papa ke helping beti Hindi Sex Stories

 

baap beti ki chudai kahani अपनी सच्ची कहानी सुनाने से

पहले मैं थोरा सा बॅकग्राउंड आप सब को बता दूँ.

Hindi Sex Storiesमेरी मदर की 3 साल पहले ट्रॅफिक आक्सिडेंट मैं डेथ हो गई थी. उस वक़्त मैं कोई 12 साल की थी और अपने पापा की अकेली बेटी थी. हम लोग काफ़ी साल पहले हयदेराबाद से रॅवॉल्पींडी शिफ्ट हो गये थे. यहाँ पिंडी मैं सिवई हमारे एक दो फॅमिली फ्रेंड्स के और कोई रिश्त्यदार ना था. बस हम तीनो अकेले रहते थे. मम्मी की डेथ के बाद हम सिर्फ़ 2 रह गये थे.

घर क एक कमरे मैं जो की बाहर कमर्षियल स्ट्रीट की तरफ खुलता था, पापा ने बोहत अक्चा जनरल स्ट्रोरे खोला हुआ था जिस से हमारी भोत आक्ची इनकम हॉट थी. मम्मी के जाने के बाद मुझे भी तन्हाई महसूस नही होती थी. सुबा मैं स्कूल चली जाती. काम वाली सुबा घर की सफाई वगेरा कर के खाना तय्यार कर के चली जाती. स्कूल से वापसी पेर हम दोनो बाप बेटी साथ खाना कहते. मम्मी की कमी भोत महसूस होती थी. इसी तरह एक साल गुज़र गया. और मुझे यह कभी भी एहसास ना हुआ के अगर मुहज़े मम्मी की कमी महसूस होती है टॉ पापा का क्या हाल होता होगा. गो के मैं जवानी की हदों को चू रही थी. मेरी छातियाँ आक्ची ख़ासी निकल आई थी. अक्सर मेरी चूत मैं भी मीठी मीठी खारिश होती थी. मगर ना मैं इन सब चीज़ों का मतलब जान सकी और ना यह महसूस कर सकी के पापा मम्मी के बाद सेक्स को कितना मिस करते हॉंगयन.

फिर एक रात वो हुआ जिसने हम दोनो बाप बेटी की ज़िंदगी बदल दी.

जुलाइ की रात थी. भोथ शेडेड गर्मी के बाद भोत तेज़ बेरिश हो रही थी. बदल भोत ज़ोर ज़ोर से गरज रहे थे. मैं अपने कमरे मैं सहमी हुई सोने की कोशिश कर रही थी, मगर दर के मारे नींद नही आ रही थी. अचानक जो एक दफ़ा बदल भोत ज़ोर से गर्जे टॉ मेरी चीख निकल गई और मैं बेड से उठ कर पापा के बेडरूम की तरफ भागी.

जल्दी से मैं ने पापा के बेडरूम का दरवाज़ा खोला और पापा के बेड के बिल्कुल सामने जा खरी हुई. सूब कुछ इतना जल्दी मैं हुआ के मैं बेडरूम का दरवाज़ा खोलते हुआी यह भी ना देख सकी के मेरे पियरे पापा उस वक़्त अपने बेड पेर बिल्कुल नंगे हो कर अपने टाने हुआी सख़्त लंड को अपनी मूती मैं पाकरे, मूती को लंड पेर ऊपेर नीचे कर रहे थे. मैं ने ज़िंदगी मैं पहली बार लंड को इतना बरा (बिग) देखा था. पापा को भी मोक़ा ना मिल सका के हू अपने जिस्म पेर शीट डाल लेते. उनका मुँह खुला का खुला रह गया.

मेरे भी मुँह से सिवाए इसके और कुत्छ ना निकल सका “सॉरी पापा, मैं दर गैट ही, इस लिये जिलदी मैं डोर पेर नॉक नही कर सकी”.

पापा ने इतनी देर मैं अपने ऊपेर शीट डाल ली और घबरा कर उठ कर बेड पेर बैठ गाए, और बोले: “सॉरी बेटा के तुम ने मुझे इस हालत मैं देख लिया. आ जाओ और यहाँ मेरे पास बैठ जाओ. जुब बेरिश रुक जाए टॉ चली जाना अपने बेडरूम मैं”.

“मगर पापा ….. आप डिस्टर्ब होंगे. आप कुत्छ कर रहे थे अभी?”

लेकिन पापा ने जवाब देने की बजाए मुझे हाथ पाकर कर अपने साथ बेड पेर बिता लिया.

“पापा आप ने कुछ नही पहना … मुझे शरम आती है.” यह कहते हुआी मुझहार खुद अपने बारे मैं एहसास हुआ के मैं ने भी गर्मी की वजह से सिर्फ़ एक थिन सी, सी-थ्रू क़िसम की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी. ब्रा भी नही पहनी थी, इस लिये मेरा जिस्म भी बिल्कुल रिवील हो रहा था. टी-शर्ट भागते हुआी ऊपेर हो गई ही, जिस की वजह से मेरा पायट और मेरे टिट्स सॉफ नज़र आ रहे थे.

एक तरफ पापा को मैं नंगा अपना लंड पाकरे देख चुकी थी, और अब वो शीट डाले बैठे थे के पीछे से उनकी कमर नीचे टुक नंगी थी. और दूसरी तरफ मैं भी सेमी-नेकेड उनके ब्राबार बैठी हुई थी. मेरी साँस फूल रही थी.

मुझे उस रात पापा के ब्राबार बैठ कर पहली दफ़ा एहसास हुआ के मेरा जिस्म भोत सेक्सी है. मेरे बूब्स मेरी 13 साल की आगे के मुक़ाबले मैं ज़ियादा बिग और रौंद हैं और सामने को निकले हुआी हैं. मेरे हिप्स भोत रौंद, हार्ड और बल्जिंग हैं. मेरा जिस्म भरा भर लगता है.

अचानक बेरिश का शोर और ज़ियादा हो गया और साथ ही बदल एक बार फिर भोत ज़ोर से गर्जे के मैं दर के मारे एक दम पापा से चिमत गई. इस तरह चिमटने से पापा की शीट हूट गई, और पापा फिर से नंगे हो गाए. मैं कोई 10 सेकेंड उन्ही चिमती रही, टब मुझे पता चला के मैं अपने पापा के नंगे जिसम से लिपटी हुई हून.

मैं ने घबरा कर पापा से अलग हो ने की कोशिश की टॉ पापा ने मेरी कमर मैं अपना हाथ डाल कर मुझे मज़बूती से अपने नंगे जिसम के साथ जकर लिया.

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