yaa to aaj phir kabhi nahi

मामा ने पूछ, रात केसी गुर्जरी, नींद अच्छी से आयी य नहिन. yaa to aaj phir kabhi nahi – 1

मैंने कहा, जबरदस्त, ऐसी मुबारक रात सब को मिले.

यह सुन कर सब ही मुस्कुरने लगे.

भाई ने पूछा, सम ! तैराकी अच्छी से सीख ली न.

मैंने जवाब दिया, बहुत कुछ सीख लिया.

हम लोग घर पहुँच गये और मामा हम लोगोन को छोड़ कर अपने घर चले गये. उन्हें जाते हुए देख कर मैंने मुस्कुर कर शुक्रिया अदा किया और वोह मुस्क्रथे हुए चल्ले गये.

मैं दिल में सोच रही थी कि अब अगली बार मामा से किस तरह मज लुंगी और अब तो कोई मुश्किल भी नहीं. मैं अपने कमरे में चली गयी और शोवेर लेकर सो गयी. सरी रात तो जगी थी. मैं ने तो फार्म हाउस में अपनी जिन्दगी की सब से सोहानी रात गुजरी थी. शाम को सो कर उठी और भाभी के कमरे में चली गयी. वोह भी अभी सो कर उठी थी. शायद उन्होने ने भी भाई के साथ फार्म हाउस का लुत्फ उथाय था. भाईया शोवेर ले रहे थे.

भाभी ने मुझ से कहा, सम ! तुम पिक्क्निक के बाद कित’नी खुश ओर फ्रेश नजर आ रही हो.

मैं सिर्फ मुस्कुर दी. भाभी ने फार्म हाउस वल बेग निकल कि सामान set कर्लैन और इतने में भाईया हस्बे आदत बनियान और शोर्त पहने हुए हाथ में तोलिअ (तोवेल) लिये हुए आ गये.

उन्होने ने मुझे देख कर पूछ, पिक्निक केसी रही

मैं ने कहा, भाईया बहुत मजा आय.

मैं भाभी का हाथ बात रही थी. इत’ने में भाभी ने भाई की तरफ चीख कर कहा,

यह आपको क्या हुआ.

मैं भी चोंकी तो देख कि भाई के कंधे पर नील पड़ी हुई है. मैंने देख तो भीतर तक हिल गयी और सोचने लगी कि कही रात को मामा की जगह भाई तो नहिन थे. भाई थोरे से घबरा गये और मैंने भी भाईया के करीब जाकर देख तो वहाँ दातोन के निशान साफ नजर आ रहे थे. मुझे अछी तरह याद आय कि मैंने मामा के दाहिने कंधे को बुरी तरह कात था, जब उनका लंड मेरी चूत के परदे को फाड़ रहा था. भाई भाभी को तसली दे रहे थे,

मैं फार्म हाउस पर खिड़की के किनारे लेटे हुए था सो हो सकता हैं कि किसी कीड़े ने कात लिया हो.

भाभी ने कहा, मैंने मन किया था न और कहा था न कि हॉल के बीच में सो जओ. पर मेरी कौन सुन’त है.

भाय ने कहा, मामा को खिड़की के पास ठंड लगी तो उन्होने बिस्तर खिड़की से दूर लगा लिया, तब मैं पापा के सामने वाले हिस्से में लेट गया कि कही पापा को रात को कोई ज़ुरुरत हो तो मैं वही हुँ.

मेरी पेशानी पर पस्सेन आ गये और अभी मैं खोफ ज़दह हो ही रही थी कि भाभी की और हल्की सी चीख ने मुझे चोंक दिया. वोह भाईया पर नारज़ हो रही थी और पूछ रही थी,

वोह चादर कहन हैं जिस्पेर आप सोये थे.

भाईया ने कहा, चादर पर चाय गिर गयी थी सो मैंने र्द्य क्लेअनेर को धोने के लिये भिजवा दी हैं और कल मिला जायेगी.

भाभी को यह चादर बोहत अज़ीज़ थी चूंकि यह वही शीत थी जिस्पेर भाभी दुल्हन बंकर पहली बार भाईया के साथ अपनी सोहाग रात मनायी थी और चुदी थी.

मुझे कतो तो लहू नहिन. मैं थर थर ने लगी और अपने कमरे में चली गयी. अब तो कोई शक नहीं था कि गुज़िश्तह रात मेरे साथ मामा नहीं थे. मैंने अपने सगे बडे भाईया के साथ उसी चादर पर अपनी जवानी का लुत्फ उथाय था जो कि भाईया और भाभी की सोहाग रात की थी. भाई ने सोचा उस रात उनकी कोई कज़िन होगी जो रात में अपने तन की आग ठंडी करने उनके पास आ कर सो गयी. सुबह जब चादर पर खून देख होगा और फिर उससे रज़ खुल जाने की वजह से नौकर के हाथों dry cleaner को भिज्व दिया . भाईया को क्या मालूम कि उन्होने ने रात को अपनी छोटी बहन की चूत को चोद था और वही चादर थी जिस्पेर उन्होने ने पहली बार भाभी को चोद था. मैं अब कुछ नोर्मल हुई और तमाम बथोन को सोचने लगी. डिन्नेर में चुप चुप रही और मेरा ज़मीर मलामत कर रहा था कि यह क्या हो गया.

रात को बेड़ पर लेटे हुए मैं सब कुछ सोचती रही और भाई ने किस तरह मुझे चोद था एक एक तफ़सील याद आ रही थी. भाई के बारे में सोचते हुए मुझे उन यदून में एक नय पन लगा और मैं सोचने लगी कि भाई ने किस्स मोहबत से मुझे पहली बार चोद था और सोच रहे होंगे कि वोह कौन थी. यह सोचते सोचते मैं सो गयी और सुभ बहुत देर से अंख खुली. मैं college भी नहिन गयी और तमाम दिन सोच थी ही रही. मम्मी पापा सब ने पूछा और शाम को मामा आय तो उन्होने ने भी पूछ मैंने कहा दिया कि मैं थक चुकी हुँ. मैं सोच रही थी कि मामा अप्प क्यों वहाँ से हटे और यह भी सोचा कि मामा अप कितने बादनसीब है कि ऐसा हस्सीन वक्त गंव दिया. मैं इसी फिक्र में थी और भाई का सेक्स का अन्दज़ कुछ ज़ेयदह ही याद आ रहा था.

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