doodh bhare mammo se pyaa

doodh bhare mammo se pyaar रिश्ते मे मेरी बड़ी साली की बेटी देल्ही मे ही रहती है, उसका नाम शीमा, उमर अभी 29 साल , मॅरीड,मदर ऑफ 2/मेल किड्स, हब्बी आ

बिज़्नेसमॅन. में अक्सर उसके घर आता-जाता हूँ. यह 5 साल पहले गर्मियों के दिन की घटना है, तब वो 24 की थी. बदन भरा- भरा, गदराया हुआ,
लंबाई 5-5″. मम्मे(बूब्स) भारी(हेवी), बड़े-बड़े(लार्ज), गोल-गोल, फेले हुए, नित्तम्भ(चूतड़) कामुक(सेक्सी). कुल बात यह कि वो शरीर से
पंजाबी जाटनी लगती है. मेरे सामने ही वो बच्ची से जवान हुई. वो कामुक नहीं है, लेकिन मिलनसार और खुश-मिज़ाज़ है. हम दोनो आपस मे
पहले से ही काफ़ी फ्रॅंक है. वो 3-रूम के फ्लॅट मे रहती है.

मेने बेल बजाई तो सुबह के 11 बजे थे. शीमा ने दरवाजा खोला “अहहा, रमेश अंकल आप?” वो बहुत खुश हुई मुझे अपने यहाँ देख कर. मुझे हाथ
से पकड़ कर सोफा पर बिठा दिया और पानी लेकर आई,

“अंकल आज इधर का रुख़ केसे किया, लगता है हम 6-8 महीनों के बाद एक दूजे को देख रहे है?”

“हां, तुम्हे देखे एक अरसा हो गया था, आज अचानक याद आई तुम से मिलने की ओर अब सामने हैं तुम्हारे.”

वो मेरे सामने बैठी हुई थी, सलवार-कमीज़ मे. मेरी नज़र पहले उसके चेहरे पर, फिर मम्मो पर, फिर उसके नीचे फिसल्ती हुई उसके पाओं
तक गई. उसकी आँखें मेरी नज़र पर टिकी थी.

“क्या देख रहे हो बहुत गहरी नज़र से?”

“तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो. शादी से पहले तो तुम सुंदर थी ही, लेकिन आज जब तुम एक बेटे की मा हो अब तो अति-सुंदर हो गई हो.”

“अंकल में आप की रग-रग से वाक़िफ़ हूँ. में जानती नही. आप लड़कियों को बहलाने-फुसलाने मे माहिर हैं, आपकी निगाहें हमेशा लड़कियों की
गोल.गोल. पर रहती है. कोई लड़की आप के साथ आधा घंटा भी नही बैठ सकती इतमीनान से.”

“आइ आम सीरीयस, शीमा.”

शी लाफ्ड आंड वेंट टू किचन. बेटा जो 1+साल का था उस समय वो सो रहा था अंदर बेडरूम मे. कुच्छ देर बाद वो चाइ वगेरह ले कर आई
टेबल पर रखा, एक कप मेरे हाथ मे देकर सामने बैठ गई.

“अंकल, इफ़ इट ईज़ ट्रू वॉट यू साइड, देन, थॅंक यू फॉर दा कॉंप्लिमेंट्स.”

“शीमा, हम अपने शब्द नहीं बदलते, जो सच है वो कह दिया.”

अब वो बदन को उपर-से- नीचे आदम कद शीशे मे देख रही थी जो हमारे सामने ही था. चेहरे पर लाली और आँखों मे चमक आ गई
उसके. और इधर उधर की बातों मे सम’य गुजर गया – 1 बजा था-

“अंकल, आप नहा लो. बाथरूम की चितखनी काम नहीं कर रही, डोर बंद हो जाता है, में तब तक रसोई मे काम करती हूँ.”

मेने दरवाज़ा बंद किया, कपड़े उतारे और शवर खोला. सारे बदन मे साबुन लगाया एक दफ़ा, रोज़मर्रा की तरह आज भी लंड को मेने 3-4
मर्तबा साबुन लगा कर मला,धोया, जिस कारण लंड का अग्र-भाग(हेड) लाल सुर्ख हो गया और लंड मोटा और लंबा होता जा रहा था. मेरा ध्यान
लंड की ओर ही रहा. मेने फिर शवर खोला और सारे बदन को पानी से सॉफ किया, .अचानक देखा बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा-सा खुला है ,मेने
दरवाज़ा बंद कर दिया. में ड्राइ कर के लूँगी(ओपन-एंड क्लोथ शीट) बंद कर बाहर आ गया और सोफे पर बैठ गया. फिर हम दोनो ने आमने-सामने
बैठ कर खाना खाया. शायद उसके बेटे की नींद खुल गयी थी ,रोने की आवाज़ सुनाई दी, वो बेडरूम की ओर गई , बेटे को उठा कर पेशाब करा
कर, मुँह सॉफ किया और बेटे को गोद मे उठा कर बेडरूम में चली गयी. कुच्छ देर बाद-

“अंकल तुम भी इधर आ जाओ हमारे पास, अकेले बैठे बोर हो जाओ गे.”

में उसके पास जाकेर बेड की एक ओर बैठ गया, फिर बेटे को उठाया, प्यार किया, और चूमा, बच्चा हँसने लगा. फिर मेरे नंगे पेट पर पेशाब
कर दिया और लूँगी गीली कर दी.

“ओह, नट-खट, तुमने नाना को नहला दिया, नाना तो पहले से ही नहा लिए हैं.”

“कोई बात नहीं यह तो बच्चा है, यहाँ तो बड़ी-बड़ी लड़कियों ने मेरी लूँगी गीली कर रखी है.”

“इसके दूध पीने का समय हो गया है.” उसने मेरी गोद से बेटे को उठा कर अपनी गोद मे लिटा दिया.

में बाथरूम से बदन सॉफ कर के दूसरी लूँगी बाँध कर वापस आकर बेड पर उसके सामने बैठ गया. (सीन) कमीज़ आधी उपर उठी हुई थी
, वो अपनी दो उंगली से मम्मे को दबाए हुए अपने बेटे के मुँह मे डाले हुई थी और बेटा दूध चूसे जा रहा था, तततूऊज़ .तततूऊज़. तततूऊज़
आवाज़ करते हुए ,और एक हाथ मा के मम्मे पर फेर रहा था. कमीज़ उपर होने से दूसरा मम्मा आधा और पेट पूर्ण नगन था- मेरी नज़र वही
टिक गयी.

“अंकल, क्या कुच्छ दिख रहा है जो आप टिक्टीकी लगाए देख रहे हो?”

“शीमा, में सोच रहा हूँ कि दूध पिलाते हुए मा कितनी प्रशन्न(खुश) व तृप्त(मुठमिं) होती है.”

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