga dekh kisi or ki chudai ki

nanga dekh kisi or ki chudai ki


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मेरा नाम अनुज/गीतू है ! मैं 23 वर्ष का युवक हूँ। मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला हूँ। मेरे मन में लड़कियों के लिए बहुत इज्ज़त है। मैंने 12 के बाद से मुठ मारना सीखा है और अभी भी कोशिश करता हूँ कि किसी लड़की को सोच कर ना मारूँ ! पता नहीं मेरा मन गवाही नहीं देता ! फिर भी मन में रहता है कि कोई मिले जिसको नंगा देखूँ, उंगली करूँ, चूची दबाऊँ ! खैर मैं अपनी असली आपबीती बताता हूँ ! बात उस समय की है जब मैं कोचिंग करके कोटा से हैदराबाद लौट रहा था जहाँ मेरा परिवार रहता था। मैंने एसी में आरक्षण कराया था, मुझे क्या मालूम था कि मेरे साथ क्या होने वाला है। मैं अपने कम्पार्टमेंट में बैठा और गाड़ी चलने की इंतजार करने लगा। मैं खिड़की से पर्दे हटा कर देख रहा था तो कुछ लड़कियाँ इधर-उधर आ-जा रही थी। मैंने सोचा कि कोई लड़का या आदमी मेरे कम्पार्टमेंट में आए तो सही है, फ़र्जी के गंदे ख्याल से बच जाऊँगा !
मैं – मेरी बीवी और भाभी की अन्तर्वासना

मैं – मेरी बीवी और भाभी की अन्तर्वासना

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Antarvasna sex kahani meri biwi bhabhi or mai मेरे तायाजी के लड़के यानि सुमित भैया कनाडा में दो साल के ट्रेनिंग के लिए गए तो विशाखा भाभी हमारे यहाँ रहने के लिया गई. कारण कि तायाजी चाहते थे कि भाभी को अकेलापन ना लगे. सुमित और विशाखा की शादी भी वाल एक महीने पहले हुई थी. तायाजी अकेले ही हैं इसलिए. भाभी मुझसे दो साल बड़ी है. मेरी शादी केवल दस दिन पहले ही हुई थी. सयाली और मैं नई नई शादी का पूरा मजा ले रहे थे. जब भी समय मिलता हम दोनों कमरे में बंद हो जाते. भाभी हमें खूब चिढाती. सयाली लेकिन चिढती नहीं बल्कि भाभी को उलटा चिढाती और कहती ” भाभी कभी एकदम से कमरे में मत आ जाना नहीं तो और भी आपकी हालत खराब हो जायेगी.” दोनों खूब मजाक करती. धीरे धीरे भाभी की तड़प हम दोनों के सामने भी दिखाई देने लगी. एक दिन सयाली ने मुझसे कहा “जानूं, भाभी की हालत देखी नहीं जाती. कल रात को मैंने उन्हें तकिया दबाते हुए
chacha ki mili bhagat

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chacha ki mili bhagat chudai ki kahani दोस्तों मैं यानि आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो ये कहानी सीमा की है जो छोटी उम्र मे ही विधवा हो गई थी तो दोस्तो सुनिए कहानी सीमा की ज़ुबानी – मैं 28 साल की हूँ और अपने चाचा चाची के साथ इस छोटे से  गाओं में रहती हूँ. मेरे माता पिता एक कार आक्सिडेंट में मारे गये जब में 10 साल की थी. हमारे परिवार मेरे चाचा चाची के अलावा और कोई करीब का रिश्तेदार नही था. शुरू में मुझे गाओं के महॉल में अड्जस्ट होने में तकलीफ़ हुई पर समय के साथ मेने समझौता कर लिया. में बचपन में शहर में एक अच्छे फ्लॅट में पली बढ़ी थी, किंतु अचानक गाओं के महॉल में आना एक मानसिक तकलीफ़ का दौर था. यहाँ गाओं में ना तो टीवी था, ना ही कोई मोबाइल फोन और ना ही गली के नुक्कड़ पर कॉफी हाउस जहाँ में दोस्तों के साथ समय बिताया करती थी. मेरा ज़्यादा तर समय चाचा के साथ खेत