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श्रेया के साथ संजय प्रेम कहानी

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मेरा नाम संजय है। मेरी उम्र 24 साल है, रंग साफ़, दिखने में अच्छा हूँ। लण्ड का आकार भी ठीक-ठाक है, वैसे कभी नापा नहीं। मैंने कंप्यूटर में डिग्री की है। डिग्री पूरी करने के बाद मैंने एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। दरअसल मैं एक कंप्यूटर प्रोफेसर बनना चाहता हूँ इसलिए सोचा क्यों ना स्कूल से शुरुआत की जाए। उस स्कूल में मुझे नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को कंप्यूटर सिखाना था। सभी कक्षाओं में लड़के और लड़कियों की संख्या तक़रीबन बराबर बराबर ही थी। लड़कियाँ एक से बढ़कर एक सुंदर और चालू थी। दरअसल एक तो जिस शहर में पढ़ाता हूँ वहाँ पर लड़कियाँ बहुत फ्रेंक हैं, दूसरे उस स्कूल में सब प्रौढ़ अध्यापक हैं। इसलिए जब लड़कियों ने मुझे अपने अध्यापक के रूप में देखा तो सब बहुत खुश हो गई। स्कूल काफी बड़ा था और कक्षाओं में बच्चे भी काफी थे लेकिन कंप्यूटर लैब में कंप्यूटर 12 ही थे। इसलिए मुझे एक एक
Porn Kahani aurat ki dhadakti aag

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हाय दोस्तो, मेरा नाम जय है और मैं एक काल बॉय हूँ। मेरी पहली कहानी औरत की चाहत प्रकाशित हुई, मेरी दिल को बड़ी ही खुशी हुई और पाठकों के बहुत सारे मेल मेरे पास आये जिनको पढ़कर बहुत ही ज्यादा खुशी मिली। मैं अपने हृदय से धन्यवाद करता हूँ कि आप को मेरी कहानी पसन्द आई। मैंने जो कहानी लिखी थी वो वास्तव में सच थी और जो कहानी अब लिख रहा हूँ वो भी सच ही है। पाठक जो भी समझें, पर यह एक हकीकत है क्योंकि मेरे पास इतना लिखने को है कि मैं रोज एक कहानी लिखूं तो भी तीन चार साल लग जायेंगे जो कि काल्पनिक नहीं हकीकत है। इस समाज का एक कड़वा सच और मेरा भुगता हुआ। चलो अब अपको मैं अपना परिचय एक बार फिर से कराता हूँ ! मेरा नाम जय रंग साफ, कद ५ फीट ८ इंच, एकदम से स्लिम हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ। अब मैं दोस्तो अपनी कहानी पर आता हूँ। मेरी नौकरी तो शिवानी मैडम ने अपने पति के ही ऑफिस में लगवा दी और मैं अब बड़ा ह
meri janu or uski maa ki chudai

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यह उस समय कि बात है जब मैं अपने गाँव से 150 किमी दूर शहर में रहकर बीकॉम 2 की पढ़ाई कर रहा था। शहर में मैं कमरा लेकर अकेला रहता था, मैं अलग से फ़ैमिली रूम में रहता था इसलिये वहाँ आस-पास के लोगों से अच्छी जान-पहचान हो गई थी। और तो और मेरी मकान मालकिन और उनकी चारों बेटियों से मेरा अच्छा लगाव हो गया था, उनकी चारों बेटियाँ बहुत खूबसूरत थी, मगर इन सभी का मेरे लिए महत्व नहीं था क्योंकि मैं किसी और को चाहता था, वहीं मेरे रुम के सामने एक परिवार रहता था, जो मेरी मकान मालकिन के कोई रिश्तेदार लगते थे। उसके घर में थे तो कई लोग पर सिर्फ़ तीन लोग ही रहते थे, मेरी वाली अमृता, उसकी मम्मी और बड़ी बहन रीमा ! उसके पापा को हमेशा काम से बाहर जाना पड़ता था, वो महीने में 8-10 दिन के लिये कभी आते और चले जाते। उसका बड़ा भाई काम के लिये दिल्ली-मुंबई में ही रहता था। अमृता को मैं बहुत चाहता था, वो दिखने में बहुत सेक्सी
munnu ki behen nilu ki chudai kahani

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मेरा यह मानना है कि दारु और चूत कभी भी झूटी नहीं होती – जब भी मौका मिले, इनसे मजे लेने चाहिए। चूत खूब चोदिये मगर गांड मारना न भूलें। और जब गांड मारें तो अपना रायता उसी के अन्दर छोड़ दें ताकि उस लौंडियाँ की गांड में एक गर्म एहसास रह जाए। यह मेरी शैली है – अब कोई माने या न माने। अब सुनिए मेरी कहानी : मैं शिमला का रहने वाला हूँ। मेरे घर के पास एक परिवार है जिसमें चार बच्चे हैं – दो बेटे और दो बेटियाँ। छोटा बेटा जिसका नाम मुन्नू है, मेरा बहुत अच्छा दोस्त है – और छोटी बेटी जिसका नाम नीलू है – उसके तो क्या कहने। मुझसे सिर्फ दो साल छोटी है। मैं मुन्नू के घर बहुत जाता था। मुन्नू से मिलने और फिर नीलू को छूने। मुन्नू और मैं एक ही क्लास में पढ़ते थे। हम दोनों पढ़ाई भी साथ करते थे और लौंडिया-बाज़ी भी साथ ही करते थे। उसको शायद लगता था कि मैं उसकी बहन के चक्कर में उसके घर आता-जाता हूँ। एक दो बार
padosan ki ladki ki chudai kahani

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यारे दोस्तो, मेरा नाम वीरू, बीस साल का हूँ। मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ। मैं आपको अपनी पड़ोसन जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था। मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पीस
mauseri behen ki chudai kahani

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  मेरा नाम चरण है. मै एक छोटे से बस्ती का रहने वाला था. मेरे पिता प्राइमरी स्कूल के मास्टर थे. मेरी उम्र 15 वर्ष की थी जब मै और मेरे माता पिता अपने ननिहाल गया हुआ था. वहां मेरे मामा की शादी थी. वहां पर सभी सगे संबंधी जुटे थे. हम लोग शादी के पंद्रह दिन पहले ही पहुँच गए थे. मेरे पिता जी हम लोग को पहुंचा कर वापस अपनी ड्यूटी पर चले गए. और शादी से एक-दो दिन पहले आने की बात बोल गए. वहां पर दिल्ली से मेरे मौसा भी अपने बाल बच्चों के साथ आये थे. मेरी एक ही मौसी थी. उनको एक बेटा और एक बेटी थी. बेटा का नाम वीरू था और उसकी उम्र लगभग सोलह साल की थी. जबकी मौसी की बेटी का नाम नीरू था और उसकी उम्र लगभग पंद्रह साल की थी. हम तीनो में बहुत दोस्ती थी. मेरे मौसा भी अपने परिवार को पहुंचा कर वापस अपने घर चले गए. उनका ट्रांसपोर्ट का बिजनस था. पहले वो भी साधारण स्तर के थे लेकिन ट्रांसपोर्ट के बिजनस मे
mami ka sailab

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  मेरा नाम राज है, मैं जयपुर का रहने वाला हूँ, उम्र 21 साल है। यह बात दो साल पहले की है जब मैंने बारहवीं की परीक्षा दी थी। मेरे मामा और मामी भी यहीं रहते हैं, हमारे दोनों घरों के बीच में लगभग 30 किलोमीटर का फासला है। मेरे मामा और मामी का मिलन दो साल पहले ही हुआ था मतलब उनकी शादी को सिर्फ दो साल ही हुए थे। मामी एक अध्यापिका हैं और मामा जी सरकारी नौकरी करते है। उनका तबादला दिल्ली हो गया, मामी अपनी नौकरी के कारण उनके साथ नहीं जा सकी इसलिए मामा ने मुझे वहाँ मामी से साथ रहने के लिए बोल दिया। मैं तो खुशी के मारे उछल पड़ा। अब मैं आपको अपनी मामी के बारे में बताता हूँ। उनकी उम्र 24 साल, रंग गोरा, तनाकृति तो पूछो मत यारो ! साड़ी पहने या जींस टॉप…या फिर चाहे राजस्थानी पोशाक … लगती तो हमेशा एक पटाखा ही… जिसे मैं हमेशा जलाने की सोचता था। मामा जी के चले जाने के बाद मैं वहां जाकर रहने
himalay ki vadiyo mai training

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बात उस समय की है जब मैं हिमालय की वादियों में ट्रेनिंग पर था। वैसे मैं मैदानी क्षेत्र का रह्ने वाला हुँ और पर्वतीय भ्रमण का यह मेरा प्रथम अवसर था। होस्टल में पूरे देश के प्रतिभागी थे। गर्ल्स व बॉयस होस्टल साथ-साथ थे। उनमें एन्ट्रेंस अलग-अलग थी, पर अन्दर एक गलियारे से जुड़े थे, जिसके मध्य में केयर-टेकर ऑफ़िस था। केयर-टेकर एक हँसमुख पहाड़ी लड़की थी, जिसने अभी ब्रह्मचर्य आश्रम की अन्तिम वेला में प्रवेश किया ही था; नाम था `रुबी`। मुझे घूमने का शुरु से ही बड़ा शौक रहा है। जब तक किसी भी जगह का चप्पा-चप्पा न घूम लूँ, मुझे चैन नहीं पड़ता। होस्टल में सामान व्यवस्थित करने के बाद मैंने रुबी से आस-पास घूमने की जगहों के बारे में जानकारी ली और सुबह जल्दी तैयार होकर अकेला ही घूमने चला गया और वहीं से सीधे ट्रेनिंग पर दस बजे पहुंच गया। शाम को ट्रेनिंग से लौटकर रुबी को डिजिटल कैमरे में घूमने की फोटो दिखायीं
holi ke rang priya ke sang

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होली का दिन मेरे लिये शुभ दिन बन कर आया। उस दिन मेरे मन की एक बड़ी इच्छा पूरी हो गयी। अनिल मेरे दूर के रिश्ते में मेरा चाचा ही लगता था उन दिनों वो भी आया हुआ था। मुझे अनिल बहुत अच्छा लगता था। मुझे ऐसा लगता था कि हाय ! कभी मैं उसके साथ चुदाई करूं। पर ऐसा मौका कभी नही मिला। मै उस पर दिल से मरती थी। होली उसे हमारे साथ ही खेलना था। चाचा और चाची उसके आने से बहुत खुश थे। अनिल उम्र में मुझसे दो साल छोटा था। अनिल १९ साल का रहा होगा। शाम को होली जलने वाली थी…. चाचा ने होली के बाद की रस्में पूरी की और अपनी रात की शिफ़्ट में काम करने को चले गये…. रात को अचानक मेरी नींद खुल गयी। मैने करवट ली और फिर से आंखे बन्द कर ली। मुझे लगा कि कोई बात कर रहा है। चाची के कमरे से आवाज आ रही थी। चाचा तो थे नहीं….फिर किस से बात हो रही थी। मेरी उत्सुकता बढ गयी। मै बिस्तर से उतरी और चाचा के कमरे के दरवाजे के छेद पर
jor ka jhatka dheere se

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  मैं जब कॉलेज मे पढ़ती थी, तो हमारा सात लड़कियों का ग्रूप था. लेकिन उन सब मे पल्लवी मेरी खास सहेली थी. वो एक छ्होटे गाओं से आई थी. इस शहर मे पेयिंग गेस्ट बन के रहती थी. ऊम्र के हिसाब से हमको भी रोमॅन्स और सेक्स की बातें अच्च्ची लगती थी. हम लड़कों को देखते थे थे और उनके बारे मे बात किया करते थे. दिन मस्ती से गुज़र रहे थे. लेकिन हमेशा समय एक सा नही रहता. जब हमारा कॉलेज का पहला साल पूरा हो रहा था, तो पल्लवी के पिताजी का अचानक देहांत हो गया. वैसे भी वो लोग ग़रीब थे. अब तो कॉलेज की पढ़ाई करना तो दूर रहा, घर चलना मुश्किल हो गया. उसके छ्होटे भाई बहन भी थे. मैं भी सहेली होने के नाते चिंतित थी, पर उसे पैसों की मदद करनेकी स्थिति हमारी ही नही थी. मुझे लगा, हमारा साथ च्छुत जाएगा. वो पढ़ नही पाएगी. लेकिन भाग्या को कुछ और मंज़ूर था. उसकी परिस्थिति से वाकिफ़ किसी दलाल ने उसे संपर्क किया और