Mukta ki Chudai kahani Hindi Sex Stories

Mukta ki Chudai kahani • Hindi Sex Stories

Mukta ki Chudai kahani मुक्ता को कोलेज़ में आए अभी एक हफ़्ता भी नहीं हुआ था कि पूरे कोलेज़ के लड़कों में उसके बड़े बड़े, तने हुए गोल गोल स्तन और मोटे मोटे नितम्बों के चर्चे होने लगे थे।

मुक्ता ने अभी अभी कैथल के इन्ज़िनियरिन्ग कोलेज़ में आई टी ब्रांच में प्रवेश लिया था। मुक्ता कोहर वैसे हाँसी से थी पर ए.आई.ई.ई.ई. के कारण उसे यही कोलेज़ मिला था जो कि उसके शहर से काफ़ी दूर है। इसी कारण उसे होस्टल में रहना था।

मुक्ता अपने माँ-बाप की इकलौती बेटी है और अपने पापा की बहुत लाड़ली है। उसका व्यव्हार बिल्कुल बच्चों जैसा था। उसे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। पर ऐसा भी नहीं था कि वो इससे बिल्कुल अनभिज्ञ थी। बस उसे सही जानकारी नहीं मिल पाई थी।

मुक्ता पहले दिन कक्षा में आई तो सबकी नज़र उसके गोल-गोल स्तनों पर पड़ी। पूरी कक्षा में उसके जैसे तने हुए और सुडौल वक्ष शायद किसी लड़की के नहीं थे। उसे तंग ब्रा पहनने की आदत थी जिस कारण उसके वक्ष का ऊपरी हिस्सा फ़ूला हुआ रहता था। शायद यह कसी हुई ब्रा ही उसके वक्ष की सुडौलता का राज़ थी। उसका कद होगा कोई ५’ ४” और फ़ीगर होगी ३५-२८-३६, कन्धे तक लम्बे बाल। उसके नयन-नक्श तो साधारण थे, नाक लम्बी थी। जब वो चलती थी तो उसके स्तन उसकी चाल के साथ ही चाल मिला कर उछलते थे।

कोलेज़ में आते ही उसकी सबसे पहली सहेली अभी उसकी होस्टल की रूम-मेट ऋतु ढींगरा, जो कि दिल्ली से थी और कुछ खास सुन्दर नहीं थी। मुक्ता के सामने तो वो बदसूरत ही लगती थी। हालांकि उसके स्तन भी काफ़ी बड़े और तने हुए थे और ऋतु मुक्ता से ज्यादा पतली कमर वाली थी, पर मुक्ता के गोरे रंग और गदराए बदन के सामने ऋतु की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता था। कोलेज़ का हर लड़का मुक्ता को देखते ही उसके नंगे बदन की कल्पना करने लगता था। जाने कितने लरके उसके बारे में सोच सोच कर मुठ मारते थे।

रितु दिल्ली से होने के कारण सेक्स के ममले में मुक्ता से कहीं ज्यादा जानती थी। जहाँ एक तरफ़ मुक्ता ने अपनी चूत में कभी उँगली तक नहीं घुसाई थी तो वहीं दूसरी तरफ़ ऋतु कई बार सेक्स कर चुकी थी बल्कि केला, बैंगन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल भी बखूबी जानती और करती थी।

बस अब क्या होना था, मुक्ता को एकदम सही लड़की मिल गई थी। धीरे धीरे दोनों काफ़ी अच्छी दोस्त बन गई। अब तो अपने पसन्दीदा लड़कों की बातें करने में भी दोनों को बिल्कुल शरम नहीं आती थी। फ़िर धीरे धीरे अपनी ड्रेस से लेकर अधोवस्त्रों तक की बातें खुलकर होने लगी। कई बार तो रितु मुक्ता के सामने नंगी भी हो जाती थी। शुरू में तो मुक्ता थोड़ी शरमा जाती थी पर फ़िर ऋतु के बार बार उकसाने पर वो भी कभी कभी ऋतु के सामने नंगी हो जाया करती थी।

शुरुआत का शरमीलापन आखिरकार खत्म होता गया और दोनों एकदम खुल गई। फ़िर तो दोनों अपनी झाँटे भी एक दूसरे से ही शेव करवाने लगी। इस से एक तो शेव अच्छी तरह हो जाती थी, दूसरा कट लगने का डर कम हो जाता था। पहली बार तो मुक्ता ऋतु से शेव करवाने में शरमा रही थी पर जब ऋतु ने कई बार उस से अपनी झांटें शेव करवा ली तो मुक्ता भी ऋतु से ही अपनी झांटें शेव करवाने के लिए तैयार हो गई।

“वाह यार ! बड़ी नर्म -नर्म और सुलझी हुई झांटें हैं तेरी तो … एक दम इंग्लिश हिरोइनों की तरह … रंग भी ब्राऊन है !” जब पहली बार ऋतु ने मुक्ता की झांटें देखी तो उसके मुंह से ये निकला।

मुक्ता थोड़ा शरमाई पर मन ही मन अपनी झांटों की तारीफ़ सुनकर खुश भी हुई। ऋतु कई बार मुक्ता की चूत का मुआयना करने के चक्कर में भी रहती थी पर मुक्ता की शर्म इतनी भी नहीं खुली थी। इसलिए वो ऋतु को अपनी झांटों से नीचे नहीं पहुँचने देती थी।

ऋतु को तो शुरू से ही नंगी होकर सोने की आदत थी, पर अब उसने मुक्ता को भी यह आदत डालने की कोशिश में लग गई थी। ऋतु ने उसे नंगी सोने के ऊपर बहुत बार लंबे -चौड़े भाषण दिए, तब कहीं जाकर मुक्ता को नंगी होकर सोने के लिए तैयार कर पायी। तो अंततः दोनों हॉस्टल के कमरे में एकदम नंगी होकर सोने लगी थी।

एक रात मुक्ता की नींद खुली तो उसने महसूस किया कि उसकी टांगों के बीच में हल्की -हल्की गुदगुदी हो रही थी जैसे कि कोई चींटी उसकी टांगों के बीच से चूत की तरफ़ बढ़ रही हो। पहले तो मुक्ता ने सोचा कि इस गुदगुदी को जारी रहने दूँ क्यूंकि उसे मज़ा सा आ रहा था पर फ़िर उसने सोचा कहीं कोई और कीड़ा -मकोड़ा न हो इसलिए उसने झट से अपना हाथ गुदगुदी वाली जगह पर लगाया तो पाया कि वो कोई चींटी नहीं बल्कि ऋतु की ऊँगली थी। मुक्ता ने ऋतु कि तरफ़ देखा तो पाया कि वो उसकी और देखकर मुस्कुरा रही थी।

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