saheli ke bete na sukh dya

 

मेरा नाम रेहान है, 32 साल की मैं गुड़गाव में एक बड़ी फर्म में ऊंचे ओहदे पर हूँ। मेरा फिगर 36-32-38 है, रंग गोरा है, तो आप समझ गये होंगे कि मैं कैसी दिखती हूँ ! मैं देखने में अच्छी हूँ क्योंकि मर्द मुझे ऊपर से नीचे तक अपनी कामवासना भरी नज़रों से घूरते हैं।

मैं अपने खाविन्द के साथ रहती हूँ पर मेरी निजी जिन्दगी में कुछ ख़ास नहीं है क्योंकि मेरा मर्द उम्र में मुझसे काफ़ी बड़ा है और शराबी है, वो अपने बिज़नेस में ही व्यस्त रहता है। मुझे अपने खसम से चुदाई का सुख नहीं के बराबर मिला है, यही कारण है कि मेरे कई बार गैर मर्दों से सेक्स सम्बन्ध बन ही जाते हैं। उन्ही में से एक घटना मैं लिख रही हूँ, यह अभी हाल ही की बात है।

मेरी सहेली भावना जो पहले हमारी ही बिल्डिंग में रहती थी, अब दूसरे शहर में शिफ्ट हो गई है, उसका बेटा प्रथम जो 23 साल का है, वो अपने पुराने दोस्तों से मिलने आया था तो वो मेरे घर भी आया। प्रथम अब काफ़ी हैंडसम दिखने लगा था और उसका बदन भी जानदार, गठीला हो गया था।

उस दिन घर पर कोई नहीं था, सुबह के 10 बज रहे थे और मैं नहा कर निकली ही थी कि तभी प्रथम मिलने आ गया।

मैंने नहा कर अपनी साटिन की मैक्सी पहनी, अंदर कुछ नहीं पहना। मैंने उसको बैठाया, चाय-नाश्ता कराया।

ऐसे ही प्रथम से बातें करने लगी। प्रथम ने बताया कि शाम को वो वापस चला जाएगा।

उसने मुझसे कहा- मौसी, आप अच्छी लग रही हो !

वो मुझे कामुक नज़रों से देखने लगा, वो मेरे वक्ष को घूर रहा था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी और मैक्सी भी टाइट थी गहरे गले की ! शायद इसलिए उसको मेरे उरोज दिख रहे होंगे।

यह सब सोच कर मेरी अन्तर्वासना जागृत होने लगी तो अनायास ही मेरी निगाह उसकी जीन्स के उसके लिंग के उठान पर चली गई। टाइट जीन्स में उसका खड़ा लिंग साफ़ दिख रहा था। मैं समझ गई कि प्रथम क्या चाहता है।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए।

तभी मैं कुछ काम से अन्दर जाने के लिए खड़ी हुई तो प्रथम बोला- मौसी, मैं आपसे गले तो मिला ही नहीं !

और वो मेरे पास आ गया। मैं कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे गले पर अपने होंठ रख दिए। उसने मेरी कमर को पीछे से पकड़ लिया और हाथ कसने लगा।

कुछ देर के लिए तो मैं सब भूल गई और उसकी बाहों में खो गई। फिर वो मेरी कमर पर हाथ से सहलाते हुए मेरे कूल्हों पर हाथ ले आया। मैं उससे अलग हुई पर उसने हाथ वहाँ से नहीं हटाए और बोला- मौसी, आप नहीं जानती कि मुझे आपकी कितनी याद आती है। आपका चेहरा हर वक्त मेरी आँखों के सामने घूमता रहता है।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, मैंने उससे कहा- तुम यहीं बैठो, मैं अभी आती हूँ !

और मैं बेडरूम में चली गई। मैंने सोचा मुझे प्रथम के सामने ऐसे बिना ब्रा-पैंटी के नहीं जाना चाहिए था पर मुझे उसकी बातें सुन कर अच्छा लगा था।

मैंने सोचा कि मुझे ब्रा-पैंटी पहन लेनी चाहिए तो मैं बेडरूम में आई और मैक्सी उतार दी।

इस वक्त मैं मादरजात नंगी खड़ी थी। मैंने पहले ब्रा ली और पहन ली और जैसे ही मैंने पैंटी को अपनी एक टाँग में डाला, प्रथम ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, उसके हाथ मेरे चुच्चों पर थे और वो उनको ब्रा के ऊपर से ही दबा रहा था। अभी मैं समझ ही नहीं पाई थी कि क्या हुआ है कि मुझे प्रथम ने पीछे से गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया।

पैंटी मेरी एक जाँघ में ही रह गई।

प्रथम ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गया और अपने लब मेरे होंठों पर रख कर चूसने लगा।

उसने मेरे हाथ पकड़ लिए जिससे मैं कुछ नहीं कर पाई। मैं अब समझ गई कि वो मुझसे सेक्स करके ही मानेगा।

कुछ देर तो मैंने उसका विरोध करने की कोशिश की पर वो मुझे किस करता रहा। अब मैंने भी उसको चूमना सुरू कर दिया, कहीं ना कहीं मेरा जिस्म भी अपनी प्यास बुझाना चाहता था। अब वो मेरी छाती पर छा गया और उसने दोनों कबूतरों को ब्रा से निकाल लिया और चूमने और दबाने लगा। वो पागलों की तरह मेरे दूध चाटने और चूमने लगा जैसे उस पर शैतान सवार हो ! और अपने लबों से मेरे निप्पल दबाने और चूसने लगा। वो एक निप्पल को मुँह से चूसता और फिर जल्दी से दूसरे निप्पल को चूसता और खींचता।

वो मेरे दूधों को अपने हाथों से दबाने में कोई कसर नहीं रहने दे रहा था।

इस तरह कुछ देर में मैं गर्म होने से ढीली पड़ गई। कुछ देर बाद उसने मेरे हाथ छोड़ दिए और अपने हाथ से मेरे दूध दबाते हुए चूसने लगा। फिर मैंने अपने आप उसके मुँह को अपने दूध पर दबा दिया और उससे कहा- और जम के चूस !

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