mami ko do mardo ne choda

मेरा नाम यश है, मैं 19 साल का हूँ और यूनिवर्सिटी में पढ़ता हूँ। मैं अपने घर से दूर अपनी मामी-मामा के पास रहता हूँ।

मैं आपको अपनी मामी की एक सच्ची घटना के बारे में बताने से पहले, यह बता देता हूँ कि कैसे एक औरत सैक्स के लिए क्या क्या नहीं कर गुजरती है।
आपको मैं अपनी मामी के बारे में बता देता हूँ, उनकी उमर 38 साल की है, उनका एक लड़का है, जो घर से दूर पढ़ाई के लिए हॉस्टल में रहता है, और घर कभी-कभी ही आता है,

मामा जी बिजनेस मैन हैं जो कि बिजनेस के मामले में कभी दिल्ली, तो कभी जालंधर आदि दूर दूर जाते रहते हैं। अधिकतर घर में मैं और मेरी मामी ही रहते हैं।
मामी देखने में इतनी सैक्सी हैं कि देखते ही मन में सम्भोग का ख्याल आ जाता है। उनका गोरा जिस्म है, उनके स्तन इतने टाईट हैं कि क्या बताऊँ, उनके चूतड़ भी उनके स्तनों की

तरह बड़े बड़े और टाईट हैं। वे सलवार सूट पहनती हैं।
चलो, अब मुद्दे पर आता हूँ, बात उन दिनों की है जब मेरी यूनिवर्सिटी से छुट्टियाँ हुईं थीं, तो मैंने सोचा कि चलो कहीं घूमने जाया जाये, मैंने मामी से कहा- मामी, मेरी यूनिवर्सिटी से

छुट्टियाँ हो गईं हैं इसलिए मैं अपने चाचा के घर जाना चाहता हूँ, इसी बहाने घूम भी आऊँगा।
मामी ने कहा- ठीक है, कल सुबह चले जाना।
मैंने कहा- ठीक है।
फिर मैं दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया, शाम के सात बजे मैं घर वापस आ गया।
मामी ने कहा- हाथ मुँहँ धो लो, मैं खाना लगा देती हूँ।
हमने खाना खाया और टी वी देखने लगे। फ़िर मैं सुबह के लिए कपड़े आदि सामान, बैग में रखने लगा। तभी फोन की घण्टी बजी। मामी ने फोन उठाया, फोन पर कुछ देर बात की,

फिर फोन रख दिया और कहने लगी- तुम्हारे मामा जी का फोन था, कह रहे थे कि एक हफ्ते के बाद लौटेगें। मैंने उनको बताया कि तुम कुछ दिनों के लिए अपने चाचा के घर जा रहे

हो तो वह कहने लगे कि तुम घर पर अकेली क्या करोगी, तुम भी यश के साथ, उसके चाचा के घर घूम आओ इसलिए अब मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगी।
मैंने कहा- ठीक है, अब जल्दी सो जाते हैं, सुबह जल्दी उठना है।
मामी ने कहा- हाँ, ठीक कहा तुमने।
हम सोने लगे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं ऐसे ही लेटा था लेकिन मामी पूरी तरह सो गईं थीं।
मैं मामी को सोते हुए देख रहा था, कितनी सैक्सी लग रही थीं। उनकी सलवार इतनी पतली थी कि उनकी लाल पैंटी, मुझे साफ दिखाई दे रही थी, मैं उनके चूतड़ों के ऊपर पैंटी देख

कर पागल सा हो रहा था, अपने आप को शांत करने के लिए, मैं मुठ मारने लगा, 5 मिनट बाद मैं शांत हो गया।
मामी को बिल्कुल भी नहीं पता था कि मैं उन्हें इस नजर से देखता हूँ। वो तो मुझे अपने बेटे की तरह समझती थीं, लेकिन मैं हर रोज उन्हें देख कर ऐसे ही मुठ मारता रहता था।
अब मुझे नींद आने लगी थी, मैं सोने लगा।
सुबह हम, सात बजे उठे, नहाये, खाना खाया, फिर हम दस बजे दिल्ली के लिए घर से निकल गये। मैंने देखा कि सड़क पर हम दोनों को जाते हुए सभी लोग देख रहे थे, शायद वे

मामी के चूतड़ों को देख रहे थे। जब वे चलती थीं तो उनके कूल्हे ऊपर नीचे होते थे जिन्हें देख किसी का भी लौड़ा खड़ा हो जाये।
एक आदमी ने तो हद ही कर दी, वह मामी की तरफ देख भी रहा था और एक हाथ खुद के लौड़े पर फेर रहा था।
मामी बहुत खुश लग रही थी, वो कहने लगी- मैं पहली बार तुम्हारे चाचा के घर जा रही हूँ।
मैंने कहा- हाँ मामी, आप पहली बार जा रहीं हैं।
फिर हम दिल्ली जाने वाली बस में बैठ गये। सात बजे हम दिल्ली पहुँच गये, हमने ऑटो किया और चाचा के घर पहुँच गये। हमने दरवाजा खटखटाया, अंदर से मेरी चाची आई।
मैंने उनको नमस्ते की और बताया कि मैं अपनी मामी को साथ लाया हूँ।
वो एक दूसरे को गले लगकर मिली। फिर हम अंदर चले गये, चाय पी, खाना खाया, मैं चाची के लड़के के साथ बातें करने लगा जो तब छोटा था, उसका नाम राहुल है और वह दस

साल का था।
मैंने चाची से पूछा- चाचा कहाँ हैं?
उसने बताया कि वे गाड़ी लेकर राजस्थान गये हुये हैं, 5-6 दिनों के बाद आयेंगे।
मेरी चाची और उनका लड़का राहुल ही घर पर रहते थे। चाचा अधिकतर बाहर ही रहते थे। मेरी चाची थोड़ा दूसरे किस्म की औरत थीं, जिसे हम चालू कहते हैं। उनके और मर्दों के

साथ भी संबध थे, लेकिन यह बात चाचा को नहीं पता थी, जब चाचा घर से बाहर रहते थे तो रात को चाची किसी ना किसी को घर पर बुला लेती थीं जो उनकी खुलकर चुदाई करता

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