dost ki biwi ko nasik mai choda • Hindi Sex Stories

dost ki biwi ko nasik mai choda मैं और मेरा दोस्त दोनों बहुत अच्छे दोस्त है एक दूसरे के घर आना जाना भी खूब होता है | दोस्त कि बीबी [नीलम

पौचोरी] के साथ खूब हंसी मजाक होता है , होली पर एकात बार दोस्त कि बीबी को तबियत से रंग लगाया है छीना -झपटी में नीलमा के बूब्स को भी दबाया है तब नीलिमा ने ज़रा सा भी बुरा नहीं माना था तब से मैंने सोच लिया था कि मोका मिलने पर इसकी गदराई जवानी का रस पी सकता हु , नीलिमा मेरे दोस्त कि दूसरी बीबी है नीलिमा कि उम्र लगभग 35 साल के आसपास होगी दोस्त कि उम्र 45 साल है , मैं दोस्त से उम्र में तीन साल का छोटा हु लंबा कद गोरा रंग हट्टा -कट्टा ज्यादा जवान और स्मार्ट लगता हु , नीलिमा आधुनिक बिचारो की खूबसूरत पढ़ी लिखी कवि महिला है नीलिमा का फीगर बहुत अच्छा है एक लड़की होने के बाद भी नीलिमा फिट है नीलिमा 30 – 32 की ब्रा पहनती है | जबकि मेरी बीबी कुछ मोटी है 34-36 साइज़ कि ब्रा पहनती है पर है बहुत सुन्दर आज भी किसी
मेरी बीबी ऐसी ही सेक्सी लगती है सलवार सूट में नौजवान को आक्रशित कर लेती है कैसे हुए स्तन है पेट ज्यादा बाहर नहीं निकला हुआ है , जब मेरी बीबी स्पंज वाली ब्रा ,सलवार – सूट और लेगी के साथ पहन लेती है तो बड़े बड़े बूब्स बहुत ही सेक्सी लगते है मैं जब भी दोस्त के पति पत्नी के साथ तो मेरा दोस्त मेरी बीबी के ऊपर लार टपकाता है , नीलिमा और मेरी बीबी में भी खूब दोस्ती है | मेरा दोस्त स्टेट बैक में जाब करता है , जबकि मैं एक फैक्ट्री में वर्क मैनेजर हु मेरी ड्यूटी सिफ्ट में चलती है |

बात उस समय कि है जब मैं अप्रैल 2012 में नाशिक स्थित त्रयंबकेश्वर शिव मंदिर के दर्शन के लिए दोस्त के साथ फेमली सहित गया था, हम रास्ते में खूब हंसी मजाक करते हुए साम को 5 बजे त्रयंबकेश्वर पहुच गए अपनी स्वेम कि कार से । वहा के कुंड में नहाने की प्रथा है , मेरी पत्नी को सफ़र में वोमटिङ होती है उसने नहाने से मना कर दिया ,दोस्त अपनी चढ्ढी -बनयान भूल गया था ,ओ बोला नहीं है की नई लेकर आउ तो उसने भी मना कर दिया नहाने से इनके ये बाते जब तक चलती रही मैं तो सिर्फ चढ्ढी पहन कर कुंड में कूद गया और नहाने लगा नीलिमा अपने लड़की को मेरी बीबी कि गोद में दे दिया और बोली दीदी आप इसे सम्हाल लो तो मैं भी नहा लू तो मेरी बीबी ने कुंड में हाथ पाँव धोकर कुंड का पानी अपने ऊपर छिड़क लिया और एक अंजुली पानी दोस्त के ऊपर भी छिड़क लिया और पवित्र हो गए ,फिर नीलिमा कि लड़की को लेकर कुंड के किनारे बैठ गई और नीलिमा सलवार -सूट पहनकर कुंड के अंदर आ गई और डुबकी लगा लगा कर नहाने लगी ,गर्मी के कारण पानी बहुत अच्छा लग रहा था हम दोनों [नीलिमा और मैं] मुस्किल से दो मिनट ही नहाये होगे कि दोस्त ने मेरी बीबी से बोला कि चलो भाभी प्रशाद ले लेते है जब तक ये दोनों नहा कर निकल आयेगे तो मेरी बीबी ने पूंछा कि जाउ मैं तो मैं बोला जाओ , मैं तो मन ही मन खुस हो गया और दोनों कुंड के किनारे घाट पर नीलिमा और मेरे कपडे एक टावेल को छोड़कर बाकी सामान लेकर दोनों चले गए प्रसाद लेने के लिए अब मैं मैं और नीलिमा ही कुंड में बचे बांकी खूब भीड़ थी कुंड में पर सभी अनजान चेहरे थे , मैंने नीलिमा को इशारा करके अपने पास बुलाया तो ओ आ गई तो मैंने नीलिमा का हाथ पानी के अंदर पकड़ लिया तो नीलिमा भी बड़े प्यार से मेरे हाथ को पकड़ लिया और दोनों आपस में हाथ पकड़ कर नहाने लगे एक साथ डुबकी लगाने लगे मैं पानी के अंदर नीलिमाँ के बूब्स को दबा देता नीलिमा को बुरा नहीं लगता एक बार मैंने नीलिमा को पानी के अंदर किस कर लिया तो बदले में उसने भी किस कर लिया ,हम दोनों पानी के अंदर 10 मिनट तक अठखेलिया करते रहे पर मेरी बीबी और दोस्त अभी तक प्रसाद लेकर नहीं आये तो मैंने नीलिमा को बोला जाओ कपडे बदल कर आओ तब नीलिमा पानी से बाहर निकली तो उसका गीला पतला -गदराया हुआ माँसल जिस्म दिखाई देने लगा नीलिमा कि ब्रा और पेंटी दिखाई देने लगी जो वदन से चिपकी हुई थी , नीलिमा बाहर जाकर देखी कि कही भी कपड़ बदलने कि जगह खाली नहीं थी तो लौट आई तब मैंने पूछा कि कपडे क्यों नहीं बदला तो बोली कि सभी जगह पर भीड़ है लाइन लगाकर खड़ी है बहुत सी लेडीज तो पानी से बाहर निकला और घाट के किनारे एक जगह पर कोने के दीवार के पास लेजाकर लो कपड़ा तो बोली छि यहाँ सभी देखेगे तो मैंने बोला कि मैं टावेल को फैला कर खड़ा हो जाता हु बदल लो तो ओ तैयार हो गई तब मैं टावेल फैलाकर खड़ा हो गया और ओ अपने कपडे बदलने लगी पहले उसने अपनी कुर्ती को उतार दिया मेरी तरफ पीठ करके , फिर ब्रा को उतार दिया ,नीलिमा कि मस्त गदराई हुई पीठ दिखाई देने लगी मैं देखने लगा तो नीलिमा बोली आप उधर घूम जाइये तब मैं दूसरे तरफ मुह कर लिया तो उसने ब्रा पहन लिया फिर एक कुर्ती भी डाल लिया इसके बाद सलवार और पेंटी को भी उतार दिया पीछे घूम कर मैं उसकी चिकनी चिकनी चूतड़ो और जांघो को देखने लगा तो सरमाते हुए बोली आँखे बंद कर लो तो मैं आँखे बंद कर लिया और उसने पेंटी और लेगी पहन लिया और बोली अब आँखे खोल लीजिये तो मैंने आँखे खोल लिया [जबकि मैंने आँखे प्यूरी बन्द ही नहीं किया था और उसके जिस्म को देख रहा था] नीलिमा वही पर एक किनारे बैठ कर बाल सवारने लगी तो मैं नीलिमा के कपडे लिया और उसे कुंड के बगल में बने एक और कुंड में कपडे को धो कर नीलिमा के पास रख दिया तो नीलिमा बोली आप कितने अच्छे पति है भाभी को बहुत आराम देते है तो मैं कुछ नहीं बोला फिर नीलिमा अपने कपड़ो को एक पॉलीथिन के बेग में रख कर झोले में डाल लिया और बाहर आ गए प्रसाद कि दूकान में तो दोस्त और मेरी बीबी नहीं दिखाई दिए तो फोन किया तो बोले कि हम लाइन में लगे है आ जाओ तो नीलिमा और मैं उनके पास पहुँच कर लाइन में लग गए , खूब भीड़ थी धक्का मुक्की चल रही थी उस धक्का मुक्की में दोस्त और मेरी बीबी दोनों आपस में सट कर खड़े थे तब मैंने नीलिमा को इशारा किया तो नीलिमा मुस्कुरा दिया | हम सभी दर्शन करके मंदिर के बाहर आ गए 7 बजे तक उसके बाद कार से नाशिक आ गए रात में 8 बजे तक और नाशिक के द्वारिकापुरी में दो अलग अलग , अगल बगल कमरे में रुक गए दोनों कमरो के बीच में एक दरवाजा भी था आने -जाने के लिए

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